नई दिल्ली: रात में ड्राइविंग के दौरान सामने से आने वाली गाड़ियों की तेज हाई-बीम लाइट से होने वाली चकाचौंध को कम करने के लिए केंद्र सरकार वाहन हेडलाइट से जुड़े नियमों में बदलाव की तैयारी कर रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने Central Motor Vehicles Rules में संशोधन का ड्राफ्ट प्रस्ताव जारी किया है। प्रस्ताव का उद्देश्य रात में सड़क पर विजिबिलिटी बढ़ाने के साथ-साथ सामने से आने वाले वाहन चालकों की आंखों पर पड़ने वाली तेज रोशनी को कम करना है।
प्रस्तावित बदलावों में कार और बाइक की हेडलाइट की अधिकतम इंटेंसिटी कम करना, कलर टेंपरेचर की सीमा तय करना, नए दोपहिया वाहनों में ऑटोमैटिक हेडलैंप को लो बीम तक सीमित करना और शहरों में अनावश्यक हाई बीम के इस्तेमाल पर ऑडियो अलर्ट जैसे प्रावधान शामिल हैं।
हालांकि, ये अभी प्रस्तावित नियम हैं और अंतिम नियम नहीं हैं। सरकार ने संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद नए नियमों को अप्रैल 2027 से लागू किए जाने की संभावना है।
कार और बाइक की हेडलाइट की चमक होगी कम
नए प्रस्ताव में वाहनों की हेडलाइट की अधिकतम इंटेंसिटी घटाने की बात कही गई है। इसका सीधा असर उन गाड़ियों पर पड़ेगा जिनकी तेज रोशनी रात में सामने से आने वाले वाहन चालक के लिए परेशानी पैदा करती है।
प्रस्ताव के मुताबिक:
- दोपहिया वाहनों की अधिकतम हेडलाइट इंटेंसिटी 1.5 लाख कैंडेला से घटाकर 1 लाख कैंडेला करने का प्रस्ताव है।
- पैसेंजर कारों के लिए यह सीमा 2.25 लाख कैंडेला से घटाकर 1.5 लाख कैंडेला की जा सकती है।
सरकार का मकसद हेडलाइट की रोशनी को इस स्तर पर रखना है कि चालक को सड़क साफ दिखाई दे, लेकिन सामने से आने वाले वाहन चालक की आंखों पर अत्यधिक चकाचौंध न पड़े।
हेडलाइट के कलर टेंपरेचर पर भी लगेगी सीमा
हेडलाइट की इंटेंसिटी के साथ-साथ उसके कलर टेंपरेचर को भी नियंत्रित करने का प्रस्ताव है। इसके तहत अधिकतम कलर टेंपरेचर 6,500 केल्विन निर्धारित किए जाने की बात कही गई है।
बहुत अधिक कलर टेंपरेचर वाली सफेद या नीली रोशनी कई परिस्थितियों में ज्यादा चुभने वाली महसूस हो सकती है। इसलिए प्रस्ताव का उद्देश्य हेडलाइट की रोशनी को सड़क सुरक्षा के लिहाज से अधिक उपयुक्त बनाना है।
नई बाइक्स में ऑटोमैटिक हेडलाइट सिर्फ लो बीम पर
दोपहिया वाहनों को लेकर प्रस्तावित बदलाव भी महत्वपूर्ण है। नए दोपहिया वाहनों में Automatic Headlamp On (AHO) सिस्टम को केवल पासिंग बीम यानी लो बीम पर काम करने की व्यवस्था की जा सकती है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वाहन चलते समय हेडलाइट अपने आप तो चालू रहे, लेकिन हर समय हाई बीम सक्रिय न हो।
इससे खासकर शहरों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में सामने से आने वाले वाहन चालकों को अनावश्यक तेज रोशनी से होने वाली परेशानी कम हो सकती है।
शहर में हाई बीम इस्तेमाल करने पर मिलेगा ऑडियो अलर्ट
प्रस्तावित नियमों में हाई बीम के अनावश्यक इस्तेमाल को रोकने के लिए ऑडियो चेतावनी प्रणाली का प्रावधान भी शामिल है।
अगर कोई वाहन शहरी क्षेत्र में अनावश्यक रूप से हाई बीम का इस्तेमाल करता है, तो वाहन में लगा सिस्टम चालक को ऑडियो अलर्ट देकर सावधान कर सकता है।
इसका उद्देश्य चालक को हाई बीम बंद करके लो बीम का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करना है।
हाईवे पर अलग होंगे नियम
शहरी इलाकों और हाईवे की ड्राइविंग परिस्थितियां अलग होती हैं। हाईवे पर कम रोशनी और लंबी दूरी तक सड़क देखने की जरूरत को देखते हुए प्रस्ताव में अलग व्यवस्था रखी गई है।
प्रस्ताव के अनुसार 60 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति पर चलने वाले वाहन में हाई-बीम से जुड़ा ऑडियो अलर्ट सक्रिय नहीं होगा।
इससे हाईवे पर चालक को जरूरत के मुताबिक हाई बीम का इस्तेमाल करने की सुविधा बनी रह सकती है।
बस और भारी वाहनों पर रिफ्लेक्टिव टेप होगा जरूरी
सरकार सिर्फ तेज हेडलाइट को नियंत्रित करने पर ध्यान नहीं दे रही है। रात में सड़क पर बड़े वाहनों की पहचान आसान बनाने के लिए बसों और भारी वाहनों पर रिफ्लेक्टिव टेप को अनिवार्य करने का भी प्रस्ताव है।
रात या कम विजिबिलिटी वाले मौसम में पीछे से आने वाली गाड़ी की हेडलाइट जब रिफ्लेक्टिव टेप पर पड़ती है तो भारी वाहन दूर से दिखाई दे सकता है।
इससे पीछे से टक्कर होने की संभावना कम करने में मदद मिल सकती है, खासकर उन सड़कों पर जहां स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था सीमित है।
कोहरे और बारिश में भी मददगार होगी रिफ्लेक्टिव मार्किंग
भारत के कई हिस्सों में सर्दियों के दौरान घना कोहरा रहता है। इसके अलावा बारिश और धूल के कारण भी रात में विजिबिलिटी काफी कम हो सकती है।
ऐसे में भारी वाहनों पर स्पष्ट रिफ्लेक्टिव मार्किंग होने से दूसरे वाहन चालकों को उनकी मौजूदगी और चौड़ाई का अनुमान लगाने में मदद मिल सकती है।
यानी प्रस्तावित नियम सिर्फ हाई बीम की समस्या को हल करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रात के समय वाहन की विजिबिलिटी और सड़क सुरक्षा को व्यापक रूप से बेहतर करने पर केंद्रित हैं।
पुराने वाहनों पर क्या होगा असर?
प्रस्तावित बदलाव मुख्य रूप से नए वाहनों और नए उपकरणों से जुड़े मानकों पर केंद्रित हैं। इसलिए पहले से सड़क पर चल रही हर कार या बाइक में नई हेडलाइट लगाना अनिवार्य होगा, ऐसा फिलहाल नहीं कहा जा सकता।
पुराने वाहनों पर नियम किस तरह लागू होंगे, यह अंतिम अधिसूचना और उसके प्रावधानों से स्पष्ट होगा।
इसलिए वाहन मालिकों को अंतिम नियम जारी होने तक इंतजार करना होगा।
अभी अंतिम नियम नहीं हुए हैं
यह ध्यान रखना जरूरी है कि MoRTH का मौजूदा कदम ड्राफ्ट प्रस्ताव है। मंत्रालय ने Central Motor Vehicles Rules में संशोधन के लिए प्रस्ताव जारी किया है और संबंधित पक्षों से सुझाव तथा आपत्तियां मांगी हैं।
इसके बाद सरकार प्राप्त सुझावों की समीक्षा करेगी। जरूरत के मुताबिक प्रावधानों में बदलाव भी किया जा सकता है।
इसलिए फिलहाल प्रस्ताव में दी गई हर सीमा को अंतिम नियम मानना सही नहीं होगा।
अप्रैल 2027 से लागू होने की संभावना
प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलने के बाद नए प्रावधानों को अप्रैल 2027 से लागू करने की तैयारी की जा रही है।
अगर प्रस्तावित नियम बिना बड़े बदलाव के लागू होते हैं, तो अगले साल से नई कारों और बाइकों में हेडलाइट की इंटेंसिटी, कलर टेंपरेचर और ऑटोमैटिक हेडलाइट सिस्टम से जुड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
हालांकि, अंतिम तारीख और नियमों की सटीक शर्तें सरकारी अधिसूचना जारी होने के बाद ही तय मानी जाएंगी।
क्यों जरूरी है हाई बीम पर नियंत्रण?
रात में हाई बीम का गलत इस्तेमाल सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ा सकता है। सामने से आने वाले वाहन की तेज रोशनी चालक की आंखों में पड़ने पर कुछ समय के लिए सड़क और आसपास की वस्तुएं साफ दिखाई नहीं देतीं।
यह समस्या खास तौर पर:
- दो लेन वाली सड़कों पर,
- ग्रामीण क्षेत्रों में,
- बिना स्ट्रीट लाइट वाली सड़कों पर,
- पहाड़ी रास्तों पर,
- बारिश और कोहरे के दौरान
ज्यादा गंभीर हो सकती है।
ऐसे में हेडलाइट की रोशनी और हाई बीम के इस्तेमाल को नियंत्रित करने से सड़क सुरक्षा बेहतर करने में मदद मिल सकती है।
क्या बदल जाएगा आम वाहन चालकों के लिए?
अगर प्रस्तावित नियम लागू होते हैं, तो आम वाहन चालकों के लिए सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि नई गाड़ियों की हेडलाइट पहले की तुलना में नियंत्रित इंटेंसिटी वाली हो सकती है।
नई बाइक्स में ऑटोमैटिक हेडलैंप लो बीम पर काम कर सकता है। शहरों में अनावश्यक हाई बीम इस्तेमाल करने पर ऑडियो चेतावनी मिल सकती है। वहीं बसों और भारी वाहनों पर रिफ्लेक्टिव मार्किंग रात में उनकी पहचान आसान बनाएगी।
कुल मिलाकर सरकार का फोकस ‘ज्यादा तेज रोशनी’ के बजाय ‘बेहतर विजिबिलिटी और कम ग्लेयर’ पर दिखाई देता है।
सड़क सुरक्षा के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकता है
भारत में रात के समय ड्राइविंग के दौरान हाई बीम से होने वाली चकाचौंध लंबे समय से वाहन चालकों की शिकायत का विषय रही है। प्रस्तावित नियम लागू होने के बाद वाहन निर्माताओं, दोपहिया कंपनियों और भारी वाहन ऑपरेटरों को नए मानकों के मुताबिक अपने वाहनों और लाइटिंग सिस्टम में बदलाव करना पड़ सकता है।
फिलहाल अंतिम फैसला सरकार की ओर से नियमों की समीक्षा और सुझावों पर विचार के बाद होगा। लेकिन अगर ये प्रस्ताव लागू होते हैं, तो अप्रैल 2027 से भारतीय सड़कों पर रात की ड्राइविंग से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है।

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