विकास नीति का आधार बनती जनगणना
(बुद्धसेन शर्मा)
भोपाल (साई)।देश और राज्य की विकास योजनाओं की दिशा तय करने में जनगणना की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। सरकारों के लिए यह केवल जनसंख्या गिनने की प्रक्रिया नहीं बल्कि संसाधनों के सही वितरण, सामाजिक योजनाओं की प्राथमिकता और प्रशासनिक रणनीति तय करने का मजबूत आधार होती है।
हाल ही में डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जनगणना समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने इसे देश के भविष्य की दिशा तय करने वाला व्यापक अभियान बताया।
यह कार्यक्रम भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सम्मेलन में सामने आया, जहां जनगणना 2027 के प्रथम चरण की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा हुई।
डिजिटल जनगणना: ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत
देश में पहली बार डिजिटल माध्यम से जनगणना कराए जाने की तैयारी की जा रही है। इस निर्णय को नरेन्द्र मोदी का बड़ा प्रशासनिक सुधार माना जा रहा है।
डिजिटल जनगणना से कई बड़े बदलाव संभव हैं:
- डेटा संग्रह की गति बढ़ेगी
- त्रुटियों की संभावना कम होगी
- नीति निर्माण में सटीकता आएगी
- ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों का बेहतर रिकॉर्ड बनेगा
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
राज्य स्तर पर तैयारियां तेज
मध्य प्रदेश में जनगणना 2027 को उच्च प्राथमिकता दी जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों को समय सीमा में कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
सम्मेलन में वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए, जिसमें डिजिटल डेटा एंट्री, मैदानी सर्वे और तकनीकी प्रक्रियाओं पर विशेष ध्यान दिया गया।
प्रशासनिक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है जनगणना
जनगणना के आंकड़े सरकार के लिए कई क्षेत्रों में निर्णय लेने का आधार बनते हैं:
- सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर योजना
- स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार
- शिक्षा संस्थानों की योजना
- सामाजिक सुरक्षा योजनाएं
इसके अलावा विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों का निर्धारण भी जनसंख्या आंकड़ों पर आधारित होता है।
दो चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया
जनगणना 2027 को दो चरणों में पूरा किया जाएगा:
पहला चरण: मकान सूचीकरण
- मकानों की स्थिति
- सुविधाएं और परिसंपत्तियां
- ग्रामीण और शहरी ढांचा
दूसरा चरण: जनसंख्या गणना
- आयु
- लिंग
- शिक्षा
- आर्थिक स्थिति
- प्रवास
- भाषा और सामाजिक स्थिति
यह डेटा देश की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का वास्तविक चित्र प्रस्तुत करेगा।
मजरों और टोलों का डेटा: नई प्राथमिकता
इस बार छोटे ग्रामीण क्षेत्रों जैसे मजरों और टोलों को भी जनगणना में शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है।
इससे ग्रामीण विकास योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी। साथ ही ऐसे क्षेत्रों की पहचान हो सकेगी जहां अब तक बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच पाई हैं।
तकनीक और जीआईएस सिस्टम का उपयोग
नई जनगणना प्रक्रिया में जीआईएस तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा।
इससे:
- भौगोलिक डेटा सटीक मिलेगा
- संसाधनों की योजना बेहतर बनेगी
- आपदा प्रबंधन में मदद मिलेगी
सामाजिक और आर्थिक असर
जनगणना का असर समाज के हर वर्ग पर पड़ता है।
संभावित सामाजिक लाभ
- गरीब और वंचित वर्ग की पहचान
- योजनाओं का सही क्रियान्वयन
- शिक्षा और स्वास्थ्य सुधार
आर्थिक लाभ
- रोजगार योजना निर्माण
- उद्योग निवेश योजना
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती
नागरिकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण
विशेषज्ञों का मानना है कि जनगणना केवल सरकारी प्रक्रिया नहीं बल्कि नागरिक जिम्मेदारी भी है।
नागरिकों को:
- सही जानकारी देनी चाहिए
- सर्वे टीम का सहयोग करना चाहिए
- डिजिटल विकल्प का उपयोग करना चाहिए
राजनीतिक और नीति स्तर पर महत्व
जनगणना डेटा नीति निर्माण का आधार होता है।
- बजट आवंटन
- सामाजिक योजनाएं
- क्षेत्रीय विकास
- चुनावी परिसीमन
इन सभी प्रक्रियाओं में जनगणना डेटा का उपयोग किया जाता है।
भविष्य की विकास योजनाओं का आधार
सरकार की कई योजनाएं जनगणना डेटा के आधार पर शुरू होती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार भविष्य में:
- स्मार्ट शहर योजना
- ग्रामीण विकास मॉडल
- डिजिटल प्रशासन
- कृषि सुधार योजनाएं
जनगणना डेटा पर आधारित होंगी।
प्रशिक्षण और प्रशासनिक दक्षता
प्रशासनिक अधिकारियों के लिए जनगणना सबसे बड़ी प्रबंधन परीक्षा मानी जाती है।
यह:
- प्रशासनिक समन्वय
- तकनीकी क्षमता
- मैदानी कार्य दक्षता
को परखने का अवसर होता है।
वैश्विक स्तर पर भारत की जनगणना का महत्व
भारत दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना प्रक्रिया संचालित करता है।
भारत की जनगणना वैश्विक शोध, आर्थिक विश्लेषण और सामाजिक अध्ययन के लिए भी महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करती है।
आने वाले वर्षों में संभावित बदलाव
डिजिटल जनगणना के बाद:
- डेटा रियल टाइम उपलब्ध हो सकता है
- योजनाओं का मूल्यांकन तेजी से होगा
- जनसंख्या ट्रेंड का विश्लेषण आसान होगा
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल जनगणना प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाएगी और योजनाओं की प्रभावशीलता में सुधार करेगी।
इसके साथ ही नागरिक सहभागिता भी बढ़ेगी।
🔹 निष्कर्ष
जनगणना 2027 केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं बल्कि देश और राज्य की भविष्य विकास रणनीति का आधार है। डिजिटल तकनीक के उपयोग से यह प्रक्रिया अधिक सटीक, तेज और प्रभावी बनने जा रही है।
मध्यप्रदेश में शुरू हुई तैयारियां इस बात का संकेत हैं कि आने वाले समय में जनगणना डेटा नीति निर्माण, संसाधन वितरण और सामाजिक विकास की दिशा तय करेगा।
यदि नागरिक और प्रशासन मिलकर इस प्रक्रिया को सफल बनाते हैं तो यह देश के विकास मॉडल को मजबूत आधार प्रदान कर सकता है।

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