विकसित भारत 2047 पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में बोले एसीएस अनुपम राजन
नई शिक्षा व्यवस्था और विकसित भारत की दिशा में पहल
(नन्द किशोर)
भोपाल (साई)।भारत में शिक्षा प्रणाली को अधिक समग्र, आधुनिक और बहु-विषयक बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत कई महत्वपूर्ण बदलाव किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में भोपाल के शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या स्नातकोत्तर (स्वशासी) महाविद्यालय में “विकसित भारत @ 2047: संस्कृति, ज्ञान तथा सततता पर अन्तर्विषयी दृष्टिकोण” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी और प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।
इस संगोष्ठी का शुभारंभ उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने किया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि नई शिक्षा व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल विषय विशेष तक सीमित नहीं रखना, बल्कि उन्हें बहु-विषयक ज्ञान प्रदान करना है, जिससे उनका सर्वांगीण विकास हो सके।
संगोष्ठी के अवसर पर महाविद्यालय द्वारा तैयार की गई स्मारिका और मोनोग्राफ का भी लोकार्पण किया गया।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का मूल उद्देश्य
अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 देश की शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार का आधार बन रही है। इस नीति के तहत विद्यार्थियों को पारंपरिक विषयों की सीमाओं से बाहर निकलकर विभिन्न विषयों का समन्वित अध्ययन करने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि नई शिक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों को विज्ञान, कला, सामाजिक विज्ञान, संस्कृति और पर्यावरण जैसे विषयों का समन्वित ज्ञान दिया जा रहा है। इससे छात्र-छात्राएं केवल अकादमिक रूप से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक दृष्टि से भी अधिक जागरूक बनेंगे।
राजन ने कहा कि केवल आर्थिक विकास किसी भी राष्ट्र की प्रगति का पूर्ण संकेतक नहीं होता। समाज के संतुलित विकास के लिए मानव मूल्यों, सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण संरक्षण को भी समान महत्व देना आवश्यक है।
बहु-विषयक शिक्षा से होगा समग्र विकास
नई शिक्षा व्यवस्था में बहु-विषयक शिक्षा प्रणाली को विशेष महत्व दिया गया है। इसका अर्थ है कि विद्यार्थी एक ही समय में विभिन्न विषयों का अध्ययन कर सकते हैं और अपने ज्ञान को व्यापक बना सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार बहु-विषयक शिक्षा के कई महत्वपूर्ण लाभ हैं:
- विद्यार्थियों में रचनात्मकता और नवाचार की क्षमता बढ़ती है
- विभिन्न क्षेत्रों के ज्ञान का समन्वय संभव होता है
- जटिल समस्याओं को समझने और समाधान खोजने की क्षमता विकसित होती है
- विद्यार्थियों का दृष्टिकोण व्यापक बनता है
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि आज के वैश्विक युग में ऐसी शिक्षा प्रणाली की आवश्यकता है जो विद्यार्थियों को बहुआयामी सोच और कौशल प्रदान कर सके।
विकसित भारत 2047 की अवधारणा
भारत सरकार ने वर्ष 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए शिक्षा क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि विकसित भारत का सपना केवल आर्थिक विकास से पूरा नहीं होगा। इसके लिए ज्ञान, संस्कृति, विज्ञान और सतत विकास के बीच संतुलन आवश्यक है।
इस संदर्भ में संगोष्ठी में निम्न विषयों पर चर्चा की जा रही है:
- भारतीय ज्ञान परंपरा
- सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण
- सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण
- शिक्षा और नवाचार का संबंध
इन विषयों पर विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से आए विशेषज्ञ अपने विचार प्रस्तुत कर रहे हैं।
शोध-पत्रों के माध्यम से अकादमिक विमर्श
दो दिवसीय संगोष्ठी के दौरान विभिन्न विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और शोध संस्थानों से आए प्राध्यापक, शोधार्थी और छात्र-छात्राएं अपने शोध-पत्र प्रस्तुत कर रहे हैं।
इन शोध-पत्रों में विकसित भारत 2047 की अवधारणा को ध्यान में रखते हुए विभिन्न विषयों पर गहन अध्ययन प्रस्तुत किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के अकादमिक विमर्श से शिक्षा और शोध के क्षेत्र में नए दृष्टिकोण विकसित होते हैं।
संगोष्ठी में प्रस्तुत किए जाने वाले शोध-पत्रों में प्रमुख रूप से निम्न विषय शामिल हैं:
- भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा
- आधुनिक शिक्षा और प्रौद्योगिकी
- सतत विकास और पर्यावरण
- सामाजिक परिवर्तन और शिक्षा की भूमिका
प्रदर्शनी में दिखी भारत की समृद्ध विरासत
राष्ट्रीय संगोष्ठी के साथ महाविद्यालय परिसर में एक विशेष अन्तर्विषयी प्रदर्शनी भी आयोजित की गई।
इस प्रदर्शनी में विभिन्न संकायों द्वारा भारतीय इतिहास, संस्कृति और ज्ञान परंपरा से संबंधित कई महत्वपूर्ण वस्तुओं का प्रदर्शन किया गया।
अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और छात्राओं से संवाद कर उनके कार्यों की सराहना की।
प्रदर्शनी में प्रदर्शित प्रमुख आकर्षणों में शामिल थे:
- प्राचीन सिक्कों का दुर्लभ संग्रह
- सम्राट विक्रमादित्य काल के सिक्के
- उज्जैन के महाकाल मंदिर से संबंधित ऐतिहासिक सिक्के
- विभिन्न कालखंडों की पुरातात्विक वस्तुएं
इसके अलावा पद्मश्री डॉ. नारायण व्यास द्वारा संग्रहित प्राचीन औजार, पंचांग, डाक टिकट और अन्य ऐतिहासिक वस्तुओं का भी प्रदर्शन किया गया।
वंदे मातरम् की ऐतिहासिक यात्रा पर विशेष प्रदर्शनी
कार्यक्रम के दौरान स्वराज संस्थान भोपाल के सहयोग से “वंदे मातरम्” की ऐतिहासिक यात्रा पर आधारित विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई।
इस प्रदर्शनी में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के इतिहास, उसकी उत्पत्ति और स्वतंत्रता संग्राम में उसकी प्रेरक भूमिका को दर्शाया गया।
साथ ही यह भी बताया गया कि किस प्रकार यह गीत भारतीय राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बन गया।
छात्राओं और आगंतुकों ने इस प्रदर्शनी में गहरी रुचि दिखाई और भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
शिक्षा और समाज के बीच संबंध
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज के बौद्धिक और सांस्कृतिक विकास का आधार भी है।
नई शिक्षा नीति के माध्यम से सरकार शिक्षा को समाज और संस्कृति से जोड़ने का प्रयास कर रही है।
इससे विद्यार्थियों में सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी और वे देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे।
अकादमिक और प्रशासनिक जगत की भागीदारी
इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में शिक्षा, प्रशासन और शोध जगत से जुड़े कई प्रमुख व्यक्तित्व शामिल हुए।
इनमें मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त मनोज श्रीवास्तव, उच्च शिक्षा आयुक्त प्रबल सिपाहा और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी आर.आर. रश्मि भी शामिल रहे।
इसके अलावा साहित्यकार उदयन वाजपेई, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के विशेषज्ञ डॉ. मनोज कुमार कुर्मी और जनजातीय संग्रहालय भोपाल के निदेशक डॉ. धर्मेंद्र पारे सहित कई विद्वानों ने अपने विचार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्राएं और शिक्षाविद उपस्थित रहे।
भविष्य की शिक्षा प्रणाली की दिशा
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में भारत की शिक्षा प्रणाली में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
नई शिक्षा नीति के तहत बहु-विषयक शिक्षा, डिजिटल लर्निंग, शोध और नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है।
यदि इन सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो भारत की शिक्षा प्रणाली वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकती है।
इसके साथ ही विद्यार्थियों को बेहतर रोजगार अवसर और कौशल विकास के नए मार्ग भी प्राप्त होंगे।
निष्कर्ष
भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी ने यह स्पष्ट किया कि भारत की शिक्षा प्रणाली तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत बहु-विषयक शिक्षा प्रणाली को अपनाने से विद्यार्थियों को व्यापक और समग्र ज्ञान प्राप्त होगा।
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए शिक्षा, संस्कृति, विज्ञान और सतत विकास के बीच संतुलन आवश्यक है। यदि शिक्षा प्रणाली में इन मूल्यों को प्रभावी ढंग से शामिल किया गया, तो आने वाले वर्षों में भारत ज्ञान, नवाचार और सांस्कृतिक समृद्धि के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकता है।

समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के भोपाल ब्यूरो में कार्यरत नंद किशोर लगभग 20 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं, एवं दो दशकों से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से जुड़े हुए हैं.
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