छिंदवाड़ा कफ सिरप मौत पर IMA का गुस्सा: डॉक्टर गिरफ्तार, हड़ताल की चेतावनी

छिंदवाड़ा में कफ सिरप (Coldrif) सेवन के बाद दस से अधिक बच्चों की मौत के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने सख्त कार्रवाई शुरू की है। एक सरकारी चिकित्सक को गिरफ्तारी, अधिकारियों का तबादला-निलंबन और दवा कंपनियों व नियामक एजेंसियों पर दबाव के बीच आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) ने सरकार की आलोचना की है और मंगलवार से डॉक्टरों की हड़ताल की चेतावनी दी है।

डॉक्टर की गिरफ्तारी पर आईएमए के गुस्सा सातवें आसमान पर . . .

अपनी गलतियों का ठीकरा चिकित्सकों पर न फोड़े मध्य प्रदेश सरकार: आईएमए नेशनल प्रेसीडेंट

मंगलवार से आईएमए के सदस्य चिकित्सक रहेंगे अवकाश पर : आईएमए स्टेट प्रेसीडेंट

(बुद्धसेन शर्मा)

भोपाल (साई)। जीवन रक्षक औषधियां ही अगर जीवन भक्षक बन जाएं तो बीमार कहां जाएंगे! प्रदेश के छिंदवाड़ा में कफ सीरप के सेवन के बाद दस से ज्यादा बच्चों की मौत के मामले में परासिया के एक सरकारी चिकित्सक को गिरफ्तार करने पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन भड़का हुआ नजर आ रहा है। आईएमए ने मंगलवार से हड़ताल पर जाने की चेतावनी भी दे दी है।

वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि छिंदवाड़ा प्रकरण में सभी दोषियों के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सजग और संवेदनशील है तथा मानव जीवन की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।

सर्वोच्च न्यायालय की गाईड लाईन का उल्लंघन कर रही एमपी की सरकार

इस संबंध में आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिलीप भुनशाली से जब बात की गई तो समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा चिकित्सा के दौरान चिकित्सकों की कथित लापरवाही के मामलों में स्पष्ट व्यवस्था दी है कि जब तक जांच पूरी न हो जाए तब तक चिकित्सक को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता, पर छिंदवाड़ा में तो एक सरकारी चिकित्सक को न केवल रात ढाई बजे गिरफ्तार किया गया है, वरन वे अभी जेल में हैं।

आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिलीप भुनशाली ने कहा कि इस तरह की नादिरशाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। देखा जाए तो दवा को बाजार में बिकने के लिए केंद्र सरकार के केंद्रीय औषधी मानक नियंत्रण प्राधिकारण से दवा को पास कराया जाकर भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) से पारित करवाकर राज्यों के राज्य औषधि नियंत्रण प्राधिकरण की अनुमति की आवश्यकता होती है। स्थानीय स्तर पर दवा निरीक्षक (डीआई) की जवाबदेही होती है कि वे इस पर नजर रखें। समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान डॉ. भुनशाली ने कहा कि मोटी पगार लेने वाले सरकारी नुमाईंदों की लापरवाही पर पर्दा डालने के लिए मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा एक चिकित्सक को सलाखों के पीछे भेज दिया गया है।

मंगलवार से चिकित्सक हड़ताल पर!

वहीं, दूसरी और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के मध्य प्रदेश के अध्यक्ष डॉ. बीएम शरणागत ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि जो भी हुआ है वह गलत हुआ है। बच्चों के निधन से चिकित्सक बुरी तरह आहत हैं। कोई भी चिकित्सक किसी भी मरीज की जान से खिलवाड़ कतई नहीं करता है। डॉ. शरणागत ने भी कहा कि ऑनरेबल सुप्रीम कोर्ट के निर्देश हैं कि बिना इंवेस्टीगेशन के किसी भी चिकित्सक को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। अगर इस तरह की परिस्थितियां बनती हैं तो चिकित्सक और मरीज के बीच विश्वास का रिश्ता ही समाप्त हो जाएगा। किसी भी सीरियस पेशेंट को देखने के पहले चिकित्सक सौ बार सोचेगा।

उन्होंने बताया कि वे छिंदवाड़ा में हैं और उन्हें छिंदवाड़ा इकाई ने बताया कि उनका ज्ञापन लेने से कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने इंकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने छिंदवाड़ा इकाई को निर्देश दिया है कि मंगलवार से उसके सदस्य हड़ताल पर चले जाएं और संपूर्ण मध्य प्रदेश्श में आईएमए के सदस्य मंगलवार से हड़ताल पर रहेंगे।

1. घटना का पृष्ठभूमि

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में एक दुखद स्वास्थ्य संकट सामने आया है। कुछ समय पूर्व Coldrif कफ सिरप पीने के बाद कई छोटे बच्चों की हालत गंभीर हो गई और कुछ की मृत्यु हो गई। प्रारंभिक जांच रिपोर्टों में यह संकेत मिला कि उक्त सिरप में जहरीले पदार्थ मौजूद हो सकते हैं, जो गुर्दे (kidney) क्षति एवं गहरों संकट का कारण बने।

इस घटना ने सार्वजनिक स्वास्थ्य, दवा नियंत्रण प्रणाली और चिकित्सकीय नैतिकता पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है।

1.1 कब शुरू हुआ पहला मामला?

  • बताया गया है कि पहला मृतक 2 सितंबर 2025 को था — चार वर्षीय शिवम नामक बालक।
  • इसके बाद अन्य कई बच्चों ने चोटी खांसी, वायरल लक्षण और पेशाब कम होना जैसे लक्षण दिखाए।
  • स्वास्थ्य अधिकारियों ने धीरे-धीरे यह संदेह किया कि यह एक सामान्य वायरल संक्रमण नहीं, बल्कि दुर्भावित दवा के सेवन से उत्पन्न विषाक्त प्रतिक्रिया हो सकती है।

1.2 मौतों की संख्या और प्रभावित जिले

  • प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, छिंदवाड़ा में लगभग 14 बच्चों की मौत हुई है।
  • साथ ही, राजस्थान के कुछ जिलों में भी ऐसी ही घटनाएं देखी गई हैं और मौतों का सिलसिला वहां भी जारी बताया गया है।
  • बच्चों की उम्र सामान्यतः 4 वर्ष या उससे कम थी — जो सबसे कमजोर आयु वर्ग मानी जाती है।

2. सरकार और स्वास्थ्य विभाग की प्रतिक्रिया

घटना प्रकाश में आने के बाद, मध्य प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने त्वरित कदम उठाने की कोशिश की है।

2.1 उच्चस्तरीय बैठक और जिम्मेदारी तय करना

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय बैठक बुलाई और कहा कि दोषियों को नहीं बख्शा जाएगा।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि:

  • Coldrif सिरप की बिक्री पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए और दुकानों में उपलब्ध स्टॉक जप्त किया जाए।
  • प्रभावित परिवारों के घर-घर सर्वे कर दवाईयों को रिकवर किया जाए।
  • अन्य दवाओं की प्रभावशीलता और सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु समीक्षा की जाए।
  • यह जाँचना कि दवाइयों पर सावधानी एवं चेतावनी लिखी जा रही हैं या नहीं। उन पर उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की जाए।
  • चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों को कॉम्बिनेशन ड्रग न दी जाए तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले डॉक्टर पर कार्रवाई हो।

2.2 अधिकारियों का निलंबन और स्थानांतरण

जिम्मेदारी तय करने की एक कड़ी कार्रवाई के रूप में:

  • औषधि निरीक्षक गौरव शर्मा (छिंदवाड़ा) और शरद कुमार जैन (जबलपुर) को निलंबित किया गया।
  • उप संचालक खाद्य एवं औषधि प्रशासन शोभित कोस्टा को निलंबित कर दिया गया।
  • राज्य ड्रग कंट्रोलर दिनेश मौर्य को अन्यत्र स्थानांतरित किया गया।

2.3 विशेष जांच दल (SIT) एवं जाँच प्रक्रिया

सरकार ने इस प्रकरण की निष्पक्ष और गहन जांच हेतु विशेष जांच दल (SIT) बनाया।

  • प्रभावित बच्चों के नमूने पुणे स्थित प्रयोगशाला और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी आदि ले गए गए।
  • विभिन्न दवाओं के सैंपल लिए गए और उनकी टेस्टिंग कराई गई।
  • अन्य राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों जैसे CDSCO (Central Drugs Standard Control Organization) और NCDC को भी इसमें जोड़ा गया।

2.4 प्रतिबंध और सुरक्षा कदम

  • Coldrif सिरप की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित कर दी गई है।
  • अन्य संबंधित दवाओं के निर्माण और वितरण पर भी निगरानी कड़ी कर दी गई।
  • दुष्प्रभाव चेतावनी अनुपालन की जांच शुरू की गई।

3. डॉक्टर की गिरफ्तारी, IMA का प्रतिरोध

घटना की गंभीरता बढ़ने के साथ ही एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब स्थानीय चिकित्सक डॉ. प्रवीण सोनी को इस मामले में गिरफ्तार किया गया।

3.1 डॉक्टर पर आरोप एवं FIR

  • आरोप है कि उन्होंने छोटे बच्चों को Coldrif सिरप निर्दिष्ट किया, जो विषैले पाए गए हैं।
  • पोलिस ने डॉक्टर, दवा निर्माता और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों पर FIR दर्ज की है।
  • पर्चों और मेडिकल रिकॉर्ड्स में ये दावा किया गया कि डॉक्टर ने उचित जांच नहीं की, जिससे बच्चों की हालत खतरनाक हो गई।

3.2 IMA का विरोध और बयान

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी है:

  • IMA के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिलीप भुनशाली ने कहा कि डॉक्टर को बिना जांच और निष्पक्ष प्रक्रिया के गिरफ्तार करना गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि वास्तविक जिम्मेदारी दवा निर्माता एवं नियामक एजेंसियों की है।
  • IMA ने मांग की है कि डॉक्टर को तुरंत रिहा किया जाए और घटना की निष्पक्ष जांच हो।
  • मध्य प्रदेश IMA इकाई ने मंगलवार से डॉक्टरों की हड़ताल की चेतावनी दी है।
  • IMA ने यह भी सवाल उठाया कि दवा कंपनी को क्लीन चिट कैसे दी गई, जबकि उनके सिरप में विषैले पदार्थ पाए गए।

4. विषाक्त पदार्थ व पूर्व गलती के इतिहास

इस प्रकार की घटनाएँ नई नहीं हैं; पहले भी अन्य देशों में कफ सिरप विषाकरण से बच्चों की मौतें हुई हैं।

4.1 Gambia कफ सिरप कांड

2022 में Gambia में चार ऐसी सिरपों के सेवन से लगभग 70 बच्चे मरे थे। इन सिरपों में डीइथिलीन ग्लाइकोल (DEG) नामक विषाक्त इंडस्ट्रियल रसायन पाया गया था।

यह घटना विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की चेतावनी और दवा सुरक्षा समीक्षा का विषय बनी थी।

4.2 DEG – विकृत रसायन का भय

  • Diethylene Glycol (DEG) एक उद्योगिक पदार्थ है, न कि चिकित्सा उपयोगी घटक।
  • यदि यह दवाओं में मिल जाए तो गुर्दे पर प्रतिकूल असर, मूत्र कम होना, शरीर में विषाक्तता और मृत्यु हो सकती है।
  • आमतौर पर यह मिलावट होती है ताकि लागत कम हो — लेकिन यह अत्यंत खतरनाक साबित हो सकती है।

उपरोक्त मामलों से यह स्पष्ट है कि यदि दवा नियंत्रण एवं गुणवत्ता जांच प्रणाली में लापरवाही हो, तो उसका परिणाम साधारण इलाज भी जानलेवा बन सकता है।

5. प्रभावित परिवारों और सामाजिक प्रभाव

इस त्रासदी ने न केवल बच्चों की जान ली, बल्कि उन परिवारों की दुनिया तबाह कर दी:

  • परिजनों ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है और न्याय की आस जता रहे हैं।
  • इस घटना ने डॉक्टरों और जनता के बीच विश्वास संकट उत्पन्न कर दिया है—क्या मरीज सुरक्षित दवाएँ प्राप्त कर पा रहे हैं?
  • हड़ताल की धमकी से चिकित्सा सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं—विशेषतः ग्रामीण क्षेत्रों में।
  • मीडिया और सामाजिक संस्थाएँ इस मामले में नियमित चेतावनी और निगरानी की पुकार लगा रही हैं।

6. चुनौतियाँ और समीक्षा

इस पूरे प्रकरण में कई जटिलताएँ सामने आई हैं:

6.1 प्रशासनिक देरी और सूचना का अभाव

  • स्थानीय स्तर पर शुरुआत में सही पहचान नहीं हो पाई।
  • पोस्टमॉर्टम एवं विष विष्लेषण में विलंब रहा, जिससे समय रहते निष्कर्ष पर पहुँचना मुश्किल हुआ।

6.2 दवा निरीक्षण प्रणाली की कमजोरी

  • दवा निरीक्षकों की संख्या, संसाधन और तकनीकी क्षमता सीमित हो सकती है।
  • दवाओं की नियमित सैंपलिंग और अचानक छापेमारी की प्रणाली अक्सर अधूरी रही है।
  • जब दवा कंपनियों का दबाव और लॉबी मजबूत होती है, तो नियामक कार्रवाई कमजोर पड़ सकती है।

6.3 चिकित्सकीय दायित्व बनाम दवा सुरक्षा

  • कभी-कभी डॉक्टर पर दबाव होता है कि वह उपलब्ध दवाएँ ही लिखे, और वे दवाएँ ही प्रतिबंधित या दोषयुक्त निकलें।
  • डॉक्टरों पर कार्रवाई करते समय यह सवाल उठता है कि उन्हें दवा की शुद्धता जाँचना चाहिए था या नहीं?
  • इस प्रकार, दोषारोपण करते समय सटीक प्रमाण एवं दृष्टिकोण बहुत महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

7. आगे की कार्रवाई एवं सुझाव

यह त्रासदी एक चेतावनी है कि स्वास्थ्य प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है। निम्न कदम उठाये जाने चाहिए:

  1. स्वतंत्र राज्‍य और राष्ट्रीय जांच आयोग गठित हो, जिसमें न्यायालयीन शक्तियाँ हों।
  2. दवा निरीक्षण तंत्र को सुदृढ़ किया जाए – अधिक संसाधन, लैब विस्तार और मोबाइल जांच दल।
  3. निर्माता कंपनियों की नियमित ऑडिट और गुणवत्ता परीक्षण अनिवार्य हों।
  4. डॉ. भर्ती एवं निलंबन कानून यह स्पष्ट करें कि बिना निष्पक्ष जाँच डॉक्टर को गिरफ्तार नहीं किया जाए।
  5. आशा-ऊषा, स्वास्थ्य कार्यकर्ता और सामुदायिक जागरूकता अभियान — दवाओं की सुरक्षा और उपयोग पर लोगों को शिक्षित करें।
  6. दुष्प्रभाव रिपोर्टिंग प्रणाली को और मजबूत करें — चिकित्सक, फार्मासिस्ट और जनता इस प्रणाली में भाग लें।
  7. न्याय एवं मुआवजा नीति — प्रभावित परिवारों को मुआवजा और न्याय मिलना चाहिए।
  8. संबंधित अधिकारियों पर जवाबदेही — वह अधिकारी जो नियमों की अवहेलना करते हैं, उन पर दीर्घकालीन कार्रवाई हो।

निष्कर्ष

“डॉक्टर की गिरफ्तारी पर आईएमए का गुस्सा सातवें आसमान पर…” — यह प्रकरण न सिर्फ एक स्थानीय स्वास्थ्य घटना है, बल्कि पूरे देश की दवा सुरक्षा व्यवस्था, चिकित्सा नैतिकता और शासन की जवाबदेही पर प्रश्नचिन्ह है।

  • आईएमए ने स्पष्ट संदेश दिया है कि चिकित्सकों को कुंठा के शून्य स्थान पर नहीं खड़ा किया जाना चाहिए, बिना निष्पक्ष प्रक्रिया के गिरफ्तारी अमान्य है।
  • मध्य प्रदेश सरकार को यह अवसर मिला है कि वह दोषियों पर कठोर कार्रवाई करे, लेकिन साथ ही संस्थागत सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाए।
  • दोषारोपण का ठीकरा केवल डॉक्टरों पर नहीं फेंका जाना चाहिए — दवा कंपनियाँ और नियामक एजेंसियाँ भी इसकी जद में आनी चाहिए।
  • यदि डॉक्टरों की हड़ताल होती है, तो स्वास्थ्य सेवा प्रणाली और आम जनता को भारी क्षति हो सकती है।
  • इस त्रासदी को एक सतर्क समीक्षा का अवसर समझकर, भारत को दवा सुरक्षा और चिकित्सा न्याय के नए मानक स्थापित करने चाहिए।