(नन्द किशोर)
भोपाल (साई)। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल अब सिर्फ ‘झीलों का शहर’ ही नहीं, बल्कि पर्यटकों के लिए एक नया रोमांचक अनुभव का केंद्र बनने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार सुबह 9 बजे बड़े तालाब स्थित बोट क्लब पर कश्मीर की डल झील की तर्ज पर तैयार 20नई‘शिकारा नावों’ की औपचारिक शुरुआत करेंगे।
यह पहल प्रदेश में जल-पर्यटन को नई पहचान देने का बड़ा कदम मानी जा रही है। विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में अनेक विधायक और गणमान्य अतिथि शामिल रहेंगे।
कश्मीर जैसा माहौल—भोपाल में पहली बार
कश्मीर की डल झील अपने शिकारा बोट्स और शांत जलदृश्यों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। उसी सौंदर्य को अब भोपाल के बड़े तालाब में महसूस किया जा सकेगा। यह पहला अवसर होगा जब इतने बड़े पैमाने पर शिकारा बोट्स किसी मध्य भारतीय शहर में पर्यटकों के लिए उपलब्ध होंगी।
इन शिकारा नावों की आकर्षक डिजाइन, आरामदायक सीटिंग और कश्मीर के पारंपरिक रंगों से प्रभावित कलाकारी पर्यटकों को एक अलग ही अनुभव देने वाली है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव का पर्यटन विस्तार में बड़ा विज़न
बीते कुछ वर्षों में राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश को एक प्रमुख पर्यटन राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। जंगल सफारी, धार्मिक पर्यटन, हेरिटेज सर्किट, नर्मदा कॉरिडोर और अब जल-पर्यटन पर दिया जा रहा यह ज़ोर प्रदेश की स्मार्ट टूरिज्म नीति का हिस्सा है।
मुख्यमंत्री का मानना है कि—
“प्राकृतिक संसाधन,झीलें और सांस्कृतिक विविधता मध्यप्रदेश की धरोहर है। यदि उन्हें सही दिशा दी जाए तो पर्यटन क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था को बदल सकता है।”
शिकारा परियोजना इसी विज़न का विस्तार है।
20शिकारा नावें—अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता और पर्यावरण अनुकूल तकनीक
पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार सभी 20 शिकारा नावें फाइबर रीइन्फोर्स्ड पॉलीयूरिथेन (FRP) और नॉन-रिएक्टिव उच्च गुणवत्ता सामग्री से निर्मित हैं।
इसकी विशेषताएं:
- तालाब के जल में किसी भी प्रकार की रासायनिक प्रतिक्रिया नहीं होती
- शून्य प्रदूषण—100% पर्यावरण-अनुकूल
- मजबूत संरचना और पानी में स्थिरता
- अधिक भार क्षमता
- लम्बे समय तक उपयोग योग्य
इन नावों का निर्माण एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्था ने किया है, जिसकी बोट्स केरल, असम और बंगाल में अत्यधिक सफल रही हैं।
वॉटर टूरिज्म को नई पहचान देने का प्रयास
मध्यप्रदेश में जल-पर्यटन (Water Tourism) की संभावनाएं वर्षों से चर्चा में थीं, लेकिन बड़े पैमाने पर यह पहली बार शुरू किया जा रहा है।
शिकारा राइड के माध्यम से—
- भोपाल को एक नया पर्यटन ब्रांड मिलेगा
- स्थानीय रोजगार में वृद्धि होगी
- एमपी की ‘लेक टूरिज्म पॉलिसी’ को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी
- झील संरक्षण और सतत पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा
सरकार का लक्ष्य है कि भोपाल को देश के शीर्ष जल-पर्यटन स्थलों में शामिल किया जाए।
पर्यटकों के लिए क्या-क्या होगा खास?
शिकारा राइड सिर्फ नाव पर बैठकर घूमने का अनुभव तक सीमित नहीं होगी। यात्री यहां कई तरह की गतिविधियों का आनंद ले सकेंगे।
- बर्ड वाचिंग (Bird Watching)
मोती झील और बड़ा तालाब दोनों ही पक्षियों के प्राकृतिक निवास स्थल हैं।
शिकारा में विशेष दूरबीन (Binoculars) की व्यवस्था होगी ताकि पर्यटक—
- प्रवासी पक्षियों
- स्थानीय प्राकृतिक प्रजातियां
- जल-पक्षियों
को नजदीक से देख सकें।
- स्थानीय व्यंजन (Local Cuisine)
कुछ शिकारों को ‘फ़ूड थीम शिकारा’ के रूप में तैयार किया गया है, जहां पर्यटक—
- पोहा-जलebi
- दाल-बाफला
- गोंड आदिवासी व्यंजन
का आनंद उठा सकेंगे।
- हैंडीक्राफ्ट और हस्तशिल्प (Handicrafts Sale)
शिकारा राइड के दौरान स्टॉल-शिकारा उपलब्ध होंगे जहां—
- बांस शिल्प
- टेराकोटा
- गोंड पेंटिंग
- लकड़ी की नक्काशी
जैसे स्थानीय उत्पाद पर्यटकों को मिलेंगे।
- ऑर्गेनिक सब्जियां और फल (Organic Vegetables & Fruits)
कुछ शिकारे ‘ऑर्गेनिक फार्मिंग थीम’ पर होंगे, जहां सीधा ग्रामीण उत्पाद उपलब्ध होंगे।
बड़ा तालाब—भोपाल का गौरव और नई पहचान
1000 से अधिक वर्षों के इतिहास वाले बड़े तालाब को भोपाल का हृदय कहा जाता है। वृहद जल फैलाव, प्राकृतिक हरियाली और शांत वातावरण इस झील को पर्यटकों का पसंदीदा स्थल बनाते हैं।
सरकार का उद्देश्य है कि डल झील की तरह बड़े तालाब को भी—
- सांस्कृतिक
- प्राकृतिक
- पर्यावरणीय
तीनों आयामों से समृद्ध पर्यटन स्थल बनाया जाए।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा लाभ
शिकारा परियोजना केवल पर्यटन को ही नहीं, बल्कि स्थानीय रोजगार को भी गति देगी।
प्रभावित क्षेत्र:
- नाव संचालनकर्ता
- हस्तशिल्प विक्रेता
- फूड कोर्ट
- स्थानीय गाइड
- जल-खेल प्रशिक्षक
- फोटोग्राफी सेवाएं
अधिक पर्यटकों का आगमन सीधा भोपाल की अर्थव्यवस्था में बहुआयामी वृद्धि लाएगा।
चार कारण—क्यों खास है यह पहल?
- पहली बार कश्मीर शैली के शिकारे मध्यभारत में
कश्मीर की डल झील की संस्कृति को मध्यप्रदेश के केंद्र में लाने का यह अनोखा प्रयोग है।
- पर्यावरण-अनुकूल जल प्रबंधन
तालाब की स्वच्छता पर ध्यान रखते हुए सभी नावें पर्यावरणीय मानकों पर खरी उतरती हैं।
- पर्यटन विस्तार का नया मॉडल
शिकारा परियोजना वॉटर टूरिज्म को एक नए ब्रांड के रूप में स्थापित करेगी।
- भोपाल को नई पहचान
झील, पर्यटन और संस्कृति के मेल से शहर को एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन-सिटी के रूप में प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।
पर्यावरण और पारिस्थितिकी की सुरक्षा सर्वोपरि
सरकार ने स्पष्ट किया है कि—
- मोटरयुक्त नावों का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा
- शिकारों की आवागमन गति सीमित होगी
- तालाब की जैव विविधता को किसी प्रकार हानि न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा
- नियमित जल परीक्षण और पर्यावरणीय मॉनिटरिंग की जाएगी
यह सतत पर्यटन के सिद्धांतों के अनुरूप एक मजबूत कदम है।
भोपाल के पर्यटन पर संभावित प्रभाव
विशेषज्ञों का कहना है कि इस परियोजना के बाद—
- पर्यटकों की संख्या में 30–40% वृद्धि संभव
- झील के आसपास नए व्यवसाय विकसित होंगे
- भोपाल की नाइट टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा
- कपल टूरिज्म और फैमिली टूरिज्म में वृद्धि होगी
भोपाल शहर पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान दर्ज करेगा।
कार्यक्रम की मुख्य रूपरेखा
- तारीख: 4 दिसंबर 2025
- समय: सुबह 9 बजे
- स्थान: बड़ा तालाब, बोट क्लब, भोपाल
- मुख्य अतिथि: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
- अध्यक्षता: विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर
- विशेष आकर्षण: पहली शिकारा राइड का प्रदर्शन
निष्कर्ष
भोपाल के बड़े तालाब में 20 कश्मीर शैली के शिकारा बोट्स का शुभारंभ मध्यप्रदेश के पर्यटन इतिहास में मील का पत्थर बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार जल-पर्यटन को नई दिशा और ऊंचाई दे रही है।
यह परियोजना न केवल प्राकृतिक सौंदर्य का नया आकर्षण बनेगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार, सांस्कृतिक पहचान और पर्यावरण संरक्षण का संगम भी साबित होगी।
भोपाल आने वाले समय में देश और दुनिया के पर्यटकों के लिए एक ‘लाजवाब लेक-टूरिज्म डेस्टिनेशन’ के रूप में उभरने को तैयार है।

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