(नन्द किशोर)
भोपाल (साई)। छिंदवाड़ा जिले में घटित कोल्ड्रिफ़ सिरप से 9 मासूम बच्चों की मौत की घटना ने पूरे मध्यप्रदेश को गहरे शोक और आक्रोश में डाल दिया है। यह केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था, दवा नियंत्रण तंत्र और जिम्मेदार अधिकारियों की गंभीर लापरवाही का प्रतीक है। सरकार ने त्वरित कदम उठाते हुए दवा की बिक्री और वितरण पर तत्काल रोक लगा दी है, साथ ही दोषियों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया है।

🔹 हादसे की पृष्ठभूमि
26 से 28 सितम्बर 2025 तक छिंदवाड़ा जिले में औषधि निरीक्षण दल द्वारा कई दवा दुकानों और अस्पतालों की जांच की गई। इसी दौरान कोल्ड्रिफ़ सिरप के सेवन से नौ मासूम बच्चों की मौत की खबर आई। इस दर्दनाक घटना ने न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि प्रदेश और केंद्र सरकार को भी झकझोर कर रख दिया।
जांच में पाया गया कि इस सिरप में खतरनाक रसायन डाइएथिलीन ग्लाइकॉल और एथिलीन ग्लाइकॉल मौजूद थे, जो बच्चों की किडनी पर गंभीर असर डालते हैं और प्राणघातक साबित होते हैं।
🔹 सरकार की त्वरित कार्रवाई
उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि इस हादसे की पूरी जिम्मेदारी तय की जाएगी।
अब तक उठाए गए कदम:
- 30 सितम्बर 2025 को छिंदवाड़ा में कोल्ड्रिफ़ सिरप और नास्ट्रो-डीएस के विक्रय पर तत्काल रोक।
- इंदौर स्थित आर्क फार्मास्यूटिकल्स के विरुद्ध कारण बताओ नोटिस।
- डिफ्रॉस्ट सिरप बैच नं. 11198 को बाजार से रिकॉल करने के निर्देश।
- जबलपुर, छिंदवाड़ा, बालाघाट और मंडला में विशेष जांच दल का गठन।
- 2 अक्टूबर को जबलपुर में कटारिया फार्मास्यूटिकल्स की 66 बोतलों में से 50 बिक्री हेतु रोकी गईं।
- 4 अक्टूबर को तमिलनाडु औषधि नियंत्रक की रिपोर्ट आने पर MP सरकार ने कोल्ड्रिफ सिरप और कंपनी के अन्य सभी उत्पादों पर बैन लगा दिया।
🔹 उप मुख्यमंत्री का बयान

उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा:
“राज्य सरकार जनता की सुरक्षा और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। औषधियों की गुणवत्ता पर कोई समझौता स्वीकार्य नहीं है। दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।”
उन्होंने यह भी बताया कि 19 औषधि नमूने परीक्षण हेतु भेजे गए हैं और आगामी दिनों में प्रदेशभर में औषधि निरीक्षकों की विशेष टीम लगातार छापेमारी करेगी।
🔹 जांच रिपोर्ट का खुलासा
तमिलनाडु सरकार की प्रयोगशाला रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया कि कोल्ड्रिफ़ सिरप अवमानक और खतरनाक है।
- बैच नं. SR-13, Mfg Dt. 05/2025 में 6%डाइएथिलीन ग्लाइकॉल पाया गया।
- अनुमेय सीमा से कई गुना अधिक।
- बच्चों की मौत का मुख्य कारण यही पाया गया।
🔹 केंद्र सरकार की भूमिका
केंद्र सरकार ने भी इस मामले में सक्रियता दिखाई। स्वास्थ्य मंत्रालय ने ICMR, NIV, AIIMSनागपुर और CDSCO की विशेषज्ञ टीमों को छिंदवाड़ा भेजा है ताकि गहन विश्लेषण हो सके।
🔹 स्थानीय स्तर पर लापरवाही
मामले ने यह भी उजागर किया कि स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य विभाग और CMHO कार्यालय की लापरवाही इस त्रासदी को बढ़ाने में जिम्मेदार रही। शिकायतों के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं की गई।
🔹 जनता का गुस्सा और सवाल
इस घटना ने आमजन को कई सवाल पूछने पर मजबूर कर दिया है:
- क्या औषधि निरीक्षकों ने समय पर जांच नहीं की?
- बच्चों के जीवन से खिलवाड़ करने वालों को कब तक संरक्षण मिलता रहेगा?
- क्या दवा कंपनियां केवल मुनाफे के लिए जनता की जान से खिलवाड़ कर सकती हैं?
🔹 स्वास्थ्य विभाग के लिए सबक
यह हादसा केवल एक जिले की त्रासदी नहीं बल्कि पूरे देश के स्वास्थ्य सिस्टम के लिए चेतावनी है। दवा निर्माण और वितरण में यदि गुणवत्ता नियंत्रण सख्ती से न हो, तो ऐसी घटनाएं फिर हो सकती हैं।
🔹 भविष्य की दिशा
सरकार ने इस दिशा में कई कदम उठाने की घोषणा की है:
- प्रदेशभर में औषधि दुकानों की सघन जांच।
- सभी संदिग्ध दवाओं की सैंपलिंग और परीक्षण।
- दोषी कंपनियों का लाइसेंस रद्द।
- फार्मा कंपनियों पर निगरानी बढ़ाना।
🏁 निष्कर्ष
छिंदवाड़ा में कोल्ड्रिफ़ सिरप हादसा केवल 9 बच्चों की मौत की घटना नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम के लिए आईना है। इसने यह दिखाया कि स्वास्थ्य विभाग और दवा नियंत्रण तंत्र में कितनी कमियां हैं। हालांकि सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दवा पर प्रतिबंध लगाया और दोषियों को सजा दिलाने का आश्वासन दिया है, लेकिन यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं।
उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल का यह कथन –
“जनता की सुरक्षा सर्वोच्च है,दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा”
— प्रदेश की जनता को एक उम्मीद देता है कि इस बार लापरवाह सिस्टम को कठोर जवाब जरूर मिलेगा।

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