(बुद्धसेन शर्मा)
भोपाल (साई)।मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सेवानिवृत्त IPS अधिकारी हरिशंकर सोनी (85) और उनके परिवार ने आरोप लगाया है कि पड़ोसी और PHE विभाग से सेवानिवृत्त अधीक्षण यंत्री आर. बी. राय ने न केवल उन्हें जान से मारने की धमकी दी, बल्कि बहू मोहिनी सोनी को रेप की धमकी और शारीरिक रूप से प्रताड़ित भी किया।
इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब पुलिस ने FIR दर्ज करने से साफ इनकार कर दिया और इसे मात्र “सूचना आवेदन” के रूप में दर्ज किया। आरोप है कि इसमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और खासकर स्पेशल डीजी स्तर तक के दबाव की भूमिका रही।
✦ क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, पूर्व IPS अधिकारी हरिशंकर सोनी के घर में पुताई का काम चल रहा था। इसी दौरान उनके पड़ोसी आर. बी. राय ने इस पर आपत्ति जताई और कथित तौर पर सोनी परिवार को धमकाना शुरू कर दिया।
जब हरिशंकर सोनी ने सवाल किया कि वे दीवार की पुताई में क्यों बाधा डाल रहे हैं, तो राय ने गाली-गलौज करते हुए धमकी दी –
“अगर पुताई करवाई तो कहीं का नहीं छोड़ूंगा।”
इसके बाद मामला और बिगड़ गया।
✦ रेप और हत्या की धमकी
अगले दिन मजदूर काम करने पहुंचे तो राय अपने बेटे गीतेश राय के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। दोनों ने मिलकर सोनी परिवार से अभद्रता शुरू कर दी।
- मोहिनी सोनी (बहू) को गालियाँ दी गईं।
- रेप करने की धमकी खुलेआम दी गई।
- गीतेश राय ने पीड़िता का गला दबोचा।
- जांघ पर लात मारकर घायल किया।
- अपमानजनक शब्दों से पूरे परिवार को बेइज्जत किया।
इतना ही नहीं, धमकी दी गई कि –
“तुझे वैशाली नगर में नंगा घुमाऊंगा, तेरी बेटी और तेरा भी रेप करूंगा।”
✦ पुलिस की चुप्पी और विवाद
पीड़ित परिवार तुरंत कमला नगर थाने पहुँचा और FIR दर्ज करने की मांग की। लेकिन आरोप है कि SHO निरुपमा पांडे और अन्य पुलिस अधिकारियों ने मामला दर्ज करने से इंकार कर दिया।
- शिकायत को केवल “सूचना आवेदन” के रूप में दर्ज किया गया।
- FIR दर्ज न करने के पीछे दबाव की बात कही जा रही है।
- मौके पर मौजूद SI राजावत और अन्य पुलिसकर्मी तमाशबीन बने रहे।
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी मौजूद है, जो पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाता है।
✦ स्पेशल डीजी पर दबाव का आरोप
सोनी परिवार का आरोप है कि FIR दर्ज न करने में आरोपी के समधी और स्पेशल डीजी अनिल कुमार का दबाव रहा। यह आरोप अब राज्य की कानून व्यवस्था और पुलिस की निष्पक्षता पर सीधा सवाल है।
इससे यह भी संकेत मिलता है कि कानून के रखवाले ही अगर पक्षपात करेंगे, तो आम नागरिक और यहां तक कि पूर्व IPS अधिकारी भी न्याय से वंचित हो सकते हैं।
✦ सोशल और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
जैसे ही मामला मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हुआ, नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने आक्रोश जताया।
- लोगों ने कहा कि यह मामला कानून से ऊपर व्यक्ति विशेष के दबाव को उजागर करता है।
- पूर्व IPS अधिकारी के साथ ऐसा व्यवहार जनता के भरोसे को और कमजोर करता है।
- महिलाओं को खुलेआम धमकी और मारपीट, वह भी पुलिस की मौजूदगी में, गंभीर चिंता का विषय है।
विपक्षी दलों ने भी राज्य सरकार और पुलिस पर निशाना साधते हुए मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
✦ कानूनी विशेषज्ञों की राय
कानून विशेषज्ञों के अनुसार –
- इस मामले में IPCकी धारा354 (महिला की अस्मिता पर हमला), 506 (आपराधिक धमकी), 323 (मारपीट) और 376/511 (बलात्कार के प्रयास) के तहत मामला दर्ज होना चाहिए था।
- पुलिस द्वारा FIR न दर्ज करना CrPCकी धारा154 का उल्लंघन है।
- सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने कई बार कहा है कि संज्ञेय अपराध की सूचना मिलते ही FIR दर्ज करना पुलिस का कर्तव्य है।
✦ भोपाल पुलिस की छवि पर सवाल
भोपाल पुलिस लंबे समय से अपनी कार्यप्रणाली को लेकर विवादों में रही है। कई मामलों में FIR दर्ज करने से इंकार, देरी से जांच और राजनीतिक दबाव में काम करने के आरोप लगते रहे हैं।
यह मामला भी उसी कड़ी को और मजबूत करता है।
✦ पीड़ित परिवार की माँग
हरिशंकर सोनी और उनके परिवार ने साफ कहा है कि –
- मामले की निष्पक्ष जांच हो।
- आरोपियों पर तत्काल FIR दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए।
- पुलिस अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाए।
- उच्च स्तरीय समिति इस प्रकरण को देखे ताकि न्याय सुनिश्चित हो सके।
✦ मीडिया की भूमिका
इस मामले को मीडिया में प्रमुखता से जगह मिल रही है। कई चैनल और ऑनलाइन पोर्टल इसे “कानून और व्यवस्था की नाकामी” के रूप में दिखा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर हैशटैग चल रहे हैं –
- #JusticeForSoniFamily
- #BhopalPolice
- #IPSOfficerThreat
✦ व्यापक असर
यह मामला केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। यदि पूर्व IPS अधिकारी के परिवार को न्याय नहीं मिल पा रहा, तो आम नागरिक की स्थिति का अनुमान लगाया जा सकता है।
🟢निष्कर्ष
भोपाल में पूर्व IPS अधिकारी हरिशंकर सोनी और उनके परिवार को धमकी और FIR दर्ज न करने का यह मामला प्रदेश की कानून व्यवस्था और पुलिस की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
- पुलिस पर दबाव के आरोप न्याय व्यवस्था की नींव को कमजोर करते हैं।
- महिलाओं को खुलेआम धमकी और हिंसा का शिकार बनाना समाज के लिए कलंक है।
- पीड़ित परिवार को तत्काल न्याय दिलाने के लिए सरकार को सख्त कदम उठाने होंगे।
यह घटना स्पष्ट करती है कि जब तक कानून सबके लिए बराबर नहीं होगा और पुलिस निष्पक्षता से काम नहीं करेगी, तब तक नागरिकों का विश्वास डगमगाता रहेगा।

आशीष कौशल का नाम महाराष्ट्र के विदर्भ में जाना पहचाना है. पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 30 वर्षों से ज्यादा समय से सक्रिय आशीष कौशल वर्तमान में समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के नागपुर ब्यूरो के रूप में कार्यरत हैं .
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