(बुद्धदेव शर्मा)
भोपाल (साई)। विश्व दिव्यांग दिवस के अवसर पर राजधानी भोपाल में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा एक गरिमापूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संचालनालय सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रमुख सचिव श्रीमती सोनाली वायंगणकर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उनके साथ आयुक्त नि:शक्तजन डॉ. अजय खेमरिया भी मौजूद थे।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव ने दिव्यांगजनों के अधिकार, सम्मान और समान अवसरों को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि—
“दिव्यांगजन किसी दया या सहानुभूति के पात्र नहीं,बल्कि वे भी समाज में समान अधिकार,गरिमा और अवसर के अधिकारी हैं। हमारा दायित्व है कि हम उन्हें संवेदनशीलता के साथ,समान साझेदार के रूप में उचित स्थान दें।”
‘दया नहीं,समान अवसर‘ —दिव्यांगजन सशक्तिकरण का नया दृष्टिकोण
वायंगणकर ने अपने संबोधन में स्पष्ट कहा कि आज समाज में दृष्टिकोण बदलने की जरूरत है। दिव्यांगता को बाधा नहीं, बल्कि विविधता के रूप में देखने की संस्कृति विकसित करनी होगी। सरकार का लक्ष्य है कि दिव्यांगजन—
- गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
- कौशल प्रशिक्षण
- रोजगार के अवसर
- सुगम्य परिवेश
- और सामाजिक सम्मान
इन सबका समान रूप से लाभ प्राप्त कर सकें।
उनका यह संदेश कार्यक्रम का केंद्रीय विचार बन गया कि “Empathy is good, but Equality is essential.”
रोजगार सृजन के लिए बड़ा कदम— Atypical Advantageके साथMOU
कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण घोषणा रही Atypical Advantage संस्था के साथ हुआ रोजगार पुनर्वास संबंधी समझौता (MOU)।
यह संस्था दिव्यांगजनों को उनके कौशल के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराने में देशभर में सक्रिय रूप से कार्य करती है।
इस साझेदारी से—
- निजी क्षेत्र में दिव्यांगजनों के लिए नौकरी के अवसर बढ़ेंगे
- स्किल-मैपिंग और प्रतिभा मूल्यांकन अधिक सुगठित होगा
- दिव्यांग-अनुकूल कार्यस्थलों का विस्तार होगा
- कंपनियों में समावेशन (Inclusion) की संस्कृति बढ़ेगी
माना जा रहा है कि यह MOU प्रदेश में दिव्यांगजन सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल साबित होगा।
शिक्षित,कुशल और आत्मनिर्भर दिव्यांगजन—सरकार की स्पष्ट प्राथमिकता
प्रमुख सचिव ने कहा कि विभाग दिव्यांगजनों को केवल अनुदान देने की मानसिकता से आगे बढ़ चुका है। अब लक्ष्य है कि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें। इसके लिए सरकार निम्न प्रयासों को मजबूत कर रही है—
- गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
- विशेष शिक्षक उपलब्ध कराना
- दिव्यांगजन-अनुकूल शिक्षण सामग्री
- डिजिटल शिक्षा सुविधाएँ
- कौशल प्रशिक्षण (Skill Development)
- विभिन्न trades में व्यावहारिक प्रशिक्षण
- IT और डिजिटल कौशल
- उद्यमिता (Entrepreneurship) का समर्थन
- रोजगार सृजन
- सरकारी नौकरियों में आरक्षण
- निजी क्षेत्र से साझेदारी
- दिव्यांग-अनुकूल कार्यस्थलों के मानक
- आत्मनिर्भरता की दिशा में सहयोग
- लोन और अनुदान योजनाएँ
- स्टार्टअप प्रोत्साहन
- मार्केट-लिंक्ड उत्पाद प्रशिक्षण
इन प्रयासों से दिव्यांगजन अब केवल सहायता प्राप्त करने वाले नागरिक नहीं, बल्कि योग्य,कुशल और जिम्मेदार योगदानकर्ता बनकर उभर रहे हैं।
कार्यक्रम में हुई उपलब्धियों की समीक्षा—सुगम्य सेवाओं का विस्तार
कार्यक्रम में विभाग ने पिछले वर्षों में की गई प्रमुख उपलब्धियां भी प्रदर्शित कीं। इनमें विशेष रूप से—
- नागरिकों के लिए डिजिटल सेवाओं का व्यापक विस्तार
- सरकारी भवनों और कार्यालयों को दिव्यांग-अनुकूल बनाने के प्रयास
- प्रक्रियाओं को पारदर्शी और सुगम बनाने का काम
- रोजगार परक प्रशिक्षण कार्यक्रम
- योजनाओं में DBT आधारित भुगतान
इन उपलब्धियों से यह स्पष्ट है कि विभाग केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर बदलाव ला रहा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का गौरव—तैराकों को सम्मान
कार्यक्रम में एक गर्व से भरा क्षण वह था जब इंग्लिश चैनल में स्विमिंग कर देश का नाम रोशन करने वाले दो दिव्यांग तैराक—
- श्री सतेन्द्र लोहिया
- श्री रामवरण
को 5-5 लाख रुपये के प्रोत्साहन राशि के चेक प्रदान किए गए।
इन खिलाड़ियों की उपलब्धियाँ
- दोनों राष्ट्रीय स्तर के तैराक
- अंतरराष्ट्रीय तैराकी प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व
- इंग्लिश चैनल जैसे कठिन जलमार्ग को सफलतापूर्वक पार किया
उनकी सफलता साबित करती है कि कठिनाइयाँ चाहे कितनी भी हों, प्रतिभा और संकल्प किसी सीमा को नहीं मानते।
सुगम्य कार्यस्थलों पर विशेष जोर— Accessible Indiaका विस्तार
प्रमुख सचिव ने कहा कि अब विभाग कार्यस्थलों और सार्वजनिक स्थानों को पूर्णतः सुगम्य (Accessible) बनाने की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है।
इसमें शामिल हैं—
- रैंप, लिफ्ट, रेलिंग
- Braille संकेतक
- व्हीलचेयर सुविधा वाला प्रवेश
- दिव्यांग-अनुकूल शौचालय
- शिकायत निवारण तंत्र
सरकार का उद्देश्य है कि “Accessibility shouldn’t be a privilege, it must be a Right.”
डिजिटल सेवाएँ—दिव्यांगजन तक पहुँच बढ़ाने का आधुनिक साधन
डिजिटलीकरण से दिव्यांगजनों को योजनाओं का लाभ अधिक आसानी से मिल रहा है।
सरकार ने—
- ऑनलाइन प्रमाणपत्र
- डिजिटल आवेदन
- ऑनलाइन रोजगार पोर्टल
- AI आधारित हेल्पलाइन
जैसी सुविधाओं को विस्तार दिया है।
तकनीक के माध्यम से सेवाएँ अधिक सुलभ,पारदर्शी और तेज बन रही हैं।
समाज में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता
वायंगणकर ने यह भी कहा कि कानून और योजनाएँ पर्याप्त नहीं, जब तक समाज में मानसिकता का परिवर्तन न हो।
समाज को समझना होगा कि दिव्यांगजन—
- सक्षम हैं
- प्रतिभाशाली हैं
- और अवसर मिलने पर असंभव को भी संभव कर दिखा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि स्कूलों, सरकारी संस्थानों, निजी कंपनियों और सामुदायिक समूहों को इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
निष्कर्ष (Conclusion)
विश्व दिव्यांग दिवस 2025 का यह कार्यक्रम संदेश देता है कि मध्यप्रदेश दिव्यांगजन सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक नई दिशा की ओर तेजी से अग्रसर है।
प्रमुख सचिव श्रीमती सोनाली वायंगणकर द्वारा दिए गए ‘दया नहीं, समान अवसर’ के संदेश ने कार्यक्रम की मूल भावना को उजागर किया।
सरकार द्वारा रोजगार, कौशल प्रशिक्षण, सुगम्य वातावरण और डिजिटल सेवाओं को लेकर उठाए जा रहे कदम दिव्यांगजनों को समान,सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन की ओर आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
दिव्यांग तैराकों को सम्मानित करना इस बात का प्रमाण है कि अवसर और समर्थन मिलने पर दिव्यांगजन किसी भी क्षेत्र में नयी ऊंचाइयों को छू सकते हैं।

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