चिकित्सक पीड़ित मानवता के सच्चे सेवक: राज्यपाल पटेल ने बीएमएचआरसी में चौथे इंटरनेशनल स्कूल ऑन रेडिएशन रिसर्च का किया शुभारंभ

भोपाल में आयोजित चौथे इंटरनेशनल स्कूल ऑन रेडिएशन रिसर्च का राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने शुभारंभ किया। उन्होंने चिकित्सकों को पीड़ित मानवता का सच्चा सेवक बताते हुए करुणा और आत्मीय व्यवहार पर जोर दिया। दो दिवसीय आयोजन में देश-विदेश के वैज्ञानिकों ने रेडिएशन रिसर्च और आधुनिक उपचार विधियों पर मंथन किया।

(नन्द किशोर)

भोपाल (साई)। भोपाल। चिकित्सा और विज्ञान के संगम का एक महत्वपूर्ण क्षण उस समय सामने आया, जब राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केन्द्र (बीएमएचआरसी) में आयोजित चौथे इंटरनेशनल स्कूल ऑन रेडिएशन रिसर्च का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने चिकित्सकों की भूमिका को अत्यंत संवेदनशील और मानवीय बताते हुए कहा कि चिकित्सक पीड़ित मानवता के सच्चे सेवक होते हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि रोगियों के लिए चिकित्सक ईश्वर के समान होते हैं और उनका व्यवहार उपचार की सफलता में निर्णायक भूमिका निभाता है।

यह आयोजन केवल वैज्ञानिक चर्चा का मंच नहीं, बल्कि मानव कल्याण, करुणा और उत्तरदायित्व से जुड़े चिकित्सा विज्ञान के मूल्यों को सुदृढ़ करने का प्रयास भी है। दो दिनों तक चलने वाले इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में देश-विदेश के प्रख्यात वैज्ञानिक, चिकित्सक, शोधकर्ता और विद्यार्थी एकत्र हुए हैं।

पृष्ठभूमि / Background

बीएमएचआरसी भोपाल देश के उन चुनिंदा चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थानों में से एक है, जो रेडिएशन से जुड़े रोगों, उनके उपचार और दीर्घकालिक अनुसंधान में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। समय के साथ रेडिएशन आधारित चिकित्सा पद्धतियां अधिक सटीक, सुरक्षित और प्रभावी होती जा रही हैं। इन्हीं परिवर्तनों और नई वैज्ञानिक उपलब्धियों को साझा करने के उद्देश्य से इंटरनेशनल स्कूल ऑन रेडिएशन रिसर्च का आयोजन किया जाता है।

चौथे संस्करण का यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है, जब वैश्विक स्तर पर कैंसर, आनुवंशिक विकार और रेडिएशन से संबंधित बीमारियों के उपचार में नई तकनीकों की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। इस पृष्ठभूमि में यह सम्मेलन चिकित्सा विज्ञान के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

वर्तमान स्थिति / Latest Developments

गुरुवार, 18 दिसंबर 2025 को आयोजित उद्घाटन सत्र में राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि दीन-दुखियों की सेवा ही ईश्वर की सच्ची सेवा है। उन्होंने चिकित्सकों से अपील की कि वे मरीजों के साथ आत्मीयता, सरलता और धैर्य का व्यवहार रखें।

राज्यपाल ने कहा कि:

  • चिकित्सक का व्यवहार मरीज के मनोविज्ञान को प्रभावित करता है
  • आत्मीय संवाद उपचार की प्रक्रिया को मजबूत बनाता है
  • करुणा और विज्ञान का मेल ही श्रेष्ठ चिकित्सा है

उन्होंने बीएमएचआरसी की साइटोजेनेटिक प्रयोगशाला को इंडियन बायोडोसिमीट्री नेटवर्क की छह प्रयोगशालाओं में चयनित होने पर बधाई भी दी।

विज्ञान और मानवता का संगम

राज्यपाल श्री पटेल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब विज्ञान करुणा, उत्तरदायित्व और मानव कल्याण के उद्देश्य से जुड़ता है, तब वह केवल रोगों का उपचार नहीं करता, बल्कि जीवन की गुणवत्ता को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि यह सम्मेलन:

  • वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ावा देगा
  • ज्ञान-साझेदारी को सुदृढ़ करेगा
  • दीर्घकालिक अनुसंधान भागीदारी के अवसर पैदा करेगा

सम्मेलन के प्रमुख विषय

दो दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में कई महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया जा रहा है, जिनमें शामिल हैं:

  • डीएनए रिपेयर तंत्र और आनुवंशिक परिवर्तन
  • रेडिएशन के जैविक प्रभाव
  • बायोमार्कर्स का वैज्ञानिक उपयोग
  • रेडियोथेरेपी की उन्नत तकनीकें
  • रेडिएशन आधारित नवीन उपचार विधियां

राज्यपाल ने कहा कि इस तरह की वैज्ञानिक चर्चाएं सिकल सेल एनीमिया जैसे वंशानुगत रोगों से मानवता को मुक्त करने की दिशा में आशा की किरण हैं।

वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के विचार

कार्यक्रम में सोसायटी ऑफ रेडिएशन रिसर्च के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. के.पी. मिश्रा ने न्यूक्लियर साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में हो रहे नवीन अनुसंधानों पर प्रकाश डाला। वहीं, भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर से जुड़े डॉ. अमित कुमार ने विकिरण विज्ञान और रेडियोलॉजी के मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव, संभावनाओं और चुनौतियों को विस्तार से समझाया।

विशेषज्ञों का मानना है कि रेडिएशन रिसर्च में अंतरराष्ट्रीय सहयोग भविष्य में अधिक सटीक और सुरक्षित उपचार पद्धतियों का मार्ग प्रशस्त करेगा।

प्रशासनिक और शैक्षणिक प्रभाव

इस आयोजन का प्रभाव केवल चिकित्सा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रशासनिक और शैक्षणिक महत्व भी है।

प्रशासनिक स्तर पर:

  • चिकित्सा अनुसंधान को प्रोत्साहन
  • संस्थानों के बीच समन्वय मजबूत
  • वैज्ञानिक उपलब्धियों का नीति निर्माण में उपयोग

शैक्षणिक स्तर पर:

  • युवा वैज्ञानिकों को अंतरराष्ट्रीय मंच
  • शोधकर्ताओं के लिए नई दिशा
  • विद्यार्थियों को नवीन ज्ञान से परिचय

आम जनता पर असर

यद्यपि यह सम्मेलन वैज्ञानिक प्रकृति का है, लेकिन इसके दूरगामी लाभ आम जनता तक पहुंचने वाले हैं। रेडिएशन आधारित उपचारों में सुधार से:

  • कैंसर रोगियों को बेहतर उपचार
  • उपचार की लागत और जोखिम में कमी
  • स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में वृद्धि

राज्यपाल ने कहा कि अनुसंधान का अंतिम उद्देश्य आम नागरिक के जीवन को सुरक्षित और स्वस्थ बनाना होना चाहिए।

युवा वैज्ञानिकों के लिए संदेश

राज्यपाल श्री पटेल ने विशेष रूप से युवा वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं से आह्वान किया कि वे:

  • नवीनतम वैज्ञानिक उपलब्धियों से जुड़ें
  • अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों से खुलकर संवाद करें
  • अनुसंधान को सीमाओं से परे ले जाएं

उन्होंने कहा कि युवा वैज्ञानिक ही चिकित्सा विज्ञान के भविष्य के वाहक हैं।

भविष्य की संभावनाएं / आगे क्या?

इस सम्मेलन से निकलने वाले निष्कर्ष आने वाले वर्षों में चिकित्सा विज्ञान की दिशा तय कर सकते हैं। संभावनाएं यह संकेत देती हैं कि:

  • रेडिएशन थेरेपी अधिक सटीक होगी
  • आनुवंशिक रोगों के उपचार में नई राह खुलेगी
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त अनुसंधान बढ़ेगा

बीएमएचआरसी जैसे संस्थान इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाते रहेंगे।

आयोजन की अन्य झलकियां

कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल श्री पटेल ने कैलेंडर और पुस्तिका का लोकार्पण भी किया। बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक डॉ. मनीषा श्रीवास्तव ने आयोजन की विस्तृत जानकारी देते हुए देश-विदेश से आए वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की भूमिका पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में प्रभारी चिकित्सक डॉ. अनुराग यादव सहित अनेक वैज्ञानिक, चिकित्सक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

निष्कर्ष / Conclusion

बीएमएचआरसी भोपाल में आयोजित चौथा इंटरनेशनल स्कूल ऑन रेडिएशन रिसर्च चिकित्सा विज्ञान, मानवता और करुणा के संगम का प्रतीक बनकर सामने आया है। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल का यह संदेश कि चिकित्सक पीड़ित मानवता के सच्चे सेवक हैं, इस पूरे आयोजन की आत्मा को दर्शाता है। वैज्ञानिक अनुसंधान, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मानवीय मूल्यों के साथ जुड़ा यह प्रयास भविष्य में चिकित्सा क्षेत्र को अधिक सुरक्षित, प्रभावी और जनकल्याणकारी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।