मिशन शक्ति के तहत सिवनी के मठ कन्या विद्यालय में जागरूकता कार्यक्रम, छात्राओं को साइबर सुरक्षा और महिला सहायता सेवाओं की दी गई जानकारी

सिवनी के मठ कन्या शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में मिशन शक्ति अभियान के तहत छात्राओं के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में साइबर सुरक्षा, महिला हेल्पलाइन, पोषण, स्वास्थ्य एवं महिला सशक्तिकरण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य छात्राओं को आत्मनिर्भर, जागरूक और सुरक्षित बनाना था।

मिशन शक्ति अभियान के तहत छात्राओं को किया गया जागरूक

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)।महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, शिक्षा और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत सिवनी जिले में लगातार जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में सोमवार को मठ कन्या शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय,सिवनी में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें छात्राओं को साइबर सुरक्षा, महिला सहायता सेवाओं, पोषण, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई।

यह कार्यक्रम बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ एवं हब फॉर एम्पॉवरमेंट ऑफ वूमेन योजना के अंतर्गत आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को उनके अधिकारों, सुरक्षा उपायों और सरकारी सहायता तंत्र के प्रति जागरूक बनाना था ताकि वे भविष्य में किसी भी चुनौती का आत्मविश्वास के साथ सामना कर सकें।

महिला एवं बाल विकास विभाग की पहल

यह जागरूकता कार्यक्रम कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना के निर्देशन तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री मनोज लारोकर के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।

जिले में महिलाओं और बालिकाओं के हित में संचालित योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए विभाग लगातार स्कूलों, कॉलेजों और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता गतिविधियां संचालित कर रहा है। इसी अभियान के तहत छात्राओं को न केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है, बल्कि उन्हें आत्मरक्षा, साइबर सुरक्षा और कानूनी सहायता के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है।

मठ कन्या विद्यालय में हुआ विशेष आयोजन

कार्यक्रम का आयोजन प्रशासक सुश्री ईशा बाल्मीक के मार्गदर्शन में किया गया। विद्यालय परिसर में बड़ी संख्या में छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विभिन्न विषयों पर आयोजित सत्रों में सक्रिय सहभागिता निभाई।

कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को सरल भाषा में समझाया गया कि डिजिटल युग में सुरक्षा के प्रति सजग रहना कितना आवश्यक है। साथ ही महिलाओं और बच्चों के लिए उपलब्ध सहायता सेवाओं की विस्तृत जानकारी भी साझा की गई।

साइबर सुरक्षा पर दिया गया विशेष जोर

कार्यक्रम में वन स्टॉप सेंटर की केस वर्कर श्रीमती वर्षा बैंस ने छात्राओं को साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी।

उन्होंने बताया कि आज के समय में मोबाइल फोन और इंटरनेट का उपयोग तेजी से बढ़ा है। ऐसे में ऑनलाइन धोखाधड़ी, फर्जी कॉल, सोशल मीडिया फ्रॉड, बैंकिंग ठगी और डिजिटल अपराधों से बचाव के लिए जागरूक रहना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने छात्राओं को निम्नलिखित महत्वपूर्ण सुझाव दिए—

  • किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें।
  • ओटीपी, बैंक विवरण या पासवर्ड किसी को न बताएं।
  • संदिग्ध लिंक या फर्जी वेबसाइटों से सावधान रहें।
  • सोशल मीडिया पर गोपनीय जानकारी सार्वजनिक न करें।
  • किसी भी साइबर अपराध की तुरंत शिकायत करें।

महिला सहायता सेवाओं की दी गई जानकारी

कार्यक्रम में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए संचालित विभिन्न हेल्पलाइन सेवाओं की जानकारी भी विस्तार से दी गई।

छात्राओं को निम्नलिखित हेल्पलाइन नंबरों के बारे में बताया गया—

  • 1098 – चाइल्ड हेल्पलाइन
  • 181 – महिला हेल्पलाइन
  • 112 – आपातकालीन सहायता
  • 1930 – साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन

विशेषज्ञों ने कहा कि किसी भी प्रकार की हिंसा, उत्पीड़न, ऑनलाइन ठगी या आपात स्थिति में इन हेल्पलाइन सेवाओं का उपयोग तुरंत किया जा सकता है।

वन स्टॉप सेंटर की भूमिका समझाई गई

कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को वन स्टॉप सेंटर की कार्यप्रणाली के बारे में भी जानकारी दी गई।

उन्हें बताया गया कि यह केंद्र महिलाओं को एक ही स्थान पर विभिन्न प्रकार की सहायता उपलब्ध कराता है, जिनमें शामिल हैं—

  • कानूनी सहायता
  • मनोवैज्ञानिक परामर्श
  • चिकित्सा सहायता
  • पुलिस समन्वय
  • अस्थायी आश्रय
  • परामर्श एवं पुनर्वास सेवाएं

इस जानकारी का उद्देश्य छात्राओं को यह विश्वास दिलाना था कि किसी भी कठिन परिस्थिति में सरकारी सहायता उनके लिए उपलब्ध है।

पोषण और स्वास्थ्य पर भी हुआ मार्गदर्शन

कार्यक्रम केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छात्राओं के स्वास्थ्य और पोषण पर भी विशेष ध्यान दिया गया।

शहरी परियोजना कार्यालय की पर्यवेक्षक श्रीमती कविता दुबे तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने संतुलित आहार, पोषण और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि किशोरावस्था में सही खान-पान और पौष्टिक भोजन शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

संतुलित आहार के बारे में दी गई महत्वपूर्ण जानकारी

विशेषज्ञों ने छात्राओं को सलाह दी कि दैनिक भोजन में निम्नलिखित खाद्य पदार्थ शामिल किए जाएं—

  • हरी पत्तेदार सब्जियां
  • दालें और प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थ
  • दूध एवं दुग्ध उत्पाद
  • मौसमी फल
  • साबुत अनाज
  • पर्याप्त मात्रा में पानी

उन्होंने जंक फूड और अत्यधिक मीठे पेय पदार्थों के सेवन से बचने की भी सलाह दी।

प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता ने बढ़ाया उत्साह

कार्यक्रम को रोचक और सहभागितापूर्ण बनाने के लिए प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।

इस प्रतियोगिता में छात्राओं से महिला अधिकार, पोषण, साइबर सुरक्षा और सरकारी योजनाओं से जुड़े प्रश्न पूछे गए।

सही उत्तर देने वाली छात्राओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया, जिससे अन्य छात्राओं का भी उत्साह बढ़ा।

इस प्रकार की प्रतियोगिताएं केवल ज्ञान बढ़ाने का माध्यम नहीं होतीं बल्कि विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और जागरूकता भी विकसित करती हैं।

छात्राओं में दिखा उत्साह

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्राओं ने सक्रिय भागीदारी की।

छात्राओं ने विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछे और विशेषज्ञों से उनके समाधान भी प्राप्त किए।

विशेष रूप से साइबर सुरक्षा और महिला हेल्पलाइन से जुड़ी जानकारी में छात्राओं की विशेष रुचि देखने को मिली।

मिशन शक्ति अभियान का उद्देश्य

मिशन शक्ति भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा संचालित एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को सुरक्षित, आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना है।

इस अभियान के प्रमुख उद्देश्य हैं—

  • महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
  • बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहन देना।
  • कानूनी अधिकारों की जानकारी देना।
  • महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना।
  • सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना।

ऐसे कार्यक्रम ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

समाज पर सकारात्मक प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि विद्यालय स्तर पर आयोजित इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रभावी माध्यम बनते हैं।

जब छात्राएं अपने अधिकारों, सुरक्षा उपायों और सरकारी सहायता सेवाओं के बारे में जानकारी प्राप्त करती हैं तो वे स्वयं के साथ-साथ अपने परिवार और समाज को भी जागरूक करती हैं।

इस प्रकार की पहल महिला सुरक्षा और सामाजिक जागरूकता दोनों को मजबूत करती है।

विशेषज्ञों की राय

शिक्षा एवं महिला सशक्तिकरण से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि आज के डिजिटल दौर में साइबर सुरक्षा की जानकारी प्रत्येक छात्रा तक पहुंचना अत्यंत आवश्यक है।

उनके अनुसार यदि विद्यालय स्तर पर नियमित रूप से ऐसे जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं तो साइबर अपराध, बाल उत्पीड़न और महिलाओं के विरुद्ध अपराधों को रोकने में काफी मदद मिल सकती है।

साथ ही पोषण और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी किशोरियों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

भविष्य की दिशा

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जिले में भविष्य में भी इसी प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने की संभावना है।

इन कार्यक्रमों के माध्यम से—

  • अधिक से अधिक छात्राओं को जागरूक किया जाएगा।
  • महिला सुरक्षा योजनाओं की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाई जाएगी।
  • डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाएगी।
  • पोषण और स्वास्थ्य संबंधी अभियान मजबूत किए जाएंगे।
  • महिला सशक्तिकरण को नई गति मिलेगी।

सिवनी के मठ कन्या शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित मिशन शक्ति जागरूकता कार्यक्रम छात्राओं को सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित करने वाली एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। कार्यक्रम के दौरान साइबर सुरक्षा, महिला हेल्पलाइन, वन स्टॉप सेंटर की सेवाएं, पोषण और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी उपयोगी जानकारी साझा की गई। इस तरह के आयोजन न केवल छात्राओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाते हैं, बल्कि उन्हें सुरक्षित, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में भी सशक्त करते हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग की यह पहल समाज में जागरूकता और महिला सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक सराहनीय कदम मानी जा रही है।