मध्यप्रदेश आयुष और औषधीय पादप क्षेत्र में नए युग की ओर, डेस्क कैलेंडर–2026 और “मध्य हर्बल दर्पण” का विमोचन

मध्यप्रदेश सरकार आयुष एवं औषधीय पादप क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में लगातार कदम बढ़ा रही है। आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि राज्य की जैव-विविधता और पारंपरिक ज्ञान आयुष आधारित समग्र स्वास्थ्य व्यवस्था का मजबूत आधार है। औषधीय पादप डेस्क कैलेंडर–2026 और “मध्य हर्बल दर्पण” पत्रिका का विमोचन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे स्वास्थ्य, ग्रामीण आजीविका और हरित अर्थव्यवस्था को नया बल मिलेगा।

आयुष आधारित स्वास्थ्य व्यवस्था की ओर बढ़ता मध्यप्रदेश

(बुद्धसेन शर्मा)

भोपाल (साई)।मध्यप्रदेश आयुष, आयुर्वेद और औषधीय पादपों के क्षेत्र में एक संगठित और दीर्घकालिक रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक विज्ञान और नीति समर्थन के साथ जोड़कर समग्र स्वास्थ्य प्रणाली विकसित की जाए। इसी क्रम में भोपाल में बुधवार, 4 फरवरी 2026 को आयोजित कार्यक्रम में आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने औषधीय पादप डेस्क कैलेंडर–2026 और “मध्य हर्बल दर्पण” मासिक पत्रिका का विमोचन किया।

प्राचीन ज्ञान और आधुनिक जरूरतों का संगम

आयुष मंत्री श्री परमार ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की प्राचीन चिकित्सा परंपराएँ केवल रोग उपचार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे जीवन जीने की एक संतुलित और प्रकृति आधारित पद्धति प्रस्तुत करती हैं। आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी, योग और प्राकृतिक चिकित्सा जैसी प्रणालियाँ आज की जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने कहा कि आयुष को निवारक और समग्र स्वास्थ्य व्यवस्था के रूप में विकसित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।

औषधीय पादपों में मध्यप्रदेश की विशिष्ट पहचान

मध्यप्रदेश का विशाल वन क्षेत्र, विविध जलवायु और समृद्ध जैव-विविधता इसे औषधीय पादपों के लिए देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करती है। राज्य में 7 हजार से अधिक औषधीय प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जो आयुष आधारित स्वास्थ्य सेवाओं और हर्बल उद्योग के लिए मजबूत आधार प्रदान करती हैं। यह विविधता न केवल चिकित्सा क्षेत्र में बल्कि कृषि, उद्योग और रोजगार के नए अवसर भी सृजित करती है।

डेस्क कैलेंडर–2026: ज्ञान का सरल माध्यम

औषधीय पादप डेस्क कैलेंडर–2026 को आमजन के लिए एक उपयोगी और ज्ञानवर्धक माध्यम के रूप में तैयार किया गया है। इस कैलेंडर में वर्ष भर विभिन्न औषधीय पौधों की जानकारी, उनके उपयोग, पहचान और महत्व को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है। इससे आम नागरिकों के साथ-साथ किसानों, विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को भी लाभ मिलेगा।

डेस्क कैलेंडर की प्रमुख विशेषताएँ:

  • वर्ष भर औषधीय पौधों की जानकारी
  • पारंपरिक उपयोग और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का समन्वय
  • जागरूकता और संरक्षण पर विशेष फोकस

“मध्य हर्बल दर्पण”: शोध और नवाचार का मंच

“मध्य हर्बल दर्पण” मासिक पत्रिका को शोध, नवाचार और अनुभव साझा करने का सशक्त मंच बताया गया। इस पत्रिका में वैज्ञानिक लेख, किसान अनुभव, नीति पहल और नवाचार से जुड़े विषयों को शामिल किया गया है। इससे पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समाज तक पहुँचाने में मदद मिलेगी।

प्रशासनिक दृष्टिकोण और नीति समर्थन

प्रमुख सचिव आयुष श्री शोभित जैन ने कहा कि औषधीय पौधों के संरक्षण, सतत खेती और गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विभाग का लक्ष्य है कि आयुष को सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली से जोड़ते हुए ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर सृजित किए जाएँ। इससे स्वास्थ्य और आर्थिक विकास दोनों को समान रूप से लाभ मिलेगा।

क्लस्टर आधारित खेती और किसानों की भागीदारी

अपर सचिव आयुष एवं सीईओ मध्यप्रदेश राज्य औषधीय पादप बोर्ड श्री संजय मिश्र ने बताया कि बोर्ड द्वारा क्लस्टर आधारित खेती, किसान प्रशिक्षण और स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही स्टार्ट-अप सहयोग और बाजार से सीधा जुड़ाव सुनिश्चित करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।

मुख्य पहलें:

  • औषधीय पौधों की संगठित खेती
  • किसान प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन
  • मूल्य संवर्धन और विपणन तंत्र को मजबूत करना

स्वास्थ्य, पर्यावरण और ग्रामीण विकास का संगम

औषधीय पादप क्षेत्र केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास का भी मजबूत माध्यम है। औषधीय पौधों की खेती से हरित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है और प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग सुनिश्चित होता है। यह क्षेत्र जलवायु संतुलन और जैव-विविधता संरक्षण में भी सहायक है।

सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

आयुष और औषधीय पादपों पर आधारित नीतियाँ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए स्रोत खोल रही हैं। जनजातीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान को सम्मान और आर्थिक मूल्य मिल रहा है। इससे सामाजिक सशक्तिकरण के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।

जन प्रतिक्रिया और उम्मीदें

कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों, विशेषज्ञों और कर्मचारियों ने मध्यप्रदेश को आयुष और हर्बल हब के रूप में विकसित करने की साझा प्रतिबद्धता व्यक्त की। आमजन और किसानों में भी इस पहल को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है, क्योंकि इससे स्वास्थ्य और रोजगार दोनों क्षेत्रों में लाभ की उम्मीद है।

विशेषज्ञों की राय और भविष्य की दिशा

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आयुष को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली के साथ प्रभावी ढंग से जोड़ा जाए, तो यह देश के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत कर सकता है। मध्यप्रदेश की पहल अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है। आने वाले समय में शोध, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ाव की संभावनाएँ भी बढ़ेंगी।

8️⃣ CONCLUSION / निष्कर्ष

मध्यप्रदेश आयुष और औषधीय पादप क्षेत्र में एक समग्र और दूरदर्शी नीति के साथ आगे बढ़ रहा है। डेस्क कैलेंडर–2026 और “मध्य हर्बल दर्पण” जैसे प्रयास ज्ञान, जागरूकता और नवाचार को बढ़ावा देंगे। यह पहल न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करेगी, बल्कि ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण और हरित अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देगी। राज्य का यह कदम आयुष आधारित समग्र विकास की ओर एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक संकेत है।