(नंद किशोर)
भोपाल (साई)। मध्यप्रदेश की कानून व्यवस्था को सख्त बनाए रखने के संकल्प के तहत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिवनी जिले में हुए चर्चित लूट प्रकरण पर निर्णायक कदम उठाया है।
राज्य सरकार ने इस मामले में 11पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है, जिनमें से 5को गिरफ्तार भी किया गया है।
इस कार्रवाई से सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि —
“कानून का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वे कितने भी ऊंचे पद पर हों।”
🔹 घटना का विवरण–कैसे उजागर हुआ सिवनी लूट मामला
सिवनी जिले में कुछ दिन पहले एक बड़ी लूट की घटना सामने आई थी, जिसमें स्थानीय पुलिसकर्मियों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही थी।
जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि कुछ पुलिस अधिकारी और कर्मचारी अपने अधिकार क्षेत्र से परे जाकर संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त थे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च अधिकारियों ने रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वयं इस रिपोर्ट का संज्ञान लिया और तत्काल सख्त कार्रवाई के आदेश जारी किए।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि “कानून और पुलिस अनुशासन” दोनों का उल्लंघन करने वालों के लिए प्रदेश में कोई स्थान नहीं है।
🔹 11पुलिसकर्मियों पर एफआईआर, 5गिरफ्तार
राज्य सरकार के आदेश पर सिवनी जिले में 11पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
इनमें सिवनी एसडीओपी पूजा पांडे, एसआई अर्पित भैरम, कॉन्सटेबल योगेंद्र,नीरज और जगदीश के नाम प्रमुख रूप से शामिल हैं — जिन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।
शेष जिनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है, वे हैं —
- प्रधान आरक्षक माखन
- प्रधान आरक्षक राजेश जंघेला
- प्रधान आरक्षक रविंद्र उईके
- आरक्षक रितेश वर्मा
- एसएएफ आरक्षक केदार
- एसएएफ आरक्षक सुभाष सदाफल
इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है —
- धारा310(2) – डकैती
- धारा126(2) – गलत तरीके से रोकना
- धारा140(3) – अपहरण
- धारा61(2) – आपराधिक षड्यंत्र
🔹 मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश– “कानून सबके लिए बराबर”
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा —
“प्रदेश में कानून व्यवस्था बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पुलिस का कर्तव्य जनता की सुरक्षा करना है, न कि उनका विश्वास तोड़ना। जो अपने पद का दुरुपयोग करेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार सुशासन और पारदर्शिता की दिशा में प्रतिबद्ध है, और किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या शक्ति के दुरुपयोग को सहन नहीं करेगी।
मुख्यमंत्री ने सभी जिला पुलिस अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि भविष्य में इस तरह की कोई घटना दोहराई गई, तो “कड़ी अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई” की जाएगी।
🔹 जांच की दिशा और विभागीय कदम
इस पूरे प्रकरण की जांच विशेष जांच दल (SIT) को सौंपी गई है।
गृह विभाग ने सिवनी जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 7 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
साथ ही, सभी आरोपी पुलिसकर्मियों को सेवा से निलंबित किया गया है।
प्रदेश के गृह मंत्री ने भी स्पष्ट किया कि सरकार पुलिस विभाग में ‘AccountabilityऔरTransparency’ की नीति पर कार्य कर रही है।
भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए नई आंतरिक निगरानी प्रणाली लागू की जाएगी, जिसमें प्रत्येक थाना स्तर पर जवाबदेही तय होगी।
🔹 जनता की प्रतिक्रिया– “सरकार का सही कदम”
सिवनी जिले के नागरिकों ने मुख्यमंत्री के निर्णय की सराहना की है।
स्थानीय नागरिक संगठन और व्यापारी संघों ने कहा कि सरकार द्वारा पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई करने से यह संदेश गया है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।
सोशल मीडिया पर भी यह खबर तेजी से वायरल हुई, जहां लोगों ने कहा —
“ऐसा सख्त कदम जनता का भरोसा बढ़ाता है और कानून की गरिमा कायम रखता है।”
🔹 विपक्ष की प्रतिक्रिया– “पारदर्शी जांच जरूरी”
हालांकि विपक्षी दलों ने इस कार्रवाई का समर्थन करते हुए मांग की है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए।
पूर्व गृह मंत्री ने बयान दिया कि —
“यह घटना पुलिस प्रणाली में सुधार की आवश्यकता को दर्शाती है। सरकार को सिर्फ दोषियों पर नहीं, बल्कि ऐसे हालात पैदा होने के कारणों पर भी ध्यान देना चाहिए।”
राजनीतिक हलकों में यह मुद्दा फिलहाल गरम है, लेकिन अधिकांश दलों ने माना है कि मुख्यमंत्री द्वारा उठाया गया कदम ‘Zero Tolerance Policy’ की दिशा में महत्वपूर्ण है।
🔹 कानूनी पहलू–किन धाराओं में मामला दर्ज हुआ
सिवनी प्रकरण में जिन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है, वे गंभीर अपराधों की श्रेणी में आती हैं —
- डकैती (Section 310(2)) – संगठित तरीके से संपत्ति छीनना
- गलत तरीके से रोकना (Section 126(2)) – अवैध हिरासत
- अपहरण (Section 140(3)) – व्यक्ति को जबरन ले जाना
- आपराधिक षड्यंत्र (Section 61(2)) – अपराध की योजना बनाना
कानून विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो आरोपियों को 10वर्ष से अधिक की सजा तक हो सकती है।
🔹 राज्य सरकार की नीति– Zero Tolerance on Corruption
मध्यप्रदेश सरकार पिछले एक वर्ष से ‘Zero Tolerance on Corruption’ नीति पर काम कर रही है।
इस नीति के तहत कई प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों पर पहले भी कार्रवाई की जा चुकी है।
सिवनी मामला भी इसी नीति के अंतर्गत एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है —
“सिस्टम में जवाबदेही लाना, और जनता का विश्वास कायम रखना।”
🔹 पुलिस विभाग में मंथन की जरूरत
इस प्रकरण के बाद राज्य के पुलिस विभाग में भी आत्ममंथन की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी जिलों के थाना प्रभारियों से रिपोर्ट मांगी है कि थानों में क्या सुधार आवश्यक हैं।
इसके साथ ही, प्रशिक्षण सत्रों में “Police Ethics”और“Behavioral Conduct” को अनिवार्य किया जा रहा है ताकि पुलिसकर्मी जनता के प्रति संवेदनशील बने रहें।
🔚 निष्कर्ष (Conclusion)
सिवनी लूट मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सख्त कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि कानून सबके लिए समान है।
11 पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों पर एफआईआर और 5 की गिरफ्तारी ने राज्य में पुलिस जवाबदेही की नई परिभाषा लिखी है।
राज्य सरकार का यह कदम न केवल कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करेगा बल्कि जनता का भरोसा भी बढ़ाएगा।
सिवनी प्रकरण यह याद दिलाता है कि —
“राज्य में अब शासन नहीं, सुशासन चलेगा — जहां कानून के आगे कोई भी विशेष नहीं।”

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