चाहे जितनी जल्दी हो, सड़क सुरक्षा नियमों का पालन अवश्य करें : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जीवन की कीमत अनमोल है, इसलिए सड़क पर चलते समय सुरक्षा नियमों की अनदेखी बिल्कुल न करें। उन्होंने हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने और “संजय” एप के शुभारंभ सहित कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। राज्य स्तरीय कार्यशाला में सड़क सुरक्षा प्रबंधन व अवसंरचनात्मक सुधारों पर चर्चा हुई।

(बुद्धसेन शर्मा)

भोपाल (साई)।सड़क हमारा जीवन का मार्ग है, लेकिन यदि हम उस मार्ग पर सुरक्षा नियमों को दरकिनार करें, तो वही मार्ग काल बन सकता है। इस विचार के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में आयोजित एक दिवसीय राज्य स्तरीय सड़क सुरक्षा कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन अनमोल है, और इसे जोखिम में रखना हर नागरिक की भूल होगी।

उन्होंने कहा कि चाहे कितनी भी जल्दी हो, सड़क पर चलते समय सुरक्षा नियमों का पालन करना हमारा प्राथमिक कर्तव्य है। तेज़ी, लापरवाही या नियमों की अनदेखी हमें महंगे पड़ेगी।

🚦 मुख्य अंश और घोषणाएँ

1. हेलमेट और सीट बेल्ट अनिवार्य

डॉ. यादव ने विशेष जोर दिया कि दोपहिया वाहन चालकों को हेलमेट पहनना चाहिए और चार-पहिया वाहन चालकों व यात्रियों को सीट बेल्ट लगाना अनिवार्य है। ये नियम सिर्फ कानून की याचिका नहीं, बल्कि स्वयं और दूसरों की जान की रक्षा का माध्यम हैं।

“हेलमेट नहीं पहनना, सीट बेल्ट नहीं लगाना नियम तोड़ना नहीं, जीवन से खिलवाड़ है।”

2. “संजय” एप का शुभारंभ

कार्यशाला के दौरान मुख्यमंत्री ने एडवांस एप्लीकेशन “संजय” का शुभारंभ किया। यह एप सड़क सुरक्षा उपायों, दुर्घटना सूचना, ब्लैक स्पॉट अलर्ट तथा मरम्मत और आपदा – अड़चन संबंधी जानकारी साझा करने का प्लेटफ़ॉर्म बनेगा।

3. एमओयू पर हस्ताक्षर – डीडीएचआई एवं सड़क सुरक्षा प्रबंधन

कार्यशाला में लोक निर्माण विभाग और मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम लिमिटेड (एमपीआरडीसी) ने आईआईटी मद्रास और सेव लाइफ फाउंडेशन के साथ डीडीएचआई और सड़क सुरक्षा प्रबंधन पर दो अलग-अलग एमओयू हस्ताक्षरित किए। इससे तकनीकी सहयोग, डेटा साझा करना एवं रोड सेफ्टी योजनाओं का कार्यान्वयन बेहतर होगा।

4. पुस्तक एवं रिपोर्ट विमोचन

मुख्यमंत्री ने आईआईटी मद्रास द्वारा तैयार “सड़क सुरक्षा शिक्षा प्रणाली”पुस्तक एवं सड़क सुरक्षा रिपोर्ट का भी विमोचन किया। इस पुस्तक में छात्र, वाहन चालक एवं आम नागरिकों के लिए सम्पूर्ण मार्गदर्शिका होगी। रिपोर्ट में प्रदेश के दुर्घटना आंकड़ों, ब्लैक स्पॉट विश्लेषण और सुधारात्मक सुझाव प्रस्तुत किए गए हैं।

🧩 सड़क सुरक्षा की चुनौतियाँ एवं सरकार का दृष्टिकोण

अ. बड़ी सड़क धोखाधड़ी

मध्यप्रदेश में अब तक 9,000 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग और लगभग 11,000 किलोमीटर राज्य मार्ग नेटवर्क है। इस विशाल नेटवर्क पर पर्याप्त सुरक्षा उपाय तथा निगरानी प्रणाली आवश्यक है।

ब. दुर्घटनाओं के कारण

अधिकांश दुर्घटनाएं मानव त्रुटियों (गति, लापरवाही, अपर्याप्त संकेत) के कारण होती हैं। लगभग 3 % दुर्घटनाएं अवसंरचनात्मक दोष — साइन बोर्ड की कमी, खराब डिज़ाइन, मोड़ व दृश्य सीमाएँ — के कारण होती हैं।

स. विभागीय समन्वय और डेटा साझा करना

मोटर वाहन, स्वास्थ्य, पुलिस, लोक निर्माण व सड़क विकास विभागों के बीच डेटा साझा करना ज़रूरी है। इस साझा डेटा द्वारा ब्लैक स्पॉट की पहचान, निगरानी और त्वरित सुधार संभव होगा।

द. जनता की भागीदारी

सरकार अकेले पर्याप्त नहीं है। नागरिकों में सड़क सुरक्षा जागरूकता, नियमों का पालन, और अनुशासित व्यवहार विकसित करना आवश्यक है। यदि हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझे, तो दुर्घटनाओं की संख्या में गंभीर कमी आ सकती है।

🏛️ कार्यशाला की रूपरेखा और आयोजन

  • दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई।
  • प्रदर्शनी में सड़क सुरक्षा उपकरण, सूचना मॉडल, बीहड़ ब्लैक स्पॉट व सुधारात्मक उपकरणों का प्रदर्शन किया गया।
  • विभागों (लोक निर्माण, परिवहन, स्वास्थ्य, यातायात) ने अधिकृत स्टॉल लगाये जिसमें तकनीकी नवाचार और योजनाएँ प्रदर्शित हुईं।
  • कार्यक्रम में लगभग 3000प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया — कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला सड़क सुरक्षा समिति सदस्य, जनप्रतिनिधि एवं नागरिक।
  • सचिव परिवहन, लोक निर्माण, पुलिस एवं अन्य विभागों द्वारा अपने अनुभव और योजनाएँ साझा की गईं।

📊 आंकड़े और योजनाएँ

  • प्रदेश में 1041ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जिनमें से अधिकांश पर लघु सुधार कार्य कर दिए गए हैं, और दीर्घकालिक उपाय 2027–2028 तक पूरे किए जाएंगे।
  • सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश में दुर्घटना-रहित मार्ग व्यवस्था स्थापित करना।
  • सड़क सुरक्षा के पांच स्तंभ — Engineering, Enforcement, Education, Emergency Responseएवं Insurance — संयुक्त प्रयास से लागू किए जाएंगे।
  • इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम के अंतर्गत दुर्घटना सूचना तुरंत अस्पताल तक पहुँचेगी, और प्रारंभिक उपचार के लिए 5 लाख रुपये तक की सुविधा होगी।

🌐 विशेषज्ञ दृष्टिकोण

आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर वेंकटेश बालासुब्रमण्यम ने कहा कि सड़क सुरक्षा सिर्फ तकनीकी पहल नहीं है, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी है। उन्होंने यह सुझाव दिया कि बेहतर डेटा आकलन, ब्लैक स्पॉट मैनेंजमेंट, संकेत–संचार, सड़क ज्यामिति सुधार और विभागीय समन्वय से दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

उन्होंने कहा,

“जहाँ अधिकांश दुर्घटनाएँ मानव भूलों से होती हैं, वहीं सच्ची चुनौती है कि उन भूलों को न्यूनतम करना।”

🚀 सरकारी दृष्टिकोण एवं भविष्य की दिशा

लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि सड़कें प्रदेश की रीढ़ हैं, और उन्हें सुरक्षित बनाना विकास की जरूरत है।
उन्होंने बताया कि लोकपथ ऐप विकसित किया गया है, जिसका उपयोग सड़क क्षति या दुर्घटना सूचना तुरंत संबंधित विभागों तक पहुँचाने में होगा। इस ऐप में ब्लैक स्पॉट चेतावनियाँ, नजदीकी रिपेयर स्टेशन, पेट्रोल पंप आदि की जानकारी मिलेगी।

मुख्य सचिव अनुराग जैन ने बताया कि देश की लगभग 53 % दुर्घटनाएं दोपहिया वाहनों से होती हैं। यदि हेलमेट का सही उपयोग हो, तो 60 % जानें बचाई जा सकती हैं। उन्होंने पांच स्तंभों पर आधारित रोड सेफ्टी मॉडल की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

🔚 निष्कर्ष

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यही संदेश हमें यह याद दिलाता है कि जीवन अनमोल है, और इसे संरक्षित रखना हमारा साझा दायित्व है। चाहे जितनी जल्दी हो, सड़क सुरक्षा नियमों का पालन अवश्य करें — हेलमेट पहनें, सीट बेल्ट लगाएँ, गति सीमाओं का सम्मान करें।

“संजय” एप, विभागीय एमओयू, ब्लैक स्पॉट सुधार, और जागरूकता कार्यशालाएँ इस दिशा में मजबूत कदम हैं। यदि सरकार, प्रशासन और जनता मिलकर काम करें, तो मध्यप्रदेश को दुर्घटना-मुक्त राज्य बनाने का सपना साकार हो सकता है।

आज से ही एक ज़िम्मेदार नागरिक बनिए — सड़क नहीं, अपनी और दूसरों की ज़िंदगी को प्राथमिकता दीजिए।