(पी.के. शुक्ला)
सागर (साई)।सागर में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यशाला ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब केवल तकनीकी दक्षता ही नहीं, बल्कि जीवन रक्षक कौशल भी औद्योगिक एवं विद्युत क्षेत्र में कार्यरत कर्मियों के लिए अनिवार्य होता जा रहा है। मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (एम.पी. ट्रांस्को) एवं शासकीय बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय, सागर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह सी.पी.आर. एवं अन्य जीवन रक्षक तकनीकों पर आधारित प्रशिक्षण कार्यशाला न केवल समयोचित रही, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत प्रासंगिक मानी जा रही है।
विद्युत ट्रांसमिशन क्षेत्र में कार्य करने वाले कर्मचारियों को अक्सर उच्च जोखिम वाले हालातों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में आकस्मिक दुर्घटना, करंट लगना, ऊंचाई से गिरना या अचानक हृदयाघात जैसी स्थितियों में प्राथमिक जीवन रक्षक सहायता का ज्ञान कई बार जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय करता है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सागर में यह विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
एम.पी. ट्रांस्को के ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस उप मुख्यालय, सागर की पहल पर आयोजित इस कार्यशाला में अधीक्षण अभियंता एम.वाय. मंसूरी एवं कार्यपालन अभियंता एस.के. मुड़ा ने कार्यक्रम के उद्देश्य, आवश्यकता और उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के समय में प्रत्येक तकनीकी कर्मी को केवल मशीनों और उपकरणों का ज्ञान ही नहीं, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया देने की क्षमता भी विकसित करनी चाहिए।
इस प्रशिक्षण कार्यशाला के संयोजक सहायक अभियंता एम.ए. बेग एवं कनिष्ठ अभियंता जे.पी. असाटी के सतत प्रयासों से इसे एक सुव्यवस्थित एवं प्रभावी रूप दिया गया। कार्यशाला में एम.पी. ट्रांस्को एवं मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र कंपनी, सागर के लगभग 100 मेंटेनेंस, ऑपरेटिंग एवं सुरक्षा कर्मियों ने सक्रिय भागीदारी की। बड़ी संख्या में कर्मियों की उपस्थिति इस बात का संकेत है कि सुरक्षा और जीवन रक्षक प्रशिक्षण को लेकर कर्मचारियों में भी जागरूकता बढ़ रही है।
कार्यशाला का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष रहा सी.पी.आर. (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) का व्यवहारिक प्रशिक्षण। चिकित्सकों ने विशेष मानव पुतलों और ऑडियो-विजुअल माध्यमों की सहायता से प्रतिभागियों को सी.पी.आर. की सही तकनीक सिखाई। इसमें यह बताया गया कि हृदय गति रुकने की स्थिति में किस प्रकार सही दबाव, सही गति और सही क्रम में सीने पर संपीड़न किया जाना चाहिए, ताकि मरीज की जान बचाई जा सके।
सी.पी.आर. के साथ-साथ अन्य जीवन रक्षक तकनीकों पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। इनमें पानी में डूबे हुए व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालने की विधि, बिजली के झटके से प्रभावित व्यक्ति को सुरक्षित तरीके से बचाने की प्रक्रिया, किसी वस्तु के श्वास नली में फंस जाने पर त्वरित प्राथमिक उपचार, तथा चोट लगने की स्थिति में तत्काल सहायता जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे। इन सभी विषयों पर चिकित्सकों ने व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया, जिससे प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों में इन तकनीकों के उपयोग की स्पष्ट समझ विकसित हो सके।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज, सागर के आकस्मिक चिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष एवं प्राध्यापक डॉ. सत्येंद्र उईके ने आपातकालीन चिकित्सा की बारीकियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि दुर्घटना के बाद के शुरुआती कुछ मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं और यदि उस समय सही प्राथमिक उपचार मिल जाए, तो गंभीर से गंभीर स्थिति को भी संभाला जा सकता है। निश्चेतना विभाग के सह प्राध्यापक डॉ. मोहम्मद इलियास एवं डॉ. दीपक गुप्ता ने सी.पी.आर. और शॉक मैनेजमेंट पर व्यावहारिक जानकारी दी।
सहायक प्राध्यापक एवं मीडिया प्रभारी डॉ. सौरभ जैन तथा सहायक प्राध्यापक डॉ. उमेश पटेल ने प्राथमिक उपचार और जन जागरूकता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे प्रशिक्षण नियमित रूप से आयोजित किए जाएं, तो समाज में दुर्घटनाओं के दौरान मृत्यु दर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
इस कार्यशाला का प्रशासनिक और सामाजिक प्रभाव भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रशासनिक दृष्टि से यह पहल कार्यस्थल सुरक्षा मानकों को मजबूत करने की दिशा में एक ठोस कदम है। वहीं सामाजिक दृष्टि से यह प्रशिक्षण कर्मियों को केवल अपने कार्यस्थल तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें समाज में भी एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में जीवन रक्षक भूमिका निभाने के लिए सक्षम बनाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि विद्युत कंपनियों, औद्योगिक इकाइयों और अन्य जोखिमपूर्ण क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए इस प्रकार का प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाना चाहिए। इससे न केवल कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि आपदा की स्थिति में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया भी संभव हो सकेगी।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने भी खुलकर अपने अनुभव साझा किए और कई व्यावहारिक प्रश्न पूछे, जिनका समाधान चिकित्सकों द्वारा मौके पर ही किया गया। इससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता और प्रभावशीलता और अधिक बढ़ गई। कई कर्मचारियों ने यह स्वीकार किया कि उन्हें पहली बार यह अहसास हुआ कि थोड़े से प्रशिक्षण से वे किसी की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
आने वाले समय में एम.पी. ट्रांस्को द्वारा इस प्रकार की कार्यशालाओं को अन्य जिलों में भी आयोजित किए जाने की संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है, तो यह न केवल कंपनी की सुरक्षा संस्कृति को मजबूत करेगा, बल्कि प्रदेश में आपातकालीन सहायता की एक प्रशिक्षित मानव श्रृंखला भी तैयार करेगा।
8️⃣ Conclusion / निष्कर्ष
सागर में आयोजित एम.पी. ट्रांस्को की यह जीवन रक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि कार्यस्थल सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी की दिशा में एक सार्थक पहल के रूप में सामने आई है। सी.पी.आर. और अन्य जीवन रक्षक तकनीकों का व्यवहारिक ज्ञान कर्मियों को आत्मविश्वास और दक्षता प्रदान करता है। यदि ऐसे प्रयास निरंतर जारी रहे, तो यह निस्संदेह दुर्घटनाओं में होने वाली जनहानि को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और एक सुरक्षित एवं संवेदनशील समाज के निर्माण में सहायक सिद्ध होंगे।

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