(नन्द किशोर)
भोपाल (साई)।प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच को बेहतर बनाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी उद्देश्य से उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने सोमवार को मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के विभिन्न विषयों की गहन समीक्षा की। इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य की स्वास्थ्य अधोसंरचना, चिकित्सकीय मैनपावर, चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता, मेडिकल कॉलेजों के संचालन और टर्शरी केयर सुविधाओं के विस्तार जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाएं तभी सफल होंगी, जब उनका प्रभावी,पारदर्शी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी न हो और आम नागरिकों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं समय पर पहुंचें।
स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर सरकार का फोकस
बैठक के दौरान उप मुख्यमंत्री ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण को लेकर चल रही योजनाओं और प्रस्तावों की बारीकी से समीक्षा की। उन्होंने कहा कि बढ़ती आबादी और बदलती जीवनशैली के कारण स्वास्थ्य सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है, ऐसे में अधोसंरचना और मानव संसाधन दोनों का सशक्त होना बेहद जरूरी है।
स्वास्थ्य संस्थानों के उन्नयन, नए उपकरणों की उपलब्धता और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों को अपनाने पर भी चर्चा की गई। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक जिले और दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना सरकार का लक्ष्य है।
अधोसंरचना विकास और मेडिकल मैनपावर पर जोर
बैठक में अधोसंरचना विकास, चिकित्सकीय सहायक स्टाफ और चिकित्सकों की नियुक्ति से जुड़े प्रस्तावों की गहन समीक्षा की गई। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने इन प्रस्तावों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि मरीजों को समय पर और बेहतर उपचार मिल सके। विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति सुधारने पर जोर दिया गया।
दूरस्थ मेडिकल कॉलेजों में शिक्षण स्टाफ की नियुक्ति
उप मुख्यमंत्री ने रिमोट लोकेशन में स्थित मेडिकल कॉलेजों में शिक्षण स्टाफ की कमी को एक गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि योग्य शिक्षण स्टाफ की अनुपलब्धता से चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने अतिरिक्त इंसेंटिव देने के प्रस्ताव को शीघ्र कैबिनेट अनुमोदन हेतु भेजने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि—
- दूरस्थ क्षेत्रों में कार्य करने वाले शिक्षकों को प्रोत्साहन मिलना चाहिए
- इससे मेडिकल कॉलेजों में स्थायित्व बढ़ेगा
- विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षण और प्रशिक्षण मिल सकेगा
यह कदम भविष्य में चिकित्सा शिक्षा के स्तर को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
अंतर्विभागीय समन्वय पर विशेष निर्देश
बैठक में स्वास्थ्य से जुड़े कई अंतर्विभागीय विषयों पर भी चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर सभी औपचारिकताओं को प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में अक्सर विभागीय प्रक्रियाओं के कारण देरी होती है, जिसे दूर किया जाना आवश्यक है। समयबद्ध निर्णय और बेहतर समन्वय से ही योजनाओं का वास्तविक लाभ जनता तक पहुंच सकता है।
टर्शरी केयर सेवाओं को मजबूत करने की पहल
उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए टर्शरी केयर स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सीएम केयर्स के अंतर्गत टर्शरी केयर स्वास्थ्य सुविधाओं में अत्याधुनिक उपकरणों की उपलब्धता और आवश्यक मैनपावर की नियुक्ति से जुड़े प्रस्तावों को प्राथमिकता से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि—
- गंभीर रोगों के इलाज के लिए प्रदेश में उच्च स्तरीय सुविधाएं जरूरी हैं
- नागरिकों को इलाज के लिए बड़े शहरों या अन्य राज्यों में न जाना पड़े
- हर क्षेत्र में उन्नत चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है
मेडिकल कॉलेजों के संचालन को लेकर अहम निर्देश
बैठक में दमोह, छतरपुर और बुधनी मेडिकल कॉलेजों के संचालन को लेकर भी विस्तार से चर्चा की गई। उप मुख्यमंत्री ने इन मेडिकल कॉलेजों के लिए आवश्यक शिक्षण स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि आगामी शैक्षणिक सत्र में इन कॉलेजों का संचालन शुरू करने के लिए सभी औपचारिकताओं को प्राथमिकता से पूरा किया जाए। इससे न केवल चिकित्सा शिक्षा का विस्तार होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार आएगा।
बजट प्रावधानों के प्रभावी उपयोग पर चर्चा
बैठक में केंद्रीय बजट के प्रावधानों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने विभाग को निर्देश दिए कि उपलब्ध बजटीय संसाधनों का समयबद्ध और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि बजट का सही नियोजन और उपयोग ही योजनाओं की सफलता की कुंजी है। इसके लिए विभाग को ठोस और व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार करनी होगी।
प्रशासनिक दृष्टिकोण और विशेषज्ञों की राय
स्वास्थ्य प्रशासन से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि उप मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए ये निर्देश प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई दिशा दे सकते हैं। अधोसंरचना, मानव संसाधन और शिक्षा पर एक साथ ध्यान देने से दीर्घकालिक सुधार संभव है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि योजनाओं का क्रियान्वयन तय समय-सीमा में और पारदर्शिता के साथ किया जाता है, तो इसका सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा और स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों का भरोसा और मजबूत होगा।
जनहित और सामाजिक प्रभाव
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का सीधा असर समाज के हर वर्ग पर पड़ता है। बेहतर अस्पताल, प्रशिक्षित डॉक्टर और आधुनिक सुविधाएं न केवल रोगियों की जान बचाती हैं, बल्कि परिवारों पर आर्थिक बोझ भी कम करती हैं।
सरकार की इस पहल से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है, जहां अब तक उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाओं की कमी रही है।
भविष्य की संभावनाएं
उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल द्वारा की गई यह समीक्षा बैठक आने वाले समय में स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े सुधारों का आधार बन सकती है। मेडिकल कॉलेजों का सुदृढ़ संचालन, टर्शरी केयर सुविधाओं का विस्तार और मानव संसाधन की उपलब्धता प्रदेश को स्वास्थ्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
यदि योजनाएं तय समय पर धरातल पर उतरती हैं, तो प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था देश के अन्य राज्यों के लिए उदाहरण बन सकती है।
8️⃣ Conclusion / निष्कर्ष
स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण को लेकर उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल की समीक्षा बैठक ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार इस क्षेत्र में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं चाहती। प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध क्रियान्वयन के साथ अधोसंरचना, मैनपावर और चिकित्सा शिक्षा पर दिया गया जोर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने में निर्णायक साबित हो सकता है। यह पहल न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि आम नागरिकों के बेहतर और सुरक्षित भविष्य की दिशा में एक ठोस कदम भी है।

आकाश कुमार ने नई दिल्ली में एक ख्यातिलब्ध मास कम्यूनिकेशन इंस्टीट्यूट से मास्टर्स की डिग्री लेने के बाद देश की आर्थिक राजधानी में हाथ आजमाने की सोची. लगभग 15 सालों से आकाश पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं और समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के मुंबई ब्यूरो के रूप में लगातार काम कर रहे हैं.
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