लाड़ली बहना योजना की 34वीं किस्त जारी, महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम
(ब्यूरो कार्यालय)
ग्वालियर (साई)।मध्यप्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई लाड़ली बहना योजना राज्य की सबसे चर्चित और प्रभावी सामाजिक योजनाओं में से एक बन चुकी है। शुक्रवार को ग्वालियर जिले के घाटीगांव में आयोजित राज्य स्तरीय महिला सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने योजना की 34वीं किश्त जारी करते हुए प्रदेश की 1करोड़25लाख से अधिक महिलाओं के खातों में1836करोड़ रुपये की राशि अंतरित की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन के क्षेत्र में देश के लिए एक उदाहरण बन रही हैं। सरकार का लक्ष्य महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता देना ही नहीं, बल्कि उन्हें आर्थिक गतिविधियों और उद्यमिता से जोड़कर सशक्त बनाना है।
लाड़ली बहना योजना से बदल रही महिलाओं की जिंदगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में इस योजना ने प्रदेश की लाखों महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में लाखों महिलाएं अब स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आय अर्जित कर रही हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार:
- प्रदेश में 5लाख से अधिक स्व-सहायता समूह सक्रिय हैं
- लगभग 65लाख महिलाएं इन समूहों से जुड़ी हैं
- राज्य में 12लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं
इन पहलों से महिलाओं को न केवल आर्थिक मजबूती मिली है बल्कि सामाजिक सम्मान और आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
अब हर महीने मिलेंगे 1500 रुपये
सरकार ने हाल ही में लाड़ली बहना योजना के तहत दी जाने वाली मासिक सहायता राशि में बढ़ोतरी की है।
पहले महिलाओं को 1250 रुपये प्रतिमाह मिलते थे, जिसे बढ़ाकर 1500रुपये प्रति माह कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि:
- योजना के तहत अब तक 52हजार करोड़ रुपये से अधिक राशि महिलाओं को दी जा चुकी है।
- जनवरी 2024 से फरवरी 2026 के बीच 42,308करोड़ रुपये सीधे महिलाओं के खातों में भेजे गए हैं।
सरकार का मानना है कि यह राशि महिलाओं को छोटे व्यवसाय, घरेलू उद्योग या अन्य स्वरोजगार गतिविधियों के लिए प्रेरित कर रही है।
ग्वालियर जिले को 122 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात
महिला सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री ने ग्वालियर जिले के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की घोषणा भी की।
उन्होंने 121करोड़95लाख रुपये की लागत वाले54विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन किया।
इनमें शामिल हैं:
- लगभग 60करोड़ रुपये के35विकास कार्यों का भूमि-पूजन
- लगभग 62करोड़ रुपये के19विकास कार्यों का लोकार्पण
- कुलैथ घाटीगांव में शासकीय सांदीपनि विद्यालय भवन का लोकार्पण
इन परियोजनाओं का उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।
सिंचाई परियोजना से किसानों को मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री ने भितरवार विधानसभा क्षेत्र में आरोन-पटई उद्वहन सिंचाई परियोजना को मंजूरी दी।
करीब 120करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना क्षेत्र के किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इस परियोजना के लागू होने से:
- कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी
- सिंचाई की सुविधाएं बेहतर होंगी
- किसानों की आय बढ़ेगी
सरकार का कहना है कि कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सिंचाई परियोजनाओं का विस्तार आवश्यक है।
शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार
सरकार ने ग्वालियर जिले में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की भी घोषणा की।
मुख्य घोषणाएं:
- भितरवार पीएचसी को सिविल अस्पताल में उन्नयन
- घाटीगांव उप स्वास्थ्य केंद्र का उन्नयन
- भितरवार और घाटीगांव में आईटीआई केंद्र की स्थापना
- घाटीगांव,चिनोर और करैया में सांदीपनि विद्यालय
इन संस्थानों के माध्यम से युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और बेहतर शिक्षा के अवसर मिलेंगे।
धार्मिक और सांस्कृतिक विकास पर भी जोर
सरकार ने घाटीगांव क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी कई महत्वपूर्ण योजनाएं घोषित की हैं।
इनमें शामिल हैं:
- शबरी माता मंदिर परिसर का विकास
- भगवान देवनारायण धाम का निर्माण
- सांस्कृतिक कार्यक्रमों का वार्षिक आयोजन
सरकार का मानना है कि धार्मिक पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।
औद्योगिक विकास की दिशा में भी प्रयास
मुख्यमंत्री ने बताया कि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र अब तेजी से औद्योगिक विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि:
- वर्ष 2024 से अब तक 220औद्योगिक इकाइयों के लिए भूमि आवंटित की गई है
- लगभग 12,500करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है
- इससे हजारों युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है
सीतापुर में फुटवियर क्लस्टर और मुरैना में हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र जैसे प्रोजेक्ट भी क्षेत्रीय विकास को गति देंगे।
महिला उद्यमिता को मिल रहा बढ़ावा
सरकार का दावा है कि प्रदेश में महिला उद्यमिता तेजी से बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के47प्रतिशत नए स्टार्टअप का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं।
इसके पीछे सरकार की विभिन्न योजनाएं और वित्तीय सहायता कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सरकार निम्न कदम उठा रही है:
- कौशल विकास कार्यक्रम
- स्वरोजगार योजनाएं
- बैंक ऋण और वित्तीय सहायता
- स्वयं सहायता समूहों को प्रोत्साहन
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में महिलाओं की भूमिका
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि देश को विकसित बनाने के लक्ष्य में महिलाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के बिना विकसित भारत का सपना पूरा नहीं हो सकता।
सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाएं जैसे:
- लाड़ली लक्ष्मी योजना
- लाड़ली बहना योजना
- मुख्यमंत्री कन्यादान योजना
महिलाओं और बेटियों के जीवन स्तर को सुधारने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
जनता और महिलाओं की सकारात्मक प्रतिक्रिया
प्रदेश की कई महिलाओं ने योजना को अपने जीवन में बदलाव का माध्यम बताया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं इस राशि का उपयोग छोटे व्यवसाय, पशुपालन, सिलाई-कढ़ाई और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों में कर रही हैं।
समाजशास्त्रियों का मानना है कि ऐसी योजनाएं महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने में मदद करती हैं, जिससे परिवार और समाज दोनों को लाभ मिलता है।
भविष्य की संभावनाएं
सरकार का संकेत है कि भविष्य में इस योजना को और व्यापक बनाया जा सकता है।
महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं बल्कि रोजगार, प्रशिक्षण और उद्यमिता से जोड़ने की योजना भी बनाई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन योजनाओं को सही तरीके से लागू किया गया तो:
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी
- महिला श्रम भागीदारी बढ़ेगी
- सामाजिक विकास को नई गति मिलेगी
निष्कर्ष
लाड़ली बहना योजना मध्यप्रदेश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभरी है। 34वीं किश्त के रूप में 1836 करोड़ रुपये की राशि का वितरण और ग्वालियर जिले में विकास परियोजनाओं की घोषणा इस बात का संकेत है कि सरकार महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक उत्थान को प्राथमिकता दे रही है।
यदि इस योजना के साथ कौशल विकास, रोजगार और उद्यमिता को भी प्रभावी रूप से जोड़ा गया, तो आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में देश के लिए एक उदाहरण बन सकता है।

हर्ष वर्धन वर्मा का नाम टीकमगढ़ जिले में जाना पहचाना है. पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबे समय तक सक्रिय रहने के बाद एक बार फिर पत्रकारिता में सक्रियता बना रहे हैं हर्ष वर्धन वर्मा . . .
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