(बुद्धसेन शर्मा)
भोपाल (साई)।सिवनी जिले के लिए मंगलवार का दिन सहकारिता क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि लेकर आया। भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में जिले की दो प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों को राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम द्वारा ‘सर्वश्रेष्ठ प्राथमिक सहकारी संस्था’ श्रेणी में सम्मानित किया गया। यह सम्मान केवल एक उपलब्धि नहीं बल्कि सिवनी जिले की प्रशासनिक दक्षता, संस्थागत पारदर्शिता और ग्रामीण सेवा भावना का प्रतीक बनकर उभरा है।
सहकारी आंदोलन भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। किसानों को सस्ती ऋण सुविधा, बीज, खाद और विपणन सहायता प्रदान करने में सहकारी समितियों की भूमिका निर्णायक रही है। मध्यप्रदेश में बीपेक्स (बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति) मॉडल को विशेष महत्व दिया गया है ताकि ग्राम स्तर पर वित्तीय समावेशन को मजबूत किया जा सके।
वर्तमान स्थिति /Latest Developments
06 जनवरी 2026 को भोपाल स्थित समन्वय भवन में आयोजित कार्यक्रम में:
- बीपेक्स बांकी सर्वश्रेष्ठ प्राथमिक सहकारी संस्था (उत्कृष्टता पुरस्कार 2025): बीपेक्स बांकी को इस शीर्ष श्रेणी के पुरस्कार से नवाजा गया। संस्था की ओर से प्रबंधक संतकुमार राजपूत ने यह सम्मान प्राप्त किया।
- बीपेक्स खैरापलारी सर्वश्रेष्ठ प्राथमिक सहकारी संस्था (योग्यता पुरस्कार 2025): बीपेक्स खैरापलारी को योग्यता पुरस्कार प्रदान किया गया। यह पुरस्कार संस्था प्रबंधक गणेश सिंगौर ने ग्रहण किया।
पुरस्कार सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग द्वारा प्रदान किए गए। इस अवसर पर प्रमुख सचिव सहकारिता डी.पी. आहूजा, आयुक्त सहकारिता मनोज पुष्प, अपेक्स बैंक के एमडी मनोज कुमार गुप्ता तथा जिला सहकारी बैंक सिवनी के महाप्रबंधक के.के. सोनी उपस्थित रहे।
प्रशासनिक और सामाजिक प्रभाव
प्रशासनिक स्तर पर
- जिले की सहकारिता प्रणाली की विश्वसनीयता बढ़ी
- अन्य समितियों को गुणवत्ता सुधार की प्रेरणा
- शासन की निगरानी प्रणाली की पुष्टि
सामाजिक स्तर पर
- किसानों का विश्वास मजबूत हुआ
- ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय अनुशासन बढ़ा
- युवाओं को सहकारिता से जोड़ने का अवसर
आंकड़े,तथ्य और विश्लेषण
सिवनी जिले में:
- 120 से अधिक प्राथमिक सहकारी समितियां सक्रिय
- प्रतिवर्ष लगभग 500 करोड़ रुपये का सहकारी लेन-देन
- 60% किसान प्रत्यक्ष रूप से सहकारिता से जुड़े
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि इन संस्थाओं की सफलता पूरे जिले की आर्थिक स्थिरता को प्रभावित करती है।
आम जनता पर असर
- किसानों को समय पर ऋण
- फसल निवेश में सुविधा
- ब्याज दरों में पारदर्शिता
- सामाजिक विश्वास में वृद्धि
यह सम्मान ग्रामीण समाज में सकारात्मक मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी उत्पन्न करता है।
भविष्य की संभावनाएं / आगे क्या?
भविष्य में इन समितियों के माध्यम से:
- डिजिटल सहकारिता मॉडल लागू हो सकता है
- किसान उत्पादक संगठन मजबूत होंगे
- ग्रामीण स्टार्टअप्स को समर्थन मिलेगा
सिवनी सहकारिता नवाचार का केंद्र बन सकता है।
8️⃣ Conclusion /निष्कर्ष
सिवनी जिले की दो सहकारी समितियों को मिला राज्य स्तरीय सम्मान न केवल उनकी कार्यकुशलता का प्रमाण है बल्कि यह दर्शाता है कि यदि प्रशासनिक मार्गदर्शन, पारदर्शिता और समर्पण एक साथ कार्य करें तो ग्रामीण संस्थाएं भी राष्ट्रीय पहचान बना सकती हैं। यह उपलब्धि सहकारिता आंदोलन को नई दिशा देने वाला प्रेरणास्रोत है और आने वाले वर्षों में सिवनी को सहकारिता के आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित कर सकती है।

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