चुनावी पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम
(नन्द किशोर)
भोपाल (साई)।देश में चुनावी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए राज्यों के बीच सहयोग का दायरा लगातार बढ़ रहा है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग और राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग के बीच ईवीएम उपलब्ध कराने को लेकर महत्वपूर्ण समझौता हुआ है।
मध्यप्रदेश सरकार की इस पहल से राजस्थान में होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों के संचालन में तकनीकी मजबूती आएगी। यह समझौता संघीय ढांचे में राज्यों के बीच बेहतर समन्वय का उदाहरण माना जा रहा है।
अतिरिक्त एमओयू से बढ़ा सहयोग का दायरा
जयपुर में राज्य निर्वाचन आयोग कार्यालय में अतिरिक्त समझौता ज्ञापन (एडिशनल एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता पहले से मौजूद ईवीएम उपयोग संबंधी समझौते का विस्तार है।
इस समझौते के तहत:
- मध्यप्रदेश राजस्थान को बड़ी संख्या में ईवीएम उपलब्ध कराएगा
- चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन होगा
- ईवीएम की सुरक्षा और रखरखाव की जिम्मेदारी तय की गई है
यह समझौता चुनाव प्रक्रिया को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
कितनी ईवीएम उपलब्ध कराएगा मध्यप्रदेश
एडिशनल एमओयू के तहत मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग राजस्थान को:
- 30 हजार कंट्रोल यूनिट
- 60 हजार बैलेट यूनिट
उपलब्ध कराएगा।
इन ईवीएम का उपयोग राजस्थान में नगरीय निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों में किया जाएगा।
किराये और अवधि से जुड़ी अहम जानकारी
समझौते के अनुसार:
- ईवीएम 4 महीने की अवधि के लिए किराये पर दी जाएंगी
- राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग इसके लिए लगभग 3 करोड़ रुपये भुगतान करेगा
यह व्यवस्था राज्यों के संसाधनों के बेहतर उपयोग का उदाहरण मानी जा रही है।
तकनीकी सुरक्षा और परीक्षण की पूरी व्यवस्था
ईवीएम के तकनीकी परीक्षण और रखरखाव की जिम्मेदारी अधिकृत एजेंसियों को दी गई है।
मुख्य बिंदु:
- तकनीकी परीक्षण अधिकृत इंजीनियर करेंगे
- परिवहन और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन होगा
- चुनाव बाद मशीनों की जांच और वापसी सुनिश्चित होगी
तकनीकी जांच का काम अधिकृत इंजीनियरों द्वारा किया जाएगा, जिससे मशीनों की विश्वसनीयता बनी रहे।
चुनाव प्रक्रिया में सुरक्षा प्रबंधन पर विशेष ध्यान
समझौते में ईवीएम की सुरक्षा को लेकर विशेष प्रावधान किए गए हैं।
इनमें शामिल हैं:
- सुरक्षित परिवहन
- सुरक्षित भंडारण
- तकनीकी निगरानी
- चुनाव के बाद मशीनों की सुरक्षित वापसी
इससे चुनाव प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की तकनीकी या सुरक्षा समस्या की संभावना कम होगी।
पहले भी अन्य राज्यों को ईवीएम दे चुका है मध्यप्रदेश
मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग पहले भी कई राज्यों को ईवीएम उपलब्ध करा चुका है।
इन राज्यों में शामिल हैं:
- छत्तीसगढ़
- जम्मू-कश्मीर
- सिक्किम
- महाराष्ट्र
यह अनुभव भविष्य में ऐसे सहयोग को और मजबूत बनाने में मदद करेगा।
संघीय ढांचे को मजबूत करने की दिशा में अहम पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यों के बीच इस तरह का सहयोग संघीय ढांचे को मजबूत करता है।
इसके फायदे:
- संसाधनों का बेहतर उपयोग
- चुनावी लागत में कमी
- तकनीकी मानकों में एकरूपता
- चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता में वृद्धि
प्रशासनिक और चुनावी व्यवस्था पर प्रभाव
प्रशासनिक प्रभाव
राज्यों के बीच सहयोग बढ़ने से चुनावी संसाधनों का बेहतर प्रबंधन संभव होगा।
चुनावी प्रभाव
- चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी
- तकनीकी त्रुटियों की संभावना कम होगी
- चुनाव परिणामों की विश्वसनीयता बढ़ेगी
सामाजिक प्रभाव
- मतदाताओं का विश्वास बढ़ेगा
- लोकतांत्रिक प्रक्रिया मजबूत होगी
जनता और राजनीतिक वर्ग की संभावित प्रतिक्रिया
चुनावी पारदर्शिता को लेकर जनता में सकारात्मक संदेश जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तकनीकी रूप से मजबूत चुनाव प्रणाली लोकतंत्र के लिए जरूरी है।
भविष्य में ऐसे सहयोग बढ़ने की संभावना
आने वाले समय में अन्य राज्यों के बीच भी इस तरह के सहयोग बढ़ सकते हैं।
संभावित फायदे:
- राष्ट्रीय स्तर पर चुनावी तकनीक मजबूत होगी
- संसाधनों की बचत होगी
- चुनाव आयोगों के बीच समन्वय बढ़ेगा
🔷 Conclusion / निष्कर्ष
मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच हुआ ईवीएम समझौता चुनावी पारदर्शिता और तकनीकी मजबूती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल चुनाव प्रक्रिया बेहतर होगी बल्कि राज्यों के बीच सहयोग की नई मिसाल भी स्थापित होगी।
आने वाले समय में ऐसे समझौते लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

कर्नाटक की राजधानी बंग्लुरू में समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो के रूप में कार्यरत श्वेता यादव ने नई दिल्ली के एक ख्यातिलब्ध मास कम्यूनिकेशन इंस्टीट्यूट से पोस्ट ग्रेजुएशन की उपाधि लेने के बाद वे पिछले लगभग 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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