(ब्यूरो कार्यालय)
ग्वालियर (साई)। ग्वालियर स्थित जीवाजी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मध्यप्रदेश के राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री मंगुभाई पटेल ने विद्यार्थियों को शिक्षा का वास्तविक अर्थ समझाते हुए कहा कि शिक्षा केवल डिग्री, कौशल और विशेषज्ञता तक सीमित नहीं है। शिक्षा की सार्थकता तब है जब उसका लाभ वंचित और गरीब वर्ग तक पहुँचे।
राज्यपाल ने कहा कि स्वस्थ और सभ्य समाज वही कहलाता है, जिसमें पिछड़े और जरूरतमंद वर्ग के प्रति सहानुभूति और संवेदनशीलता हो। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि सफलता और समृद्धि मिलने पर कभी अहंकार न करें और कठिनाई आने पर निराश न हों।
🏅 दीक्षांत समारोह का आयोजन
सोमवार, 22 सितम्बर 2025 को आयोजित इस भव्य समारोह में शोभा यात्रा के साथ माँ सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
- कुल 89विद्यार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।
- 43विद्यार्थियों को उत्कृष्ट प्रदर्शन पर 61गोल्ड मेडल दिए गए।
- 132विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर उपाधियाँ मिलीं।
राज्यपाल श्री पटेल ने सभी विद्यार्थियों, उनके पालकों और गुरुजनों को शुभकामनाएँ दीं और जीवन पथ पर आगे बढ़ने का संदेश दिया।
✍️ राज्यपाल श्री पटेल का उद्बोधन
राज्यपाल ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल एक उपाधि प्राप्त करने का दिन नहीं है, बल्कि जीवन के नए अध्याय का शुभारंभ है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विद्यार्थी सफलता की ऊँचाइयों पर पहुँचकर भी अपने गुरुजनों और अभिभावकों को याद रखेंगे और समाज तथा राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे।
राज्यपाल ने विशेष रूप से जीवाजी विश्वविद्यालय को NAACसे A++ग्रेड और UGCसे श्रेणी-1विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने पर बधाई दी। उन्होंने विश्वविद्यालय की पहल जैसे –
- ट्रायबल चेयर की स्थापना,
- पाँच जनजातीय गाँवों को गोद लेना,
- सिकल सेल स्वास्थ्य जाँच शिविर,
- औषधि वितरण और जागरूकता अभियान
की सराहना की और इसे शिक्षा की वास्तविक उपयोगिता बताया।
📚 मुख्य अतिथि श्री अवनीश भटनागर का संदेश
समारोह के मुख्य अतिथि एवं विद्या भारती के अखिल भारतीय उपाध्यक्ष श्री अवनीश भटनागर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा –
“आज जो उपाधियाँ और मेडल मिले हैं, वे केवल प्रमाणपत्र नहीं बल्कि जिम्मेदारी का प्रतीक हैं। अब तक आप पुस्तकीय ज्ञान प्राप्त कर चुके हैं, लेकिन असली परीक्षा जीवन ज्ञान की है।”
उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के विचारों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे उन चुनौतियों के समाधान पर कार्य करें जिनका सामना भविष्य में करना होगा।
श्री भटनागर ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी पाना नहीं है, बल्कि राष्ट्र निर्माण और विश्व कल्याण में योगदान देना है।
🎶 विशेष अतिथि और आयोजन की झलक
कार्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरु, अधिकारी, शिक्षाविद, छात्र-छात्राएँ और गणमान्य नागरिक शामिल हुए। मंच पर
- राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे,
- राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला,
- कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री धर्मवीर सिंह
उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन कुलसचिव श्री राकेश कुशवाह ने किया। समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।
🌱 हरित संदेश: पर्यावरण संरक्षण की ओर कदम
दीक्षांत समारोह के अवसर पर राज्यपाल श्री पटेल ने विश्वविद्यालय परिसर में ‘एक पेड़ माँ के नाम’अभियान के अंतर्गत पौधारोपण भी किया। उन्होंने सभी विद्यार्थियों और नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण हेतु वृक्षारोपण करने का आह्वान किया।
🧭 शिक्षा और समाज – आगे की दिशा
जीवाजी विश्वविद्यालय ने न केवल शिक्षा में उत्कृष्टता हासिल की है बल्कि सामाजिक सरोकारों में भी अग्रणी भूमिका निभाई है।
- साइबर अपराधों के खिलाफ जनजागरूकता अभियान की शुरुआत की गई है।
- विश्वविद्यालय ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की पहल कर रहा है।
- ट्रायबल क्षेत्रों में स्वास्थ्य और शिक्षा जागरूकता से समाज का विकास हो रहा है।
इससे यह स्पष्ट होता है कि शिक्षा केवल कक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण समाज परिवर्तन का माध्यम है।
📌 विद्यार्थियों के अनुभव
कई विद्यार्थियों ने अपनी खुशी साझा करते हुए कहा कि यह दिन उनके जीवन का सबसे बड़ा अवसर है।
- सोनल शर्मा (पीएचडी उपाधि प्राप्त): “यह उपलब्धि मेरे परिवार और गुरुजनों के आशीर्वाद से संभव हुई। अब मेरा लक्ष्य समाज सेवा है।”
- अंकित मिश्रा (गोल्ड मेडलिस्ट): “यह सम्मान मुझे और बेहतर कार्य करने की प्रेरणा देगा।”
🔚 निष्कर्ष
जीवाजी विश्वविद्यालय का यह दीक्षांत समारोह केवल उपाधियों का वितरण नहीं बल्कि विद्यार्थियों के जीवन में नई यात्रा की शुरुआत है।
राज्यपाल श्री पटेल का संदेश कि शिक्षा तभी सार्थक है जब उसका लाभ वंचित और गरीब वर्ग तक पहुँचे – आज के समय में अत्यंत प्रासंगिक है। वहीं मुख्य अतिथि श्री भटनागर ने विद्यार्थियों को यह सिखाया कि असली परीक्षा पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर जीवन और समाज की चुनौतियों को स्वीकार करने में है।
यह आयोजन न केवल शिक्षा जगत के लिए बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए एक प्रेरक संदेश बनकर सामने आया है।

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