(विनीत खरे)
नई दिल्ली (साई)। देश की केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों यानी Central Public Sector Enterprises (CPSEs) में शीर्ष नेतृत्व की रिक्तियां 2026 में भी प्रशासन और कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़ा अहम मुद्दा बनी हुई हैं। संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी 2026 तक 53 CPSE ऐसे थे, जो पूर्णकालिक Chairman & Managing Director (CMD) के बिना काम कर रहे थे। इन कंपनियों में नियमित नियुक्ति होने तक अतिरिक्त प्रभार यानी Additional Charge की व्यवस्था के जरिए कामकाज चलाया जा रहा था। BPCL, BSNL, MTNL और MMTC जैसे प्रमुख सरकारी उपक्रम भी इस स्थिति में शामिल बताए गए थे।
हालांकि, 24 सितंबर 2026 को इन 53 कंपनियों को हूबहू वर्तमान सूची मानना सही नहीं होगा। फरवरी के बाद कुछ पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ी है, कुछ कंपनियों में अतिरिक्त प्रभार जारी रहा है और कुछ नए CMD पद भी रिक्त हुए हैं। जुलाई 2026 में सरकार ने प्रशासनिक मंत्रालयों से CPSE के शीर्ष प्रबंधन की लंबित रिक्तियों को तीन महीने के भीतर भरने की प्रक्रिया तेज करने को कहा था।
यही वजह है कि CPSE नेतृत्व की मौजूदा स्थिति को समझने के लिए फरवरी के आधिकारिक आंकड़े और उसके बाद हुए बदलावों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
फरवरी 2026 में 53 CPSE में नहीं था पूर्णकालिक CMD
संसदीय वित्त समिति की रिपोर्ट में फरवरी 2026 की स्थिति को लेकर कहा गया कि 53 CPSE नियमित CMD के बिना चल रहे थे। इन संस्थानों में शीर्ष पद की जिम्मेदारी अतिरिक्त प्रभार के जरिए संभाली जा रही थी। समिति ने इसे CPSE में नेतृत्व, वित्तीय क्षमता और राज्य की संस्थागत क्षमता से जुड़ी व्यापक चुनौतियों का हिस्सा माना।
इस सूची में प्रमुख नामों के तौर पर सामने आए थे—
- Bharat Petroleum Corporation Limited (BPCL)
- Bharat Sanchar Nigam Limited (BSNL)
- Mahanagar Telephone Nigam Limited (MTNL)
- MMTC Limited
ध्यान देने वाली बात यह है कि 53 का आंकड़ा फरवरी 2026 की स्थिति है। यह सितंबर 2026 की प्रत्येक कंपनी की वर्तमान स्थिति की पुष्टि करने वाली live सूची नहीं है। जुलाई में भी इसी फरवरी वाले आंकड़े का हवाला देते हुए सरकार ने मंत्रालयों को शीर्ष पदों की रिक्तियां भरने के निर्देश दिए थे।
आखिर क्यों बदलती रहती है CPSE की CMD सूची?
CPSE में CMD या MD जैसे बोर्ड स्तर के पदों पर नियुक्ति एक प्रक्रिया के तहत होती है। कई मामलों में Public Enterprises Selection Board (PESB) चयन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके बाद संबंधित प्रशासनिक मंत्रालय और अन्य सक्षम स्तरों पर मंजूरी की प्रक्रिया पूरी होती है।
किसी मौजूदा CMD के सेवानिवृत्त होने, पद छोड़ने या अन्य कारण से पद खाली होने और नए पूर्णकालिक अधिकारी के कार्यभार संभालने के बीच समय लग सकता है। इस दौरान किसी मौजूदा निदेशक या अन्य वरिष्ठ अधिकारी को अतिरिक्त जिम्मेदारी दी जा सकती है।
इसलिए ‘CMD पद खाली’ का अर्थ यह नहीं है कि कंपनी बिना किसी प्रमुख अधिकारी के चल रही है। अधिक सटीक स्थिति अक्सर यह होती है कि पूर्णकालिक CMD की नियुक्ति लंबित है और किसी अधिकारी को अस्थायी तौर पर अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
जुलाई में सरकार ने तीन महीने में रिक्तियां भरने को कहा
जुलाई 2026 में सरकार ने प्रशासनिक मंत्रालयों से CPSE के शीर्ष प्रबंधन की रिक्तियों को तेजी से भरने को कहा। यह निर्देश रणनीतिक CPSE के कामकाज की समीक्षा से जुड़ी बैठक के बाद आया था, जिसकी अध्यक्षता कैबिनेट सचिव ने की थी।
रिपोर्ट के अनुसार बैठक में तीन दर्जन से अधिक बोर्ड स्तर के पदों के खाली रहने और लंबे समय तक अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था जारी रहने पर चिंता जताई गई थी। एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से यह भी बताया गया कि एक प्रमुख CPSE में महत्वपूर्ण परियोजना से संबंधित फैसला पद रिक्त रहने के कारण लंबे समय तक अटका रहा था।
सरकार की ओर से मंत्रालयों को मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर तेजी लाने को कहा गया—
- लंबित शीर्ष पदों की पहचान करना।
- चयन प्रक्रिया को तेज करना।
- नियुक्ति प्रस्तावों को मंजूरी की प्रक्रिया में अनावश्यक रूप से लंबित न रखना।
- भविष्य में होने वाली रिक्तियों के लिए पहले से succession planning करना।
- बोर्ड स्तर के महत्वपूर्ण पदों को लंबे समय तक अतिरिक्त प्रभार पर नहीं छोड़ना।
इसका उद्देश्य यह है कि सेवानिवृत्ति या कार्यकाल पूरा होने के बाद नए अधिकारी की नियुक्ति में अनावश्यक अंतर न बने।
सितंबर 2026 तक भी कई जगह अतिरिक्त प्रभार जारी
जुलाई के निर्देश के बावजूद सितंबर 2026 तक कुछ CPSE में अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था जारी रहने के दस्तावेजी उदाहरण सामने आते हैं। इनमें ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियां भी शामिल हैं।
SJVN में CMD का अतिरिक्त प्रभार
SJVN के मामले में भूपेंद्र गुप्ता को CMD का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। कंपनी के उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेज के मुताबिक यह अतिरिक्त प्रभार 1 मई 2025 से शुरू हुआ था। 2026 में भी कंपनी के आधिकारिक संचार में उन्हें CMD के रूप में दर्ज किया गया।
SJVN की 2026 की आधिकारिक जानकारी में भी भूपेंद्र गुप्ता को Chairman & Managing Director के रूप में संबोधित किया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि कुछ CPSE में अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था लंबे समय तक जारी रह सकती है।
THDC India में MD का अतिरिक्त प्रभार
THDC India Limited में स्थिति 2026 के दौरान बदली। जून 2026 में कंपनी के बोर्ड में पुनर्गठन के बाद CMD का अतिरिक्त प्रभार समाप्त हुआ और सिपान कुमार गर्ग को Managing Director का अतिरिक्त प्रभार दिया गया।
कंपनी के 8 सितंबर 2026 के आधिकारिक disclosure के अनुसार उनके MD के अतिरिक्त प्रभार को 11 सितंबर 2026 से छह महीने या पूर्णकालिक अधिकारी की नियुक्ति तक, जो भी पहले हो, बढ़ाया गया है। कंपनी की वर्तमान बोर्ड जानकारी में भी उन्हें Managing Director (Additional Charge) और Director (Finance) बताया गया है।
यह उदाहरण दिखाता है कि कई बार पद का स्वरूप भी बदल सकता है—जहां पहले CMD का अतिरिक्त प्रभार था, वहीं बाद में बोर्ड पुनर्गठन के बाद MD का अतिरिक्त प्रभार जारी रह सकता है।
NewSpace India में भी नेतृत्व रिक्ति का मामला
NewSpace India Limited यानी NSIL में भी 2026 में CMD पद से जुड़ी रिक्ति सामने आई। कंपनी की वर्तमान leadership information में राधा कृष्ण ए. को Chairman and Managing Director (Additional Charge) एवं Director (Finance) के रूप में दर्ज किया गया है।
इससे यह स्पष्ट होता है कि अंतरिक्ष क्षेत्र जैसी रणनीतिक गतिविधियों से जुड़ी सरकारी कंपनी में भी पूर्णकालिक नियुक्ति और अतिरिक्त प्रभार के बीच का अंतर प्रशासनिक रूप से महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।
IRCTC और NTC जैसे मामलों से तस्वीर और बदलती है
फरवरी 2026 के 53 CPSE आंकड़े को सितंबर की स्थायी सूची न मानने का एक कारण यह भी है कि साल के दौरान नई leadership vacancies पैदा हो सकती हैं।
IRCTC के CMD पद से जुड़ी नई रिक्ति और उसके लिए चयन प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी 2026 में सामने आई। इसी प्रकार National Textile Corporation यानी NTC में CMD पद के चयन से संबंधित प्रक्रिया में भी 2026 के दौरान स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।
इसका मतलब है कि CPSE की leadership vacancy को एक स्थिर संख्या की तरह देखना मुश्किल है। एक तरफ पुराने पदों पर नियुक्तियां होती हैं, दूसरी तरफ सेवानिवृत्ति, कार्यकाल समाप्त होने या अन्य प्रशासनिक कारणों से नए पद खाली हो सकते हैं।
केवल CMD ही नहीं, Independent Director पदों की भी बड़ी कमी
CPSE में नेतृत्व का सवाल केवल CMD और MD की नियुक्ति तक सीमित नहीं है।
संसदीय समिति के अनुसार 758 स्वीकृत Independent Director पदों में से 533 पद फरवरी 2026 तक खाली थे। यानी करीब 70 प्रतिशत पद रिक्त थे।
Independent Directors की भूमिका कंपनी के बोर्ड में स्वतंत्र निगरानी, पारदर्शिता और corporate governance से जुड़ी होती है। इसलिए इतनी बड़ी संख्या में पदों का खाली होना बोर्ड संरचना और निगरानी व्यवस्था से जुड़ा अलग मुद्दा बन जाता है।
संसदीय समिति ने CPSE में नेतृत्व रिक्तियों और Independent Director की कमी को व्यापक governance deficit के संदर्भ में रखा है।
अतिरिक्त प्रभार से काम तो चलता है, लेकिन सवाल भी उठते हैं
Additional Charge व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसी कंपनी का रोजमर्रा का प्रशासन पूरी तरह नेतृत्वविहीन नहीं होता। मौजूदा वरिष्ठ अधिकारी आवश्यक निर्णय लेते रहते हैं और संगठन की गतिविधियां जारी रहती हैं।
लेकिन लंबे समय तक अतिरिक्त प्रभार रहने पर कुछ प्रशासनिक प्रश्न सामने आ सकते हैं।
मसलन, यदि कोई अधिकारी अपनी मूल कंपनी की जिम्मेदारी के साथ दूसरी CPSE का भी अतिरिक्त प्रभार संभाल रहा है, तो उसके समय, प्राथमिकताओं और निर्णय लेने की क्षमता पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
हालांकि हर अतिरिक्त प्रभार व्यवस्था को अपने आप कंपनी के खराब प्रदर्शन का कारण मानना उचित नहीं होगा। इसका वास्तविक प्रभाव कंपनी की गतिविधियों, अधिकारी की जिम्मेदारियों, बोर्ड संरचना और लंबित निर्णयों पर निर्भर करता है।
यही कारण है कि सरकार की ओर से अब केवल रिक्त पद भरने के साथ-साथ succession planning पर भी जोर दिया जा रहा है।
फरवरी की 53 कंपनियां सितंबर की पूरी सूची क्यों नहीं?
यह सबसे महत्वपूर्ण तथ्य है।
फरवरी 2026 की 53 CPSE वाली संख्या संसदीय समिति की रिपोर्ट में दर्ज है। लेकिन 24 सितंबर 2026 तक ऐसी कोई नई सार्वजनिक आधिकारिक सूची सामने नहीं मिली, जिसमें उन्हीं 53 कंपनियों की वर्तमान CMD/MD स्थिति एक ही तारीख के आधार पर अपडेट की गई हो।
इसलिए फरवरी के 53 नामों को सितंबर की “आज की 53 मुखिया-विहीन कंपनियां” बताना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।
जुलाई में सरकार द्वारा तीन महीने में रिक्तियां भरने के निर्देश के बाद कुछ कंपनियों में नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ी होगी। दूसरी तरफ, साल के दौरान नई रिक्तियां भी पैदा हुई हैं। इसलिए वर्तमान संख्या जानने के लिए CPSE-दर-CPSE ताजा बोर्ड और नियुक्ति आदेशों की जांच आवश्यक है।
सितंबर 2026 तक सामने आए प्रमुख मामले
| CPSE | सितंबर 2026 तक उपलब्ध स्थिति |
| BPCL | फरवरी 2026 की 53 वाली संसदीय स्थिति में शामिल प्रमुख नाम |
| BSNL | अतिरिक्त प्रभार व्यवस्था से जुड़ा मामला |
| MTNL | अतिरिक्त प्रभार व्यवस्था से जुड़ा मामला |
| MMTC | फरवरी 2026 की 53 वाली स्थिति में प्रमुख नाम |
| SJVN | CMD का अतिरिक्त प्रभार जारी |
| THDC India | Managing Director का अतिरिक्त प्रभार जारी |
| NSIL | CMD का अतिरिक्त प्रभार |
| IRCTC | 2026 में CMD पद की नई रिक्ति/चयन प्रक्रिया |
| NTC | CMD चयन प्रक्रिया में 2026 के दौरान स्थिति लंबित |
यह तालिका सितंबर 2026 की सभी 53 CPSE की आधिकारिक live सूची नहीं है, बल्कि उपलब्ध आधिकारिक और सार्वजनिक सूचनाओं से सत्यापित प्रमुख मामलों का संक्षिप्त चित्र है।
सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती
CPSE नेतृत्व के मामले में सरकार के सामने अब दो समानांतर चुनौतियां हैं।
पहली चुनौती है पुरानी रिक्तियों को भरना। दूसरी चुनौती है कि आने वाले महीनों में सेवानिवृत्ति या कार्यकाल समाप्त होने से बनने वाली नई रिक्तियों के लिए चयन प्रक्रिया पहले से शुरू हो।
जुलाई 2026 में सरकार की ओर से succession planning पर जोर इसी दिशा में देखा जा सकता है। यदि नए अधिकारी की नियुक्ति की प्रक्रिया समय रहते शुरू हो जाए तो अतिरिक्त प्रभार की अवधि कम की जा सकती है।
Department of Public Enterprises के स्तर पर बोर्ड नियुक्तियों और CPSE governance से संबंधित प्रक्रियाएं भी लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई हैं। बोर्ड स्तर की नियुक्तियां केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं हैं, बल्कि कंपनियों के रणनीतिक फैसलों और governance structure से भी जुड़ी होती हैं।
आगे क्या?
आने वाले महीनों में CPSE leadership vacancies पर सबसे ज्यादा नजर तीन स्तरों पर रहेगी।
पहला, फरवरी 2026 में सामने आई 53 रिक्तियों में से कितने पदों पर पूर्णकालिक नियुक्ति होती है।
दूसरा, जुलाई में दिए गए तीन महीने के निर्देश के बाद कितनी नियुक्तियां वास्तव में पूरी होती हैं।
तीसरा, सितंबर 2026 तक सामने आए नए vacancies को मिलाकर CPSE की वास्तविक current vacancy position क्या बनती है।
इस पूरी प्रक्रिया में केवल संख्या महत्वपूर्ण नहीं होगी। यह भी देखना होगा कि किन कंपनियों में अतिरिक्त प्रभार कुछ सप्ताह या महीनों के लिए है और किन कंपनियों में यह व्यवस्था लंबी अवधि तक चल रही है।
फरवरी 2026 में 53 CPSE का पूर्णकालिक CMD के बिना चलना संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति द्वारा दर्ज किया गया महत्वपूर्ण तथ्य है। साथ ही 758 में से 533 Independent Director पदों का खाली होना CPSE governance की दूसरी बड़ी चुनौती को सामने रखता है।
जुलाई में सरकार ने शीर्ष प्रबंधन की रिक्तियां तीन महीने में भरने की दिशा में मंत्रालयों को प्रक्रिया तेज करने को कहा। इसके बावजूद सितंबर 2026 तक SJVN, THDC India और NSIL जैसे संस्थानों में अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्थाएं सार्वजनिक दस्तावेजों में दिखाई देती हैं।
हालांकि फरवरी की 53 कंपनियों को आज की पूरी सूची मानना उचित नहीं है, क्योंकि इस बीच नियुक्तियां और नई रिक्तियां दोनों हुई हैं। इसलिए सितंबर 2026 की वास्तविक स्थिति का सबसे सटीक आकलन कंपनी-दर-कंपनी नवीनतम नियुक्ति आदेशों और बोर्ड संरचना की जांच के बाद ही किया जा सकता है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार द्वारा तय की गई समयसीमा के बाद कितनी CPSE को पूर्णकालिक नेतृत्व मिलता है और कितनी कंपनियों में अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था आगे भी जारी रहती है। यही आने वाले महीनों में CPSE governance और निर्णय प्रक्रिया की वास्तविक तस्वीर तय करेगा।
(लेखक https://www.bharatpsu.com/ के प्रधान संपादक हैं)