(अशोक सोनी)
सिवनी (साई)। भारत की संस्कृति में विजयादशमी या दशहरा केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि यह अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है। हर साल बुराई के प्रतीक रावण का पुतला जलाकर लोग यह संकल्प लेते हैं कि जीवन में असत्य, अन्याय और अधर्म का अंत कर सत्य, धर्म और न्याय की राह अपनानी चाहिए। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सिवनी जिले में इस बार का दशहरा बेहद भव्य और धार्मिक उत्साह के साथ मनाया गया।
🔹 मिशन स्कूल मैदान बना भव्य उत्सव स्थल
शनिवार 04 अक्टूबर 2025 को सिवनी के मिशन स्कूल खेल मैदान में रावण दहन कार्यक्रम का आयोजन हुआ। मैदान में हजारों श्रद्धालु, महिला-पुरुष और बच्चे एकत्रित हुए। पूरे मैदान को रंग-बिरंगी रोशनी और झालरों से सजाया गया था। शाम ढलते ही वातावरण जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा।
- कार्यक्रम का शुभारंभ रामलीला मंचन से हुआ।
- श्रीराम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान के जीवन प्रसंगों का मंचन देखकर लोग भाव-विभोर हो उठे।
- जैसे ही श्रीराम द्वारा रावण वध का दृश्य प्रस्तुत किया गया, पूरा मैदान तालियों और नारों से गूंज उठा।
🔹 रावण दहन का दृश्य
लगभग 60 फीट ऊँचा रावण का पुतला इस बार आकर्षण का केंद्र रहा।
- जैसे ही श्रीराम की भूमिका निभा रहे कलाकार ने बाण छोड़ा, रावण का पुतला धू-धू कर जल उठा।
- आतिशबाजी और पटाखों की गूंज ने पूरे वातावरण को रोमांचक बना दिया।
- रावण दहन का दृश्य देखते ही लोगों ने जयकारों के साथ बुराई के अंत और अच्छाई की विजय का संदेश ग्रहण किया।
🔹 प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था
इस मौके पर जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने पुख्ता व्यवस्था की थी।
- कार्यक्रम स्थल पर पुलिस बल की तैनाती रही।
- ट्रैफिक पुलिस ने जाम की स्थिति से बचने के लिए मार्ग परिवर्तित किए।
- अग्निशमन वाहन भी मौके पर मौजूद रहे।
🔹 धार्मिक और सामाजिक संदेश
स्थानीय धर्मगुरुओं और जनप्रतिनिधियों ने अपने संबोधन में कहा कि दशहरा का पर्व केवल रावण दहन तक सीमित नहीं है। यह हमें आंतरिक बुराइयों जैसे अहंकार, क्रोध, लोभ, ईर्ष्या और असत्य को भी समाप्त करने की प्रेरणा देता है।
मुख्य संदेश:
- समाज में एकता और सद्भाव बनाए रखना।
- नशा, हिंसा और भ्रष्टाचार जैसी बुराइयों का अंत करना।
- शिक्षा और संस्कार के माध्यम से नई पीढ़ी को सही राह पर लाना।
🔹 बच्चों और युवाओं की उमंग
बच्चों और युवाओं के लिए यह पर्व एक उत्सव से अधिक सीख देने वाला दिन रहा। छोटे बच्चों ने राम-सीता और हनुमान की पोशाकें पहनकर कार्यक्रम में भाग लिया। युवाओं ने सोशल मीडिया पर कार्यक्रम के फोटो और वीडियो साझा किए, जिससे सिवनी का दशहरा चर्चा का विषय बन गया।
🔹 दशहरे का ऐतिहासिक महत्व
इतिहास बताता है कि त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर धर्म की स्थापना की थी। तभी से यह पर्व “विजयादशमी” कहलाया।
- इसे शक्ति की देवी मां दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध की स्मृति में भी मनाया जाता है।
- यह दिन विजय और नई शुरुआत का प्रतीक है।
🔹 स्थानीय लोगों की भागीदारी
सिवनी में दशहरा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि एक सामाजिक उत्सव है। स्थानीय व्यापारी संघ, शिक्षण संस्थान और सांस्कृतिक समितियों ने कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी की।
- दुकानों और घरों में दीपक जलाए गए।
- बाजारों में भीड़ और रौनक देखने को मिली।
- मिठाइयों और पकवानों की खुशबू से पूरा शहर महका।
🔹 एकता का पर्व
दशहरा हर धर्म और वर्ग के लोगों को जोड़ता है। मिशन स्कूल मैदान में हुए आयोजन में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समाज के लोग भी शामिल हुए। यह सिवनी की गंगा-जमुनी तहज़ीब का उदाहरण रहा।
🔹 मीडिया और कवरेज
स्थानीय समाचार पत्रों और ऑनलाइन पोर्टलों ने इस आयोजन को प्रमुखता से कवर किया। सोशल मीडिया पर #SeoniDussehra2025 और #RavanDahan जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।
🏁 निष्कर्ष
सिवनी में दशहरा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक बनकर उभरा। मिशन स्कूल मैदान में हुआ रावण दहन हजारों श्रद्धालुओं के लिए यादगार अनुभव रहा।
इस अवसर ने यह संदेश दिया कि समाज को आंतरिक और बाहरी दोनों तरह की बुराइयों का अंत कर अच्छाई, सद्भाव और न्याय की राह पर चलना चाहिए।
सिवनी में रावण दहन केवल पुतले को जलाना नहीं,बल्कि बुराई का अंत कर सत्य,धर्म और प्रेम की राह अपनाने का सामूहिक संकल्प था।

समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया में फोटोज, वीडियोज, ग्राफिक्स आदि को सफलता पूर्वक हेंडल करने वाले अशोक सोनी, नगर ब्यूरो में कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 20 वर्षों से ज्यादा समय से सक्रिय अशोक सोनी वर्तमान में समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो के रूप में कार्यरत हैं .
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