(बुद्धसेन शर्मा)
भोपाल (साई)। मध्य प्रदेश में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और देश में लागू हुए नवीन आपराधिक कानूनों (New Criminal Laws) के जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर मंगलवार (10 फरवरी, 2026) को मंत्रालय में एक बेहद अहम समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता मध्य प्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव (गृह) श्री शिव शेखर शुक्ला ने की।
बैठक का मुख्य एजेंडा राज्य में भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के तहत पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया की प्रगति को जांचना था। इसके अलावा, राज्य की आंतरिक सुरक्षा, नक्सल उन्मूलन और पुलिस आधुनिकीकरण जैसे गंभीर विषयों पर भी केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के अधिकारियों के साथ विस्तृत मंथन किया गया।
केन्द्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय की पहल
इस समीक्षा बैठक का महत्व इसलिए भी बढ़ गया क्योंकि इसमें भारत सरकार के गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल विशेष रूप से शामिल हुआ। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से संयुक्त सचिव (आंतरिक सुरक्षा–II) सुश्री निष्ठा तिवारी और संयुक्त निदेशक सुश्री अमृता डेस उपस्थित रहीं।
बैठक की शुरुआत में पुलिस महानिरीक्षक एवं गृह विभाग की सचिव श्रीमती कृष्णावेणी देशावतु ने अतिथियों का औपचारिक स्वागत किया और राज्य में चल रही कानून व्यवस्था की स्थिति का ब्योरा रखा। केंद्र और राज्य के अधिकारियों के बीच हुई इस चर्चा का उद्देश्य सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए एक साझा रणनीति तैयार करना था।
समीक्षा के मुख्य बिंदु: न्याय प्रणाली और फॉरेंसिक पर जोर
बैठक के दौरान अपर मुख्य सचिव श्री शिव शेखर शुक्ला ने स्पष्ट किया कि नए कानूनों का मूल उद्देश्य नागरिकों को त्वरित और पारदर्शी न्याय दिलाना है। चर्चा के दौरान निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष फोकस किया गया:
- आपराधिक न्याय प्रणाली (Criminal Justice System): नए कानूनों के तहत एफआईआर से लेकर चार्जशीट और फैसले तक की समय सीमा तय की गई है। बैठक में इस बात की समीक्षा की गई कि पुलिस और अभियोजन विभाग इन समय सीमाओं का पालन किस हद तक कर पा रहे हैं।
- फॉरेंसिक व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण: नवीन कानूनों में गंभीर अपराधों में फॉरेंसिक साक्ष्य (Forensic Evidence) अनिवार्य कर दिए गए हैं। इसके लिए राज्य में फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरीज (FSL) की क्षमता बढ़ाने और मोबाइल फॉरेंसिक वैन की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई।
- जेल प्रबंधन: आधुनिक जेल सुधारों और कैदियों के मानवाधिकारों के साथ-साथ जेलों की सुरक्षा व्यवस्था को हाईटेक करने पर भी विचार-विमर्श किया गया।
साइबर अपराध और आतंकवाद निरोध पर सख्त रुख
डिजिटल युग में बदलते अपराध के तरीकों को देखते हुए बैठक में ‘साइबर अपराध नियंत्रण’ (Cyber Crime Control) एक प्रमुख मुद्दा रहा। अधिकारियों ने माना कि डिजिटल फ्रॉड और साइबर ब्लैकमेलिंग के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे निपटने के लिए जिला स्तर पर साइबर थानों को और अधिक संसाधन युक्त बनाने की आवश्यकता है।
इसके अतिरिक्त, ‘आतंकवाद निरोध’ (Counter Terrorism) और राज्य में नक्सल गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए भी रणनीतिक चर्चा हुई। विशेष रूप से मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा बलों की तैनाती और खुफिया तंत्र (Intelligence Network) को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
विभिन्न विभागों का समन्वय: स्वास्थ्य और आईटी की भूमिका
नए आपराधिक कानूनों के सफल क्रियान्वयन के लिए केवल पुलिस विभाग ही नहीं, बल्कि अन्य विभागों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। बैठक में इस ‘इंटर-डिपार्टमेंटल को-ऑर्डिनेशन’ पर विशेष ध्यान दिया गया।
- लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग: नए कानूनों में मेडिको-लीगल रिपोर्ट्स की समयबद्धता अनिवार्य है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित करने की योजना बनाई गई कि मेडिकल रिपोर्ट्स में देरी के कारण न्याय प्रक्रिया बाधित न हो।
- राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC): संपूर्ण न्याय प्रक्रिया अब डिजिटलीकृत हो रही है। ई-एफआईआर (e-FIR), डिजिटल साक्ष्य संग्रहण और सीसीटीएनएस (CCTNS) की कार्यप्रणाली को सुचारू रखने के लिए एनआईसी के अधिकारियों से तकनीकी पहलुओं पर चर्चा की गई।
- विधि एवं विधायी कार्य विभाग: कानूनों की व्याख्या और अभियोजन प्रक्रिया को त्रुटि रहित बनाने के लिए विधि विभाग के अधिकारियों ने अपने सुझाव रखे।
मादक पदार्थ नियंत्रण और आपदा प्रबंधन
समीक्षा बैठक में नशा मुक्ति और मादक पदार्थों की तस्करी (Narcotics Control) रोकने के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाने पर बल दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए प्रवर्तन (Enforcement) के साथ-साथ जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे।
साथ ही, मध्य प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ मिलकर राज्य में प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की गई। पुलिस बल को आपदा प्रबंधन में ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ के रूप में और अधिक प्रशिक्षित करने की बात कही गई।
पुलिस आधुनिकीकरण: स्मार्ट पुलिसिंग की ओर कदम
बैठक में ‘पुलिस आधुनिकीकरण’ (Police Modernization) योजना के तहत पुलिस को आधुनिक हथियार, संचार उपकरण और वाहन उपलब्ध कराने की प्रगति रिपोर्ट भी पेश की गई। केंद्र सरकार द्वारा पुलिस बलों के आधुनिकीकरण के लिए दी जाने वाली सहायता राशि के उपयोग और आगामी वित्तीय वर्ष के लिए नई कार्ययोजना पर भी चर्चा हुई।
विशेषज्ञों की राय और भविष्य की राह
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय व्यवस्था में एक युगांतरकारी बदलाव हैं। हालांकि, इनकी सफलता पूरी तरह से इनके क्रियान्वयन (Implementation) पर निर्भर करती है।
मध्य प्रदेश में इस तरह की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठकें यह दर्शाती हैं कि राज्य सरकार कानूनों को लागू करने के प्रति गंभीर है। फॉरेंसिक साक्ष्यों की अनिवार्यता से सजा की दर (Conviction Rate) में सुधार होगा और अपराधियों में कानून का भय व्याप्त होगा।
भविष्य में, पुलिस जांच में पारदर्शिता लाने के लिए वीडियोग्राफी और डिजिटल रिकॉर्डिंग का चलन बढ़ेगा, जिसके लिए पुलिस कर्मियों को निरंतर प्रशिक्षण दिए जाने की आवश्यकता है। बैठक में यह भी तय किया गया कि पुलिस और अभियोजन अधिकारियों के लिए नियमित कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी ताकि वे कानूनों की बारीकियों से अपडेट रह सकें।
️⃣ CONCLUSION /निष्कर्ष
भोपाल में संपन्न हुई यह समीक्षा बैठक मध्य प्रदेश की आंतरिक सुरक्षा और न्याय प्रणाली के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। अपर मुख्य सचिव (गृह) शिव शेखर शुक्ला की अध्यक्षता में हुई इस बैठक ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासन नए आपराधिक कानूनों को केवल कागजों तक सीमित न रखकर उन्हें धरातल पर प्रभावी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों की उपस्थिति ने राज्य और केंद्र के बीच सुरक्षा मामलों में बेहतर समन्वय का संकेत दिया है। उम्मीद की जा सकती है कि फॉरेंसिक, साइबर सुरक्षा और पुलिस आधुनिकीकरण पर लिए गए निर्णयों से आम जनता को त्वरित न्याय मिलेगा और प्रदेश में कानून का राज और अधिक सशक्त होगा।

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