(डॉ. मोहन यादव)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सितंबर 2026 का समय एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है। 17 सितंबर को उनका जन्मदिन है और इसी अवसर के आसपास उनके लगभग 25 वर्षों के शासन प्रमुख के रूप में सार्वजनिक जीवन की यात्रा पर चर्चा हो रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने अक्टूबर 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर शासन की जिम्मेदारी संभाली थी और मई 2014 में देश के प्रधानमंत्री बने। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, अक्टूबर 2025 में उन्होंने सरकार के प्रमुख के रूप में सेवा के 25वें वर्ष में प्रवेश किया था।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस यात्रा को सेवा, प्रशासन, राष्ट्र निर्माण और वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका के विस्तार से जोड़ते हुए उनके नेतृत्व की सराहना की है। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री तक की यह यात्रा भारत की राजनीति और शासन व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलावों से जुड़ी रही है।
गुजरात से राष्ट्रीय राजनीति तक की यात्रा
नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी संभाली। प्रधानमंत्री कार्यालय के आधिकारिक विवरण के अनुसार, उस समय गुजरात कई चुनौतियों से गुजर रहा था। 2001 के भूकंप के साथ राज्य पहले के वर्षों में चक्रवात, सूखे और अन्य समस्याओं का सामना कर चुका था। मोदी ने अपने बाद के वक्तव्यों में गुजरात में प्रशासन, कृषि, औद्योगिक विकास और बुनियादी ढांचे से जुड़े बदलावों को अपने शासनकाल की प्रमुख उपलब्धियों के रूप में रेखांकित किया है।
गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में लगभग 13 वर्ष की अवधि के बाद नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आए। 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला और नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद संभाला। इसके बाद 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में भी उनके नेतृत्व में सरकार बनी।
वर्ष 2026 में उनकी राजनीतिक यात्रा का एक अन्य महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि आधिकारिक सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, 10 जून 2026 को नरेंद्र मोदी लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में 4,399 दिनों का कार्यकाल पूरा कर चुके थे और इस अवधि के मामले में उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के लगातार 4,398 दिनों के रिकॉर्ड को पार किया।
वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका
प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में विदेश नीति भारत की शासन और कूटनीतिक प्राथमिकताओं का एक प्रमुख हिस्सा रही है। अमेरिका, रूस, यूरोप, पश्चिम एशिया, अफ्रीका और एशिया-प्रशांत क्षेत्र के देशों के साथ भारत के संबंधों को आर्थिक, रणनीतिक, तकनीकी और सुरक्षा के विभिन्न आयामों से आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया है।
सितंबर 2026 में नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन ने इस भूमिका को फिर से वैश्विक ध्यान में ला दिया। 12 और 13 सितंबर 2026 को हुए सम्मेलन की नई दिल्ली घोषणा में बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार, विकास, आर्थिक सहयोग, स्थिरता और वैश्विक दक्षिण से जुड़े विषयों पर जोर दिया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS की भारत की अध्यक्षता को लोगों और मानव-केंद्रित दृष्टिकोण से जोड़ते हुए कहा कि भारत ने लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास को प्राथमिकता दी। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अध्यक्षता के दौरान 350 से अधिक बैठकें आयोजित की गईं और करीब 30 भारतीय शहरों में विभिन्न गतिविधियां हुईं।
BRICS सम्मेलन के दौरान भारत ने विभिन्न देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय संवाद भी किए। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस सहित कई नेताओं के साथ प्रधानमंत्री मोदी की बैठकें हुईं।
भारत-चीन संबंधों पर हुई बैठक में दोनों देशों ने आपसी सम्मान, संवेदनशीलता और हितों के आधार पर संबंधों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं रूस के साथ वार्ता में राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की गई।
इन घटनाओं से यह तथ्य सामने आता है कि भारत की विदेश नीति में एक साथ कई शक्ति-केंद्रों के साथ संवाद बनाए रखना महत्वपूर्ण तत्व बना हुआ है।
संकट के समय भारत की मानवीय भूमिका
प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण पहलू विदेशों में संकटग्रस्त भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी और मानवीय सहायता से भी जुड़ा रहा है।
कोरोना महामारी के दौरान भारत ने देश में वैक्सीन और दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के साथ कई देशों को चिकित्सा सामग्री और वैक्सीन की आपूर्ति की। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संकटों के दौरान भारतीय नागरिकों की वापसी के लिए भी सरकार ने अभियान चलाए।
यूक्रेन संकट के दौरान भारतीय विद्यार्थियों सहित अन्य नागरिकों को निकालने के लिए अभियान चलाया गया। ऐसे अभियानों ने विदेश नीति के उस पक्ष को रेखांकित किया जिसमें विदेशों में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल किया गया।
मानवीय सहायता का दायरा पड़ोसी देशों और अन्य संकटग्रस्त देशों तक भी रहा है। हालांकि अलग-अलग अभियानों का स्वरूप, पैमाना और परिणाम अलग रहे हैं, लेकिन आपदा और संकट की स्थितियों में भारत की सहायता कूटनीतिक संबंधों के साथ मानवीय दायित्व का भी हिस्सा रही है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद पर नीति
नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ कठोर नीति प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में रही है। उरी हमले के बाद 2016 में भारतीय सेना द्वारा नियंत्रण रेखा के पार सर्जिकल स्ट्राइक और पुलवामा आतंकी हमले के बाद 2019 में बालाकोट एयर स्ट्राइक को सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की प्रतिक्रिया के रूप में प्रस्तुत किया।
इसके बाद आतंकवाद के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भारत की विदेश नीति का महत्वपूर्ण विषय बनाया गया।
2025 में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र में आतंकी ढांचे के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की। इस कार्रवाई और उसके बाद की कूटनीतिक गतिविधियों को लेकर भारत सरकार ने आतंकवाद के विरुद्ध अपनी नीति को राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा से जोड़ा।
इन घटनाओं का आकलन करते समय यह भी महत्वपूर्ण है कि सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े सैन्य अभियानों पर अलग-अलग राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण हो सकते हैं। इसलिए इनके प्रभाव का मूल्यांकन केवल राजनीतिक दावों के आधार पर नहीं, बल्कि आधिकारिक रिकॉर्ड और स्वतंत्र विश्लेषण के आधार पर किया जाना आवश्यक है।
गरीब कल्याण और सामाजिक योजनाओं पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी के शासन की एक प्रमुख विशेषता व्यापक सामाजिक कल्याण योजनाओं का विस्तार रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और अन्य योजनाओं के माध्यम से आवास, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और ऊर्जा से संबंधित सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया।
इन योजनाओं का उद्देश्य विशेष रूप से गरीब और वंचित परिवारों तक सरकारी सहायता पहुंचाना रहा है। केंद्र सरकार के अनुसार, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और डिजिटल माध्यमों ने कई कल्याणकारी योजनाओं की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों तक पहुंचाने में भूमिका निभाई है।
हालांकि किसी भी कल्याणकारी योजना के प्रभाव को समझने के लिए केवल लाभार्थियों की संख्या पर्याप्त नहीं होती। वास्तविक प्रभाव का आकलन लाभ की नियमितता, पात्रता, क्षेत्रीय पहुंच, सेवाओं की गुणवत्ता और लाभार्थियों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में बदलाव जैसे मानकों से किया जाता है।
स्वच्छता से जनभागीदारी तक
2014 में शुरू किया गया स्वच्छ भारत मिशन प्रधानमंत्री मोदी के प्रमुख जनअभियानों में शामिल रहा है। इसका उद्देश्य स्वच्छता, खुले में शौच की समस्या, ठोस कचरा प्रबंधन और सार्वजनिक स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
प्रधानमंत्री द्वारा स्वयं स्वच्छता अभियान में भाग लेने के बाद इसे व्यापक जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया गया। मध्यप्रदेश में इंदौर की स्वच्छता व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर पर उदाहरण के रूप में देखा गया है।
स्वच्छता अभियान का प्रभाव केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि स्थानीय निकायों, नागरिकों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी से भी जुड़ा है। इसलिए इसकी सफलता को प्रशासनिक प्रयास और नागरिक भागीदारी दोनों के संदर्भ में समझना आवश्यक है।
अर्थव्यवस्था, डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भरता
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की आर्थिक नीति में मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया जैसे अभियानों को प्रमुख स्थान दिया गया।
इन अभियानों के माध्यम से विनिर्माण, डिजिटल सेवाओं, स्टार्टअप, रक्षा उत्पादन और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया। भारत के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे ने भुगतान, पहचान और सरकारी सेवाओं की पहुंच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और सरकार का घोषित लक्ष्य देश को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाना है। इस लक्ष्य के सामने रोजगार, उत्पादकता, विनिर्माण, ग्रामीण आय, असमानता और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों जैसी चुनौतियां भी मौजूद हैं। इसलिए आर्थिक विकास की दिशा को समझने के लिए GDP के साथ रोजगार, प्रति व्यक्ति आय, निवेश और जीवन स्तर के आंकड़ों को भी देखना आवश्यक है।
अंतरिक्ष विज्ञान में भारत की उपलब्धियां
भारत के वैज्ञानिक और अंतरिक्ष कार्यक्रमों ने भी पिछले दशक में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है।
चंद्रयान-3 मिशन की 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के निकट सफल सॉफ्ट लैंडिंग भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। ISRO के अनुसार, चंद्रयान-3 ने दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में सॉफ्ट लैंडिंग और रोवर संचालन का प्रदर्शन किया।
2026 में भी चंद्रयान-3 से जुड़े वैज्ञानिक अध्ययन जारी हैं। ISRO ने मई 2026 में बताया कि विक्रम लैंडर के ‘हॉप’ प्रयोग से भविष्य के नमूना-वापसी अभियानों के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारी मिली।
यह उपलब्धियां भारत की वैज्ञानिक क्षमता, अंतरिक्ष अनुसंधान और भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए तकनीकी आधार को मजबूत करने वाली घटनाओं के रूप में देखी जाती हैं।
युवा और महिला सशक्तीकरण
प्रधानमंत्री मोदी के शासनकाल में युवाओं को कौशल, उद्यमिता और स्टार्टअप से जोड़ने के लिए विभिन्न कार्यक्रम चलाए गए। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के माध्यम से छोटे कारोबारियों और उद्यमियों को ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई।
महिलाओं के लिए उज्ज्वला योजना, स्वयं सहायता समूहों और ‘लखपति दीदी’ जैसे कार्यक्रमों पर जोर दिया गया। महिला आरक्षण से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों ने भी संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व पर राष्ट्रीय बहस को नया आयाम दिया है।
इन पहलों का दीर्घकालिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि महिलाओं और युवाओं को वित्तीय सहायता के साथ स्थायी रोजगार, बाजार, शिक्षा, कौशल और निर्णय लेने के अवसर कितने व्यापक स्तर पर मिलते हैं।
संस्कृति, योग और विरासत
भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करना भी मोदी सरकार की विदेश नीति और सार्वजनिक कूटनीति का एक प्रमुख हिस्सा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभाई। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित किया, जिसके बाद हर वर्ष दुनिया के अनेक देशों में योग दिवस आयोजित किया जाता है।
अयोध्या में राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा और जम्मू-कश्मीर से संबंधित संवैधानिक बदलाव जैसे मुद्दे भी प्रधानमंत्री मोदी के राजनीतिक कार्यकाल की प्रमुख घटनाओं में शामिल हैं। इन घटनाओं के राजनीतिक, संवैधानिक और सामाजिक प्रभावों को लेकर विभिन्न वर्गों में अलग-अलग दृष्टिकोण रहे हैं।
इसी तरह ‘मन की बात’ कार्यक्रम के माध्यम से प्रधानमंत्री ने नागरिकों से नियमित संवाद की एक अलग शैली विकसित की। कार्यक्रम में सामाजिक कार्यों, नवाचार, स्थानीय उपलब्धियों और सामान्य नागरिकों की पहल का उल्लेख किया जाता रहा है।
25 वर्षों की यात्रा और आगे की चुनौती
नरेंद्र मोदी की शासन प्रमुख के रूप में लगभग 25 वर्षों की यात्रा को केवल समय की अवधि के रूप में नहीं देखा जा सकता। इस दौरान गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनका प्रशासनिक अनुभव, 2014 के बाद राष्ट्रीय स्तर पर शासन, लगातार तीन लोकसभा चुनावों में सरकार का गठन और 2026 तक वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती सक्रियता जैसे अनेक आयाम जुड़े हैं।
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, मोदी ने अक्टूबर 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी और अक्टूबर 2025 में सरकार के प्रमुख के रूप में सेवा के 25वें वर्ष में प्रवेश किया।
वर्ष 2026 में BRICS की भारत की अध्यक्षता और नई दिल्ली में आयोजित शिखर सम्मेलन ने भी भारत की बहुपक्षीय कूटनीति को केंद्र में रखा। सम्मेलन की घोषणा में वैश्विक शासन संस्थाओं में सुधार, समावेशी विकास और बहुपक्षीय सहयोग जैसे विषय प्रमुख रहे।
आगे भारत के सामने विकसित भारत 2047 का लक्ष्य है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए आर्थिक विकास के साथ रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, तकनीकी क्षमता, पर्यावरण संरक्षण और संस्थागत मजबूती जैसे क्षेत्रों में निरंतर प्रगति आवश्यक होगी।
17 सितंबर को प्रधानमंत्री का जन्मदिन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ था। प्रधानमंत्री कार्यालय के आधिकारिक जीवन परिचय में उनके प्रारंभिक जीवन और सार्वजनिक जीवन में प्रवेश का विवरण उपलब्ध है।
17 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री का जन्मदिन मनाया जाएगा। इसी दिन मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम भी निर्धारित हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वे कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों को जंगल में छोड़ने और श्योपुर के कराहल में स्वयं सहायता समूह सम्मेलन में भाग लेने वाले हैं।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री की लगभग 25 वर्षों की सार्वजनिक यात्रा पर चर्चा स्वाभाविक रूप से राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्रों में जारी रहेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लगभग 25 वर्षों की शासन प्रमुख के रूप में यात्रा भारतीय राजनीति के समकालीन इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। गुजरात के मुख्यमंत्री से देश के प्रधानमंत्री और फिर वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने तक उनकी भूमिका विभिन्न चरणों से गुजरी है।
समर्थकों के अनुसार, इस अवधि में भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा, डिजिटल क्षमता, बुनियादी ढांचे, कल्याणकारी योजनाओं, अंतरिक्ष कार्यक्रम और राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। वहीं लोकतांत्रिक शासन और सार्वजनिक नीति का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन इन उपलब्धियों के साथ-साथ रोजगार, सामाजिक समावेशन, आर्थिक असमानता, संस्थागत जवाबदेही और नीतियों के वास्तविक जमीनी प्रभाव जैसे प्रश्नों को भी ध्यान में रखता है।
नई दिल्ली में सितंबर 2026 में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन ने यह दिखाया कि भारत बहुपक्षीय मंचों पर आर्थिक, कूटनीतिक और वैश्विक शासन से जुड़े विषयों पर सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
आने वाले वर्षों में भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण चुनौती यह होगी कि विकास, आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रभाव के लक्ष्यों को नागरिकों के जीवन स्तर में निरंतर सुधार से कैसे जोड़ा जाए। विकसित भारत 2047 का लक्ष्य इसी व्यापक परिवर्तन की दिशा में रखा गया है।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेवा यात्रा को राष्ट्र निर्माण और भारत की प्रतिष्ठा से जोड़ते हुए उनके जन्मदिन पर शुभकामनाएं व्यक्त की हैं। उनके संदेश का केंद्रीय भाव यही है कि नागरिक भी राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं और भारत को विकसित एवं आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों में सहभागी बनें।
(लेखक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री हैं)
(साई फीचर्स)