(नन्द किशोर)
भोपाल (साई)। मध्यप्रदेश में नगरीय निकायों के संचालन को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने सामग्री क्रय में अनियमितता के गंभीर प्रकरण में दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कदम उठाए हैं। यह कार्रवाई न केवल सिवनी नगर पालिका परिषद तक सीमित है, बल्कि यह एक स्पष्ट संदेश भी देती है कि शासकीय तंत्र में वित्तीय अनुशासन से समझौता अब स्वीकार्य नहीं होगा।
यह प्रकरण उस समय प्रकाश में आया, जब नगर पालिका परिषद सिवनी में सामग्री क्रय प्रक्रिया को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत के बाद गठित जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त निर्णय लिए गए हैं।
नगर पालिकाओं और नगर निगमों में सामग्री क्रय की प्रक्रिया सीधे तौर पर सार्वजनिक धन से जुड़ी होती है। सड़क, नाली, प्रकाश व्यवस्था, सफाई उपकरण, भवन निर्माण सामग्री जैसे कार्यों में होने वाला हर खर्च जनता के टैक्स से आता है। ऐसे में यदि इस प्रक्रिया में अनियमितता होती है, तो उसका सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ता है।
सिवनी नगर पालिका परिषद में भी इसी तरह की शिकायत सामने आई थी। शिकायतकर्ता श्री संतोष कुमार साहू ने सामग्री क्रय में नियमों की अनदेखी, प्रक्रियाओं के उल्लंघन और संदिग्ध निर्णयों का आरोप लगाया था। शिकायत को गंभीर मानते हुए नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए।
जांच समिति का गठन और कार्यप्रणाली
प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए अधीक्षण यंत्री, संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया। समिति का दायित्व था कि वह—
- सामग्री क्रय से जुड़े दस्तावेजों की जांच करे
- संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका का मूल्यांकन करे
- नियमों और प्रक्रियाओं के उल्लंघन की पहचान करे
- जिम्मेदारी तय कर रिपोर्ट प्रस्तुत करे
जांच प्रक्रिया के दौरान समिति ने उपलब्ध अभिलेखों, फाइलों, स्वीकृतियों और भुगतान से संबंधित दस्तावेजों का गहन अध्ययन किया।
जांच रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
जांच समिति की रिपोर्ट में सिवनी नगर पालिका परिषद के कई अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। रिपोर्ट के अनुसार—
- प्रभारी सहायक यंत्री संतोष कुमार तिवारी
- उप यंत्री विकास मेहरा
- वंदना मरकाम
- बिंदेश्वरी पंद्रे
- दीपक उइके
- तत्कालीन नगर पालिका अधिकारी पूजा बुनकर
- तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी राम कुमार कुर्वेती
इन सभी ने अपने-अपने स्तर पर सामग्री क्रय प्रक्रिया में लापरवाही या नियमों के उल्लंघन में भूमिका निभाई।
समिति ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह अनियमितताएं मात्र प्रशासनिक त्रुटि नहीं, बल्कि वित्तीय अनुशासन की गंभीर अनदेखी का परिणाम थीं।
वर्तमान स्थिति / Latest Developments
जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्त श्री संकेत भोंडवे ने त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ निम्नलिखित अनुशासनात्मक कदम उठाए गए—
की गई प्रमुख कार्रवाइयाँ
- प्रभारी सहायक यंत्री संतोष कुमार तिवारी
- जुलाई 2023, जुलाई 2024 और जुलाई 2025 की स्वीकृत वार्षिक वेतन वृद्धि निरस्त
- उप यंत्री विकास मेहरा,वंदना मरकाम,बिंदेश्वरी पंद्रे और दीपक उइके
- आगामी एक वेतन वृद्धि संचयी प्रभाव से रोकी गई
- मुख्य नगर पालिका अधिकारी पूजा बुनकर
- दो वेतन वृद्धि संचयी प्रभाव से रोकी गई
- तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी राम कुमार कुर्वेती
- निधन हो जाने के कारण उनके विरुद्ध लंबित अनुशासनात्मक कार्रवाई समाप्त
यह निर्णय विभागीय स्तर पर एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
प्रशासनिक दृष्टिकोण और सख्त संदेश
आयुक्त श्री संकेत भोंडवे ने इस अवसर पर स्पष्ट शब्दों में कहा कि विभाग आर्थिक अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को अत्यंत गंभीरता से ले रहा है। उन्होंने कहा—
- सार्वजनिक धन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है
- किसी भी स्तर पर अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी
- दोष सिद्ध होने पर कठोर कार्रवाई अनिवार्य है
- पारदर्शिता और जवाबदेही को हर हाल में सुनिश्चित किया जाएगा
यह बयान संकेत देता है कि आने वाले समय में ऐसे मामलों पर और भी सख्त निगरानी रखी जाएगी।
प्रशासनिक और सामाजिक प्रभाव
इस कार्रवाई का प्रभाव केवल संबंधित अधिकारियों तक सीमित नहीं है। इसके व्यापक प्रशासनिक और सामाजिक निहितार्थ हैं—
प्रशासनिक प्रभाव
- अन्य नगरीय निकायों के अधिकारियों में सतर्कता
- सामग्री क्रय प्रक्रियाओं में दस्तावेजी पारदर्शिता पर जोर
- आंतरिक ऑडिट और निरीक्षण की संभावना बढ़ना
सामाजिक प्रभाव
- आम जनता में विश्वास बहाल होना
- यह संदेश कि शिकायत करने पर कार्रवाई संभव है
- करदाताओं के धन की सुरक्षा को लेकर सकारात्मक संकेत
आंकड़े, तथ्य और विश्लेषण
यदि नगरीय निकायों में सामग्री क्रय प्रक्रिया को देखा जाए, तो यह सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में से एक मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार—
- अधिकांश वित्तीय अनियमितताएं खरीद प्रक्रियाओं से जुड़ी होती हैं
- कमजोर निगरानी तंत्र भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है
- समय पर जांच और दंडात्मक कार्रवाई से अनियमितताओं में कमी लाई जा सकती है
सिवनी नगर पालिका का यह मामला इसी बात का उदाहरण है कि यदि शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई हो, तो व्यवस्था में सुधार संभव है।
आम जनता पर असर
आम नागरिकों के लिए यह कार्रवाई कई मायनों में महत्वपूर्ण है—
- विकास कार्यों में गुणवत्ता सुधार की उम्मीद
- अनावश्यक खर्च और लीकेज पर नियंत्रण
- नगर पालिका पर भरोसे में वृद्धि
जब अधिकारी जवाबदेह होते हैं, तो उसका लाभ सीधे नागरिकों को मिलता है।
भविष्य की संभावनाएं / आगे क्या?
इस कार्रवाई के बाद यह संभावना जताई जा रही है कि—
- अन्य नगरीय निकायों में भी पुराने मामलों की समीक्षा हो सकती है
- सामग्री क्रय प्रक्रिया में नई गाइडलाइंस लागू की जा सकती हैं
- ई-प्रोक्योरमेंट और डिजिटल ट्रैकिंग को बढ़ावा मिल सकता है
- शिकायत निवारण तंत्र को और मजबूत किया जा सकता है
यदि ऐसा होता है, तो नगरीय प्रशासन की कार्यप्रणाली में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।
🧩 8️⃣ Conclusion / निष्कर्ष
नगरीय निकायों में सामग्री क्रय अनियमितता के प्रकरण में की गई यह कार्रवाई केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि व्यवस्था सुधार की दिशा में एक ठोस कदम है। सिवनी नगर पालिका के मामले में दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई यह स्पष्ट करती है कि सरकार और विभाग भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति पर चल रहे हैं। पारदर्शिता, जवाबदेही और सार्वजनिक धन की सुरक्षा—यही इस पूरे घटनाक्रम का केंद्रीय संदेश है। यदि इसी दृढ़ता से कार्रवाई आगे भी जारी रही, तो नगरीय प्रशासन में विश्वास और कार्यक्षमता दोनों में वृद्धि निश्चित है।

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