मध्यप्रदेश में डिजिटल क्रांति: सायबर पंजीयन कार्यालय से पेपरलेस और कैशलेस व्यवस्था को नई गति

मध्यप्रदेश में सायबर पंजीयन कार्यालय शुरू होने से सरकारी सेवाओं में बड़ा डिजिटल बदलाव आया है। अब 75 से अधिक सेवाएं पेपरलेस और कैशलेस तरीके से उपलब्ध होंगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, भ्रष्टाचार कम होगा और नागरिकों का समय व पैसा बचेगा। यह कदम डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में बड़ा सुधार माना जा रहा है।

डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में बड़ा कदम

(बुद्धसेन शर्मा)

भोपाल (साई)। मध्यप्रदेश सरकार ने प्रशासनिक सुधार और तकनीक आधारित सुशासन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य में सायबर पंजीयन कार्यालय के शुभारंभ के साथ अब पंजीयन से जुड़ी 75 से अधिक सेवाएं पूरी तरह डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जाएंगी।

यह पहल डिजिटल इंडिया के विजन को मजबूत करने के साथ-साथ सरकारी प्रक्रियाओं को सरल, तेज और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा सुधार मानी जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह व्यवस्था नई पीढ़ी के लिए सुविधाजनक होने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी।

इस पहल को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल भारत विजन से भी जोड़ा जा रहा है, जिसमें प्रशासनिक सेवाओं को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है।

संपदा 2.0 से शुरू हुआ डिजिटल बदलाव

डिजिटल पंजीयन व्यवस्था की शुरुआत संपदा 1.0 से हुई थी, जिसे आगे बढ़ाकर संपदा 2.0 बनाया गया। यह सिस्टम दस्तावेजों के डिजिटल पंजीयन और ई-स्टाम्पिंग के लिए अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर के रूप में विकसित किया गया।

मुख्य उपलब्धियां:

  • डिजिटल दस्तावेज पंजीयन
  • ई-स्टाम्पिंग सुविधा
  • ऑनलाइन दस्तावेज सत्यापन
  • दूरस्थ पंजीयन सुविधा

संपदा 2.0 को वर्ष 2025 में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस स्वर्ण पुरस्कार मिलना इसकी सफलता और प्रभावशीलता का प्रमाण माना जा रहा है।

75 से अधिक सेवाएं अब ऑनलाइन

सायबर पंजीयन प्रणाली के तहत कई महत्वपूर्ण सेवाएं डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • मुख्तयारनामा
  • माइनिंग लीज
  • हलफनामा
  • पावर ऑफ अटार्नी
  • पार्टनरशिप डीड
  • लोन संबंधित दस्तावेज

इससे नागरिकों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी।

प्रशासनिक पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर प्रभाव

डिजिटल सिस्टम लागू होने से:

  • मानव हस्तक्षेप कम होगा
  • फर्जी दस्तावेज की संभावना घटेगी
  • भुगतान पूरी तरह डिजिटल होगा
  • प्रक्रिया ट्रैक करना आसान होगा

विशेषज्ञ मानते हैं कि डिजिटल पंजीयन से भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।

वीडियो केवाईसी और ऑनलाइन सत्यापन

नई व्यवस्था में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वीडियो KYC की सुविधा दी जाएगी। इससे नागरिक अपने घर से ही दस्तावेज सत्यापन और पंजीयन प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।

इसके फायदे:

  • समय की बचत
  • यात्रा खर्च कम
  • ग्रामीण क्षेत्रों को फायदा
  • वरिष्ठ नागरिकों को सुविधा

डेटा और उपलब्धियां

अब तक:

  • 14 लाख 95 हजार से अधिक दस्तावेज पंजीकृत
  • 55 जिलों में साइबर तहसील लागू
  • नामांतरण और बंटवारा प्रक्रिया डिजिटल

यह आंकड़े डिजिटल सिस्टम की स्वीकार्यता और उपयोगिता को दर्शाते हैं।

साइबर तहसील परियोजना का प्रभाव

साइबर तहसील परियोजना से राजस्व संबंधी कई प्रक्रियाएं ऑनलाइन हो गई हैं।

इसके तहत:

  • नामांतरण
  • भूमि बंटवारा
  • रिकॉर्ड अपडेट
  • दस्तावेज सत्यापन

इन सेवाओं का डिजिटलीकरण ग्रामीण क्षेत्रों के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है।

सामाजिक प्रभाव और जनता की प्रतिक्रिया

सामाजिक स्तर पर इस पहल को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।

जनता के अनुसार:

  • सरकारी प्रक्रिया आसान होगी
  • समय की बचत होगी
  • दलाल सिस्टम खत्म होगा
  • पारदर्शिता बढ़ेगी

युवा वर्ग इसे डिजिटल भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहा है।

आर्थिक प्रभाव

पेपरलेस और कैशलेस व्यवस्था से:

  • प्रशासनिक लागत कम होगी
  • राजस्व संग्रह बढ़ेगा
  • डेटा मैनेजमेंट बेहतर होगा
  • निवेश वातावरण मजबूत होगा

डिजिटल दस्तावेज प्रणाली से बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर को भी लाभ मिलने की संभावना है।

पर्यावरण पर सकारात्मक असर

पेपरलेस प्रक्रिया से कागज की खपत कम होगी।

पर्यावरण लाभ:

  • पेड़ों की कटाई कम
  • कार्बन फुटप्रिंट कम
  • ग्रीन गवर्नेंस को बढ़ावा

प्रशासनिक क्षमता और प्रशिक्षण

राज्य सरकार द्वारा लगभग 14 लाख कर्मचारियों को डिजिटल सिस्टम के लिए प्रशिक्षित किया गया है।

इससे:

  • सिस्टम संचालन आसान
  • त्रुटि कम
  • सेवा गुणवत्ता बेहतर

भविष्य की संभावनाएं

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में:

  • पूरी पंजीयन प्रणाली ऑनलाइन हो सकती है
  • ब्लॉकचेन आधारित रिकॉर्ड संभव
  • AI आधारित दस्तावेज सत्यापन
  • राष्ट्रीय स्तर पर मॉडल सिस्टम बन सकता है

क्षेत्रीय और राष्ट्रीय पहचान

मध्यप्रदेश की यह पहल देश के अन्य राज्यों के लिए मॉडल बन सकती है।

राज्य मध्यप्रदेश पहले भी कई डिजिटल नवाचारों के लिए जाना जाता रहा है।

इस प्रणाली की शुरुआत राजधानी भोपाल से होना प्रशासनिक महत्व को दर्शाता है।

शासन और नीति प्रभाव

सरकार का उद्देश्य:

  • डिजिटल प्रशासन
  • पारदर्शी सेवा
  • भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था
  • तेज निर्णय प्रक्रिया

यह पहल राज्य के सुशासन मॉडल को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

निष्कर्ष

सायबर पंजीयन कार्यालय की शुरुआत मध्यप्रदेश में डिजिटल प्रशासन की नई दिशा को दर्शाती है। पेपरलेस और कैशलेस व्यवस्था से सरकारी सेवाएं तेज, पारदर्शी और आसान बनेंगी।

यह पहल न केवल प्रशासनिक सुधार का उदाहरण है बल्कि डिजिटल भारत के लक्ष्य को भी मजबूत करती है। आने वाले समय में यह मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बन सकता है।

तकनीक आधारित यह बदलाव नागरिक सुविधाओं को नए स्तर तक पहुंचाने की क्षमता रखता है और डिजिटल गवर्नेंस के भविष्य को मजबूत आधार देता है।