आजीविका मिशन की दीदियाँ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को कर रहीं सशक्त, 65 लाख महिलाएँ जुड़ीं; 310 करोड़ का वार्षिक व्यापार

मध्यप्रदेश में आजीविका मिशन से जुड़ी 65 लाख दीदियाँ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि 5 लाख स्व-सहायता समूहों के माध्यम से एक वर्ष में 310 करोड़ रुपये का व्यापार हुआ है और 12 लाख से अधिक महिलाएँ लखपति बन चुकी हैं। वर्ष 2026-27 के बजट में महिला एवं बाल विकास विभाग के लिए 26% वृद्धि भी की गई है। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला उद्यमिता और डिजिटल बाजार से जुड़ाव को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।

(बुद्धसेन शर्मा)

भोपाल (साई)।मध्यप्रदेश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा परिवर्तन दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आजीविका मिशन से जुड़ी दीदियाँ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार दे रही हैं। 5 लाख स्व-सहायता समूहों के माध्यम से 65 लाख से अधिक महिलाएँ संगठित होकर आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी कर रही हैं।

इनमें से 12 लाख से अधिक महिलाएँ “लखपति दीदी” बन चुकी हैं। पिछले एक वर्ष में इन समूहों ने 310 करोड़ रुपये का व्यापार कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

आजीविका मिशन: ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई धुरी

मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को समूह आधारित स्वरोजगार से जोड़ा गया है। स्व-सहायता समूहों की यह संरचना केवल बचत तक सीमित नहीं रही, बल्कि अब उत्पादन, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और विपणन तक विस्तारित हो चुकी है।

ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं ने निम्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किया है:

  • अचार, पापड़, मसाला निर्माण
  • मिलेट्स आधारित उत्पाद
  • डेयरी और प्राकृतिक खेती
  • कैफे संचालन
  • गैस व पेट्रोल रिफिलिंग केंद्र संचालन
  • ड्रोन संचालन और कृषि सेवाएँ

मुख्यमंत्री ने इसे “बंद मुट्ठी लाख की” की भावना का जीवंत उदाहरण बताया।

310 करोड़ का व्यापार: आंकड़ों में सफलता

आर्थिक उपलब्धियों के लिहाज से यह वर्ष विशेष रहा।

मुख्य तथ्य:

  • 5 लाख स्व-सहायता समूह सक्रिय
  • 65 लाख से अधिक महिलाएँ जुड़ीं
  • 12 लाख से अधिक लखपति दीदी
  • 310 करोड़ रुपये का वार्षिक व्यापार
  • 50 हजार महिलाएँ प्राकृतिक खेती से जुड़ीं
  • 43 रूरल मार्ट संचालित

ये आँकड़े संकेत देते हैं कि महिला समूह अब स्थानीय बाजार से निकलकर राष्ट्रीय और डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुँच बना रहे हैं।

बजट 2026-27: महिला एवं बाल विकास में 26% वृद्धि

वर्ष 2026-27 के बजट में महिला एवं बाल विकास विभाग के लिए 26 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इसके साथ ही कुल बजट का 34 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण विकास पर खर्च करने की घोषणा की गई है।

यह संकेत देता है कि सरकार महिला सशक्तिकरण को केवल सामाजिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आर्थिक विकास की रणनीति के रूप में देख रही है।

होली से जुड़ा विशेष आर्थिक मॉडल

कार्यक्रम के दौरान स्पेशल होली हैम्पर लॉन्च किया गया, जिसमें शामिल हैं:

  • प्राकृतिक रंग
  • देशी घी
  • मिष्ठान
  • गोकाष्ठ
  • पूजन सामग्री
  • टी-शर्ट सहित 10 उत्पाद

यह मॉडल त्योहारी अर्थव्यवस्था को महिला समूहों से जोड़ने का उदाहरण है। त्योहार आधारित उत्पादों को संगठित विपणन से जोड़कर आय में वृद्धि की संभावनाएँ बढ़ाई गई हैं।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ाव: नई बाजार रणनीति

India Post, Amazon Saheli सहित अन्य संस्थाओं के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) का आदान-प्रदान हुआ।

इसके तहत:

  • उत्पादों की ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर उपलब्धता
  • डाक विभाग के माध्यम से मजबूत सप्लाई चेन
  • प्रशिक्षण और पैकेजिंग मानकीकरण

यह कदम ग्रामीण उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आजीविका मार्ट और रिटेल विस्तार

ग्वालियर में आजीविका मार्ट और जबलपुर एयरपोर्ट पर रिटेल आउटलेट का वर्चुअल शुभारंभ किया गया। संभाग और जिला स्तर पर होली मेलों की शुरुआत से महिला समूहों को सीधे उपभोक्ता तक पहुँच का अवसर मिला है।

इससे ग्रामीण उत्पादों को ब्रांड पहचान मिलने की संभावना है।

क्षमतावर्धन कार्यशाला: कौशल से कारोबार तक

भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित कार्यशाला में प्रशिक्षण मॉड्यूल का विमोचन किया गया।

प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु:

  • प्राकृतिक खेती तकनीक
  • मार्केटिंग कौशल
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म उपयोग
  • वित्तीय प्रबंधन

यह पहल समूहों को आत्मनिर्भर उद्यमी के रूप में विकसित करने की दिशा में अहम है।

सामाजिक प्रभाव: परिवार से बाजार तक

ग्रामीण परिवारों में महिलाओं की आय बढ़ने से:

  • बच्चों की शिक्षा में सुधार
  • पोषण स्तर में वृद्धि
  • स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुँच
  • घरेलू निर्णयों में महिलाओं की भागीदारी

विशेषज्ञ मानते हैं कि जब आय महिलाओं के हाथ में आती है तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार और समुदाय पर पड़ता है।

राजनीतिक और प्रशासनिक संदर्भ

कार्यक्रम में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। प्रशासनिक स्तर पर यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि महिला समूहों को तकनीकी और वित्तीय सहयोग जारी रहेगा।

प्रधानमंत्री द्वारा लखपति दीदी मॉडल की सराहना का उल्लेख करते हुए यह भी कहा गया कि महिलाओं की भागीदारी देश को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में सहायक होगी।

प्राकृतिक खेती और महिला नेतृत्व

मध्यप्रदेश को प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बताया गया है। 50 हजार महिलाएँ इस दिशा में सक्रिय हैं।

प्राकृतिक खेती से:

  • उत्पादन लागत में कमी
  • जैविक उत्पादों की मांग में वृद्धि
  • पर्यावरण संरक्षण

महिला समूहों की भागीदारी से यह मॉडल अधिक टिकाऊ बनता दिख रहा है।

सार्वजनिक प्रतिक्रिया

ग्रामीण क्षेत्रों से सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आ रही है। कई जिलों की महिलाओं ने अपनी आय में दोगुनी वृद्धि की बात कही है।

गुना जिले की एक समूह सदस्य द्वारा साझा की गई सफलता की कहानी ने अन्य महिलाओं को प्रेरित किया।

भविष्य की संभावनाएँ

विशेषज्ञों के अनुसार:

  • डिजिटल मार्केट विस्तार से निर्यात संभावनाएँ
  • ब्रांडिंग और गुणवत्ता मानकीकरण से प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त
  • कौशल उन्नयन से उच्च मूल्य उत्पाद निर्माण
  • ग्रामीण पर्यटन और फूड प्रोसेसिंग में विस्तार

यदि बजट प्रावधानों का प्रभावी उपयोग हुआ, तो आने वाले वर्षों में महिला समूह प्रदेश की जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

निष्कर्ष

मध्यप्रदेश में आजीविका मिशन केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का परिवर्तनकारी मॉडल बनकर उभरा है। 65 लाख महिलाओं की भागीदारी, 310 करोड़ रुपये का वार्षिक व्यापार और 12 लाख लखपति दीदी इस परिवर्तन की ठोस मिसाल हैं।

बजट में 26 प्रतिशत वृद्धि और डिजिटल बाजार से जुड़ाव यह संकेत देते हैं कि महिला सशक्तिकरण को विकास की मुख्यधारा में स्थान दिया जा रहा है।

यदि प्रशिक्षण, विपणन और वित्तीय सहयोग की यह गति बनी रही, तो आने वाले समय में प्रदेश की दीदियाँ न केवल परिवारों को, बल्कि संपूर्ण अर्थव्यवस्था को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी।