मुखिया विहीन चल रहे अनेक PSU, 53 CPSE में पूर्णकालिक CMD नहीं; अतिरिक्त प्रभार से चल रहा काम

शीर्ष नेतृत्व के पद खाली रहने से बढ़ी चिंता

(विनीत खरे)

नई दिल्ली (साई)। देश के केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों यानी Central Public Sector Enterprises (CPSEs) में शीर्ष स्तर के नेतृत्व पदों की रिक्तियां एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और कॉरपोरेट गवर्नेंस का मुद्दा बनी हुई हैं। उपलब्ध सरकारी और संसदीय दस्तावेजों के अनुसार अलग-अलग समय पर बड़ी संख्या में CPSE ऐसे रहे हैं, जिनमें पूर्णकालिक चेयरमैन, चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD), मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) या अन्य बोर्ड स्तर के पद खाली रहे हैं।

फरवरी 2026 के उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर 53 CPSE पूर्णकालिक CMD के बिना संचालित हो रहे थे। इनमें बीपीसीएल, बीएसएनएल, एमटीएनएल और एमएमटीसी जैसी प्रमुख सरकारी कंपनियों के नाम भी रिपोर्ट किए गए थे। इन संस्थानों में नियमित नियुक्ति होने तक अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा रहा था।

यह स्थिति केवल शीर्ष पद के खाली होने तक सीमित नहीं है। बोर्ड स्तर पर निदेशक और स्वतंत्र निदेशकों के पदों की रिक्तियां भी सार्वजनिक उपक्रमों के संचालन और निगरानी से जुड़ा एक अलग विषय हैं।

2026 में सामने आया 53 CPSE का आंकड़ा

मार्च 2026 में सामने आई संसदीय समिति से जुड़ी रिपोर्ट के अनुसार फरवरी 2026 तक 53 CPSE पूर्णकालिक CMD के बिना काम कर रहे थे। रिपोर्ट में नेतृत्व रिक्तियों के साथ वित्तीय संसाधनों और संस्थागत क्षमता से जुड़ी चुनौतियों को भी रेखांकित किया गया।

यह आंकड़ा पूरे सार्वजनिक क्षेत्र की सभी कंपनियों का प्रतिनिधित्व नहीं करता, बल्कि केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उन उपक्रमों से संबंधित है जिनके बारे में उपलब्ध जानकारी रिपोर्ट में दी गई थी।

महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी पद के रिक्त होने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित कंपनी का संचालन पूरी तरह बंद हो जाता है। सरकारी व्यवस्था में कई मामलों में किसी मौजूदा वरिष्ठ अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार देकर कामकाज जारी रखा जाता है।

लेकिन अतिरिक्त प्रभार और नियमित नियुक्ति के बीच लंबे समय का अंतर प्रशासनिक दृष्टि से चर्चा का विषय बन सकता है।

अतिरिक्त प्रभार से चलता है काम

जब किसी CPSE में CMD या MD का नियमित पद खाली होता है तो संबंधित मंत्रालय या विभाग उपलब्ध व्यवस्था के अनुसार किसी दूसरे अधिकारी को अतिरिक्त जिम्मेदारी दे सकता है।

इसका उद्देश्य सामान्य कामकाज को बाधित होने से बचाना होता है। संसद में सरकार पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि बोर्ड स्तर का कोई पद खाली होने पर संगठन के सुचारु संचालन के लिए दूसरे सेवारत अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार दिया जा सकता है।

इस व्यवस्था का तत्काल लाभ यह है कि कंपनी के सामने नेतृत्व का पूरी तरह अभाव नहीं रहता। महत्वपूर्ण प्रशासनिक और परिचालन कार्य जारी रखे जा सकते हैं।

हालांकि, यदि अतिरिक्त प्रभार लंबे समय तक बना रहता है तो जिम्मेदारियों के दोहरे बोझ, निर्णय लेने की प्रक्रिया और जवाबदेही जैसे प्रश्न उठ सकते हैं। इन प्रभावों की तीव्रता कंपनी और पद की प्रकृति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

सरकार ने तीन महीने में रिक्तियां भरने पर दिया जोर

जुलाई 2026 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने प्रशासनिक मंत्रालयों को CPSEs में शीर्ष प्रबंधन की रिक्तियों को तीन महीने के भीतर भरने के लिए कदम उठाने को कहा था। यह निर्देश रणनीतिक CPSEs के कामकाज की समीक्षा से जुड़ी बैठक के बाद सामने आया था।

निर्देशों में लंबित रिक्तियों की पहचान करने, चयन प्रक्रिया में तेजी लाने और नियुक्ति प्रस्तावों को अनुमोदन की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी से बचाने पर जोर दिया गया।

इसके साथ ही मंत्रालयों को भविष्य में होने वाली रिक्तियों के लिए कम से कम छह महीने पहले उत्तराधिकार प्रक्रिया शुरू करने की बात भी कही गई थी।

यह पहल बताती है कि समस्या को केवल मौजूदा रिक्तियों को भरने के बजाय भविष्य की रिक्तियों की समय रहते तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है।

53 CMD रिक्तियों के साथ बोर्ड स्तर की दूसरी चुनौती

CPSEs में CMD पदों के अलावा बोर्ड स्तर पर स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति भी महत्वपूर्ण है।

मार्च 2026 में प्रकाशित संसदीय समिति से संबंधित रिपोर्ट के अनुसार 758 स्वीकृत स्वतंत्र निदेशक पदों में से 533 पद खाली थे। यह आंकड़ा स्वतंत्र निदेशक पदों में बड़ी रिक्ति की ओर संकेत करता है।

स्वतंत्र निदेशक कंपनी के बोर्ड में निगरानी और स्वतंत्र दृष्टिकोण से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्व निभाते हैं। इसलिए इन पदों की पर्याप्त उपलब्धता कॉरपोरेट गवर्नेंस के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है।

हालांकि किसी कंपनी के वास्तविक कामकाज पर रिक्तियों का प्रभाव एक जैसा नहीं होता। कंपनी का आकार, कारोबार, बोर्ड की मौजूदा संरचना और अन्य कार्यकारी निदेशकों की उपलब्धता जैसे कारक भी महत्वपूर्ण होते हैं।

नियुक्ति प्रक्रिया कई स्तरों से गुजरती है

CPSE में CMD, MD और कार्यात्मक निदेशकों की नियुक्ति एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत होती है। कई पदों के लिए Public Enterprises Selection Board (PESB) चयन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

सरकार ने संसद में बताया था कि संबंधित प्रशासनिक मंत्रालय रिक्ति की सूचना के बाद PESB से चयन प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध करता है। PESB की सिफारिश के बाद प्रशासनिक मंत्रालय आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के लिए प्रस्ताव आगे बढ़ाता है।

इसी बहु-स्तरीय प्रक्रिया के कारण किसी अधिकारी का कार्यकाल समाप्त होने और नए पूर्णकालिक प्रमुख की नियुक्ति के बीच समय का अंतर पैदा हो सकता है।

सरकार ने संसद में यह भी बताया है कि अचानक इस्तीफा, पदोन्नति या स्थानांतरण, कार्यकाल का विस्तार नहीं होना, उपयुक्त उम्मीदवार की उपलब्धता, न्यायिक मामले अथवा किसी पद को कुछ समय के लिए स्थगित रखने जैसे कारणों से रिक्तियां उत्पन्न हो सकती हैं।

कुछ पदों के लिए चयन प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी पड़ रही है

शीर्ष पदों को भरने में आने वाली चुनौतियों का एक उदाहरण NewSpace India Limited (NSIL) से भी सामने आया। सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार NSIL के पूर्णकालिक CMD का पद मार्च 2026 में तत्कालीन प्रमुख के सेवानिवृत्त होने के बाद खाली हुआ था और बाद में एक नए चयन विज्ञापन के माध्यम से प्रक्रिया फिर शुरू की गई। इस दौरान वित्त निदेशक को CMD का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था।

यह मामला यह दिखाता है कि चयन प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी यदि नियुक्ति अंतिम रूप तक नहीं पहुंचती है तो रिक्ति लंबी हो सकती है और संस्थान को अंतरिम व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ सकता है।

एक अन्य उदाहरण में जारी रहा उत्तराधिकारी का इंतजार

NTPC के मामले में भी 2026 में उत्तराधिकारी की नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया चर्चा में रही। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार तत्कालीन CMD का कार्यकाल जुलाई 2026 में समाप्त होना था और उत्तराधिकारी के चयन की प्रक्रिया चल रही थी।

ऐसे मामलों में सरकार के सामने दो प्रमुख जरूरतें होती हैं—एक ओर नियमित नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करना और दूसरी ओर कंपनी के दैनिक कामकाज में नेतृत्व की निरंतरता बनाए रखना।

इसलिए अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था को तत्काल समाधान के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जबकि नियमित नियुक्ति की प्रक्रिया समानांतर रूप से चलती रहती है।

सार्वजनिक उपक्रमों पर क्या पड़ सकता है असर?

शीर्ष पदों की लंबी रिक्तियों के संभावित प्रभाव कई स्तरों पर देखे जा सकते हैं। सबसे पहला विषय निर्णय लेने की प्रक्रिया है।

किसी बड़े निवेश, विस्तार, अधिग्रहण, नई परियोजना या रणनीतिक साझेदारी से जुड़े निर्णयों में शीर्ष प्रबंधन की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। यदि किसी अधिकारी के पास अतिरिक्त प्रभार है और उसके पास पहले से ही अपनी जिम्मेदारियां हैं, तो काम का बोझ बढ़ सकता है।

हालांकि यह कहना उचित नहीं होगा कि हर अतिरिक्त प्रभार व्यवस्था से कंपनी की कार्यक्षमता प्रभावित होती ही है। वास्तविक प्रभाव संस्था-विशेष और निर्णय की प्रकृति पर निर्भर करता है।

जवाबदेही का सवाल भी महत्वपूर्ण

पूर्णकालिक प्रमुख की नियुक्ति का संबंध जवाबदेही की स्पष्टता से भी है। जब किसी पद पर नियमित नियुक्ति होती है तो उस पद की जिम्मेदारियां और कार्यकाल स्पष्ट होते हैं।

अतिरिक्त प्रभार की स्थिति में भी अधिकारी जवाबदेही से मुक्त नहीं होता, लेकिन यदि एक अधिकारी एक से अधिक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहा हो तो कार्य-विभाजन और प्राथमिकताओं का सवाल सामने आ सकता है।

इसी संदर्भ में संसदीय समिति ने CPSEs में नेतृत्व रिक्तियों को निर्णय लेने और प्रशासनिक निगरानी से जुड़े व्यापक मुद्दों के साथ जोड़ा है।

समस्या नई नहीं है

PSU में शीर्ष पदों की रिक्तियों का मुद्दा नया नहीं है। 2017 में सरकार ने संसद में बताया था कि उस समय 42 CPSE नियमित MD/CMD/Chairman के बिना थे और इन पदों को निर्धारित प्रक्रिया के बाद भरने की बात कही गई थी।

2019 में भी सरकार के सामने रखी जानकारी के अनुसार 50 CPSE नियमित MD/CMD/Chairman के बिना थे। तब भी अतिरिक्त प्रभार के जरिए संस्थानों का कामकाज जारी रखने की व्यवस्था बताई गई थी।

2025 में संसद में दिए गए जवाब के अनुसार 31 मार्च 2024 तक देश में 272 परिचालन CPSE थे और इनमें से 44 CPSE में पूर्णकालिक Chairperson/CMD/MD या निदेशक पदों पर रिक्तियां थीं।

इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि बोर्ड स्तर की रिक्तियां समय-समय पर सामने आती रही हैं। अलग-अलग वर्षों के आंकड़ों की तुलना करते समय संबंधित तारीख और रिक्ति की परिभाषा को ध्यान में रखना जरूरी है।

चयन प्रक्रिया को समयबद्ध करने पर जोर

वर्तमान स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण पहल उत्तराधिकारी की पहचान पहले से करने की है। यदि किसी CMD या MD का कार्यकाल समाप्त होने वाला है तो समय रहते चयन प्रक्रिया शुरू करने से नेतृत्व में खाली जगह की अवधि कम की जा सकती है।

जुलाई 2026 में सामने आई सरकारी पहल में भी इसी दिशा में कम से कम छह महीने पहले उत्तराधिकार प्रक्रिया शुरू करने पर जोर दिया गया था।

इसके अलावा मंत्रालयों को लंबित मामलों की पहचान कर चयन और अनुमोदन की प्रक्रिया तेज करने को कहा गया था।

आगे की राह क्या हो सकती है?

PSU के शीर्ष पदों की रिक्तियों को कम करने के लिए तीन स्तरों पर ध्यान महत्वपूर्ण हो सकता है—

  • उत्तराधिकार योजना: सेवानिवृत्ति या कार्यकाल समाप्त होने से पहले प्रक्रिया शुरू करना।
  • चयन प्रक्रिया में समयबद्धता: PESB, संबंधित मंत्रालय और सक्षम प्राधिकारी के स्तर पर लंबित चरणों की नियमित समीक्षा।
  • बोर्ड संरचना: CMD/MD के साथ-साथ निदेशक और स्वतंत्र निदेशक पदों को भी समय पर भरना।

इन उपायों का उद्देश्य केवल रिक्त पदों की संख्या कम करना नहीं, बल्कि सार्वजनिक उपक्रमों में नेतृत्व की निरंतरता और जवाबदेही बनाए रखना है।

देश के अनेक केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों में शीर्ष स्तर के पदों की रिक्तियां लंबे समय से प्रशासनिक चर्चा का विषय रही हैं। फरवरी 2026 के उपलब्ध आंकड़ों में 53 CPSE पूर्णकालिक CMD के बिना बताए गए थे, जबकि स्वतंत्र निदेशक पदों की बड़ी संख्या भी खाली थी।

सरकार ने 2026 में इस दिशा में मंत्रालयों को लंबित शीर्ष पदों को तेजी से भरने और भविष्य की रिक्तियों के लिए पहले से उत्तराधिकार प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए।

अतिरिक्त प्रभार से कंपनियों का कामकाज जारी रखा जा सकता है, लेकिन लंबे समय तक नियमित नेतृत्व का अभाव होने पर निर्णय प्रक्रिया, जवाबदेही और बोर्ड गवर्नेंस से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण बने रहते हैं। इसलिए आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि घोषित समयबद्ध नियुक्ति प्रक्रिया कितनी तेजी से लंबित पदों को नियमित नेतृत्व में बदल पाती है।

(लेखक https://www.bharatpsu.com/ के प्रधान संपादक हैं)