उद्योग सुधारों की दिशा में नया चरण
(नन्द किशोर)
भोपाल (साई)। देश में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें लगातार नीतिगत बदलाव कर रही हैं। इसी कड़ी में मध्यप्रदेश में विनियमन शिथिलीकरण के दूसरे चरण के तहत उद्योगों के लिए नियमों को सरल बनाने और अनुपालन बोझ कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।
हाल ही में नीलम शमी राव ने कहा कि उद्योगों को केवल निवेशक नहीं बल्कि शासन सुधार प्रक्रिया का सक्रिय भागीदार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सुधार केवल अधिसूचना तक सीमित नहीं रहने चाहिए बल्कि जमीनी स्तर पर दिखाई देने चाहिए।
यह बैठक भोपाल में आयोजित हुई, जहां उद्योग प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने सुधारों के अगले चरण पर विस्तृत चर्चा की।
उद्योग सहभागिता क्यों है जरूरी
औद्योगिक नीति विशेषज्ञों का मानना है कि उद्योगों को नीति निर्माण प्रक्रिया में शामिल करने से सुधार अधिक व्यावहारिक और प्रभावी बनते हैं।
उद्योग सहभागिता के प्रमुख लाभ
- नीतियों की जमीनी उपयोगिता बढ़ती है
- निवेशकों का भरोसा मजबूत होता है
- अनुपालन प्रक्रिया सरल होती है
- औद्योगिक विकास तेज होता है
इस मॉडल का उद्देश्य शासन और उद्योग के बीच भरोसे का मजबूत संबंध बनाना है।
राज्य की औद्योगिक नीति में बड़े बदलाव
मध्य प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में औद्योगिक सुधारों पर विशेष ध्यान दिया है।
पहले चरण के तहत कई क्षेत्रों में संरचनात्मक बदलाव किए गए:
- भूमि उपयोग नियमों में सुधार
- भवन निर्माण अनुमति प्रक्रिया सरल
- श्रम नियमों में स्पष्टता
- प्रशासनिक प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण
इन सुधारों ने निवेश के लिए बेहतर वातावरण तैयार किया।
विनियमन शिथिलीकरण चरण-द्वितीय का उद्देश्य
दूसरे चरण में सुधारों का फोकस केवल नियम कम करने पर नहीं बल्कि प्रक्रिया सुधार पर है।
मुख्य लक्ष्य
- अनुपालन बोझ कम करना
- अनुमतियों की प्रक्रिया तेज करना
- विभागीय दोहराव खत्म करना
- उद्योग अनुकूल वातावरण बनाना
सरकार का लक्ष्य 28 प्राथमिक क्षेत्रों में सुधार लागू करना है।
डिजिटल सिस्टम और सिंगल विंडो मॉडल
नई औद्योगिक नीति में डिजिटल अनुमोदन प्रणाली को मजबूत किया जा रहा है।
प्रमुख सुधार
- पूरी तरह डिजिटल अनुमोदन प्रक्रिया
- एकीकृत सिंगल विंडो सिस्टम
- ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम
- समयबद्ध मंजूरी
यह मॉडल निवेशकों के लिए प्रक्रिया को पारदर्शी बनाएगा।
विश्वास आधारित शासन मॉडल की ओर कदम
नई नीति नियंत्रण आधारित मॉडल से विश्वास आधारित मॉडल की ओर बदलाव को दर्शाती है।
इस दिशा में कई कदम उठाए गए:
- कई प्रावधानों का अपराध मुक्तिकरण
- प्रक्रियाओं में पारदर्शिता
- उद्योगों से सतत संवाद
इससे निवेशकों का विश्वास बढ़ने की उम्मीद है।
निवेश और रोजगार पर संभावित असर
औद्योगिक सुधारों का सीधा असर निवेश और रोजगार पर पड़ता है।
संभावित सकारात्मक प्रभाव
- नए उद्योगों की स्थापना
- रोजगार अवसर बढ़ना
- स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होना
- निर्यात क्षमता बढ़ना
विशेषज्ञों का मानना है कि सरल नियम निवेश को आकर्षित करते हैं।
सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
औद्योगिक विकास का असर केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक भी होता है।
संभावित सामाजिक लाभ
- स्थानीय रोजगार बढ़ना
- शहरीकरण को गति
- कौशल विकास के अवसर
- जीवन स्तर में सुधार
निवेशकों के लिए क्या बदलेगा
निवेशकों को नई नीति से कई लाभ मिल सकते हैं:
- कम कागजी प्रक्रिया
- तेज अनुमोदन
- स्पष्ट नियम
- कम लागत
यह बदलाव निवेश माहौल को प्रतिस्पर्धी बनाएगा।
प्रशासनिक दक्षता की परीक्षा
औद्योगिक सुधारों का सफल क्रियान्वयन प्रशासनिक दक्षता पर निर्भर करता है।
प्रमुख चुनौतियां
- विभागीय समन्वय
- तकनीकी सिस्टम का प्रभावी उपयोग
- समयबद्ध क्रियान्वयन
राष्ट्रीय स्तर पर सुधारों का प्रभाव
भारत में औद्योगिक सुधार वैश्विक निवेश आकर्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए ऐसे सुधार जरूरी माने जा रहे हैं।
भविष्य की संभावनाएं
विशेषज्ञों के अनुसार भविष्य में:
- उद्योग स्वीकृति प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल हो सकती है
- निवेश ट्रैकिंग सिस्टम रियल टाइम हो सकता है
- उद्योग नीति अधिक डेटा आधारित हो सकती है
विशेषज्ञों की राय
नीति विशेषज्ञों का मानना है कि उद्योग सहभागिता आधारित सुधार मॉडल लंबे समय में अधिक सफल होते हैं।
इससे नीतियां व्यावहारिक बनती हैं और क्रियान्वयन आसान होता है।
जन अपेक्षाएं और चिंताएं
जनता को उम्मीद है कि औद्योगिक विकास से रोजगार बढ़ेगा और स्थानीय विकास को गति मिलेगी।
हालांकि पर्यावरण संतुलन और संसाधन प्रबंधन पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई जा रही है।
🔹 निष्कर्ष
मध्यप्रदेश में विनियमन शिथिलीकरण का दूसरा चरण राज्य को औद्योगिक निवेश के लिए अधिक आकर्षक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उद्योगों की सहभागिता से सुधारों को जमीनी स्तर पर लागू करने में मदद मिलेगी।
यदि सुधारों का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो इससे निवेश, रोजगार और आर्थिक विकास को गति मिल सकती है। आने वाले समय में यह नीति राज्य की औद्योगिक पहचान को मजबूत बना सकती है।

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