📍 (ब्यूरो कार्यालय)
सिवनी (साई)।सिवनी शहर में शराब दुकानों का हाल अब किसी “खुले आहते” से कम नहीं रह गया है।
शहर के प्रमुख बाजारों, बस स्टैंडों और रिहायशी इलाकों के पास बनी शराब दुकानों के बाहर रोजाना शराबियों की भीड़ जमा रहती है।
स्थिति यह है कि कई जगहों पर आबकारी विभाग के अधिकारी मौजूद होने के बावजूद खुलेआम शराब पीने की घटनाएं सामने आती हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती है।
🚨 घटना जिसने उजागर की सच्चाई
सोमवार शाम की बात है — सिवनी के मलपुरा रोड स्थित सरकारी देशी शराब दुकान पर शराबियों का जमावड़ा लगा हुआ था।
लोग दुकान के सामने ही जमीन पर बैठकर गिलास में शराब पी रहे थे, और वहीं झूमते हुए आपस में हंसी-मज़ाक कर रहे थे।
इसी बीच आबकारी विभाग के अधिकारी निरीक्षण के लिए पहुंचे, लेकिन उन्हें देखकर भी लोगों के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया।
दृश्य यह था कि अधिकारी कुछ देर तक खड़े होकर सब कुछ देखते रहे और फिर चुपचाप अपनी गाड़ी में बैठकर लौट गए।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि “अधिकारियों के सामने भी अगर कानून का पालन नहीं होता, तो आम जनता से क्या उम्मीद की जा सकती है?”
📢 नागरिक बोले – “अब शहर बन गया है अघोषित खुला आहता”
स्थानीय व्यापारी संघ के सदस्य संदीप जैन ने कहा –
“शराब दुकान के बाहर रोजाना लोगों का जमावड़ा रहता है। कई बार शराबी राह चलते लोगों से अभद्रता करते हैं। शिकायत करने पर पुलिस और आबकारी विभाग दोनों एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते हैं।”
महिला संगठन की अध्यक्ष नीलिमा तिवारी ने नाराज़गी जताते हुए कहा –
“शहर के बीचों-बीच बने इन शराब ठेकों ने माहौल खराब कर दिया है। स्कूल-कॉलेज के पास भी शराबी खुलेआम बोतल खोलते हैं। महिलाएं और बच्चे असुरक्षित महसूस करते हैं।”
🧍♂️ अफसरों का तर्क — “कर्मचारियों की कमी है”
जब आबकारी विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा —
“हमारे पास पर्याप्त स्टाफ नहीं है। एक ही टीम को कई इलाकों का निरीक्षण करना पड़ता है। हम कोशिश कर रहे हैं कि जल्द ही स्थिति पर नियंत्रण लाया जाए।”
हालांकि विभागीय सूत्रों के मुताबिक, कई बार स्थानीय स्तर पर शिकायतें दर्ज होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की जाती।
ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि “कर्मचारियों की कमी” का तर्क अब जवाबदेही से बचने का बहाना बन चुका है।
🧱 शराब दुकानों के बाहर “स्थायी ग्राहक मंडली”
सिवनी के कई प्रमुख इलाकों —
- पालीटेक्निक मैदान
- बबरिया रोड,
- ज्यारत नाका,
- डालडा फेक्ट्री रोड,
- लूघरवाड़ा,
- नागपुर रोड,
- डूंडा सिवनी,
- कटंगी नाका,
- छिंदवाड़ा रोड,
- गंज वार्ड
में बनी शराब दुकानों के बाहर रोजाना दर्जनों लोग बैठकर पीते हैं।
कुछ जगहों पर तो लकड़ी की बेंचें, खाली पेटियाँ और गिलास रखने की टेबलें तक स्थायी रूप से रखी हुई हैं, जिससे साफ पता चलता है कि दुकानदारों की मौन सहमति इन सब में शामिल है।
🏛️ प्रशासनिक चुप्पी — एक बड़ा सवाल
कानून के मुताबिक, किसी भी सरकारी शराब दुकान के 50मीटर के दायरे में शराब का सेवन करना अपराध है, लेकिन सिवनी में यह नियम केवल कागज़ों तक सीमित रह गया है।
नगर पालिका और पुलिस प्रशासन दोनों को इस स्थिति की जानकारी है, फिर भी किसी स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि आबकारी विभाग और पुलिस की मिलीभगत से ही यह व्यवस्था चल रही है।
रोजाना लाखों रुपए की बिक्री होती है, लेकिन नियमों का पालन शून्य है।
⚖️ कानून क्या कहता है?
मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 36 के अनुसार –
“शराब की दुकान के आस-पास सार्वजनिक स्थान पर मद्यपान करना दंडनीय अपराध है।”
इसके बावजूद न तो जुर्माने की कार्रवाई होती है, न ही कोई गिरफ्तारी।
अक्सर देखने को मिलता है कि आबकारी अधिकारी सिर्फ निरीक्षण दर्ज कर लौट जाते हैं, जबकि मौके पर खुलेआम शराब पीना जारी रहता है।
👮♂️ पुलिस की भूमिका भी संदिग्ध
स्थानीय थाना क्षेत्रों में पुलिस गश्त तो होती है, लेकिन शराब दुकानों के आसपास की अनियमितता को लेकर कभी कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती।
एक पुलिसकर्मी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया –
“हमारे पास सीमित बल है। शराब दुकानों की निगरानी आबकारी विभाग का कार्यक्षेत्र है।”
इस तरह दोनों विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर मामला ठंडे बस्ते में डाल देते हैं।
🏘️ आम जनता का दर्द
आबादी वाले इलाकों में स्थित शराब दुकानों ने लोगों का जीवन दूभर कर दिया है।
कई लोग अपने घर बदलने पर मजबूर हो चुके हैं क्योंकि शराबियों की हरकतें असहनीय हो चुकी हैं।
रात में झगड़े, गाली-गलौज और कभी-कभी हिंसा जैसी घटनाएँ आम हो गई हैं।
“हमारे घर के सामने रोजाना शराबी झगड़ते हैं। बच्चे डर जाते हैं। शिकायत करने पर कोई सुनवाई नहीं होती।”
— गोपालगंज निवासी आरती मिश्रा
📊 सामाजिक प्रभाव — बिगड़ता माहौल
खुलेआम शराब सेवन ने समाज के नैतिक मूल्यों को चोट पहुँचाई है।
स्कूल-कॉलेज के युवा भी इन जगहों पर आने लगे हैं, जिससे नशे की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है।
सामाजिक कार्यकर्ता चेतावनी दे रहे हैं कि अगर जल्द सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले वर्षों में सिवनी “मिनी शराब नगरी” बन सकता है।
🧩 विशेषज्ञों की राय
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि आसान उपलब्धता और सामाजिक स्वीकृति किसी भी शहर में शराब सेवन की प्रवृत्ति को तेज करती है।
“जब प्रशासन खुद मौन रहता है, तो समाज भी इसे सामान्य मानने लगता है। यही सबसे खतरनाक स्थिति है।”
— डॉ. प्रितम गेडाम,मनोविज्ञान विशेषज्ञ
📣 जनता की मांग — “आबकारी अमले का पुनर्गठन”
शहरवासियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि
- शराब दुकानों के आस-पास CCTV कैमरे लगाए जाएं,
- खुला आहता चलाने वालों पर सख्त जुर्माना हो,
- आबकारी टीम की साप्ताहिक निगरानी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए,
- और शराब दुकानों को रिहायशी क्षेत्रों से बाहर स्थानांतरित किया जाए।
लोगों का कहना है कि जब तक सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक सिवनी की शराब व्यवस्था बेकाबू ही रहेगी।
🗣️ सोशल मीडिया पर आक्रोश
शहर की इस स्थिति पर सोशल मीडिया पर भी नाराज़गी चरम पर है।
लोग #Seoni_Excise_Failure और #Open_Ahata_Seoni जैसे हैशटैग्स से अपनी बात रख रहे हैं।
कई नागरिक वीडियो और तस्वीरें पोस्ट कर रहे हैं, जिनमें शराबियों को खुलेआम शराब पीते देखा जा सकता है।
यह सब दिखाता है कि जनता अब जागरूक है — लेकिन प्रशासन अब भी सोया हुआ है।
🔍 संभावित समाधान
- फ्लाइंग स्क्वॉड टीम का गठन: आबकारी और पुलिस संयुक्त गश्त करें।
- CCTVऔर लोकल मॉनिटरिंग: दुकानों के बाहर निगरानी अनिवार्य की जाए।
- दुकानदारों की जवाबदेही: जो दुकानदार नियम तोड़ने दें, उनका लाइसेंस रद्द हो।
- नागरिक सहभागिता: शिकायतों के लिए हेल्पलाइन सक्रिय की जाए।
- सामाजिक जागरूकता: शराब से होने वाले नुकसान पर जनजागरूकता अभियान चलाया जाए।
🔚 निष्कर्ष (Conclusion):
सिवनी शहर की शराब दुकानों का हाल “खुले आहते” जैसा बन चुका है।
आबकारी विभाग की निष्क्रियता और कर्मचारियों की कमी का बहाना अब जनता को गुमराह नहीं कर सकता।
यदि प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो यह समस्या आने वाले वर्षों में सामाजिक संकट का रूप ले सकती है।
अब वक्त है कि आबकारी विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाए,
पुलिस सक्रियता दिखाए, और
जनता अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाए —
ताकि सिवनी फिर से सुरक्षित, अनुशासित और सभ्य शहर के रूप में पहचाना जाए।

43 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. दिल्ली, मुंबई, नागपुर, सिवनी, भोपाल, रायपुर, इंदौर, जबलपुर, रीवा आदि विभिन्न शहरों में विभिन्न मीडिया संस्थानों में लम्बे समय तक काम करने का अनुभव, वर्तमान में 2008 से लगातार “समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया” के ‘संस्थापक संपादक’ हैं. 2002 से लगातार ही अधिमान्य पत्रकार (Accredited Journalist) हैं एवं नई दिल्ली में लगभग एक दशक से अधिक समय तक पत्रकारिता के दौरान भी अधिमान्य पत्रकार रहे हैं.
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