यूनियन कार्बाइड परिसर का निरीक्षण, 40साल पुराने रासायनिक कचरे का सफल निष्पादन
(नन्द किशोर)
भोपाल (साई)।शनिवार दोपहर 15:45 बजे, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आरिफ नगर स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर का विस्तृत निरीक्षण करते हुए ऐतिहासिक घोषणा की कि परिसर में मौजूद 40 साल पुराना रासायनिक कचरा वैज्ञानिक एवं सुरक्षित तरीकों से पूर्णतः निष्पादित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के मार्गदर्शन में यह कार्य बिना पर्यावरणीय नुकसान और मानव हानि के पूरा किया, जो दुनिया के लिए भी एक मिसाल है।
मुख्यमंत्री ने बिना मास्क पहने फैक्ट्री परिसर का कोर एरिया भी देखा और वायु गुणवत्ता की स्वच्छता पर संतोष जताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार अब इस स्थान को विकसित कर यहां भोपाल गैस त्रासदी स्मारक का निर्माण करेगी और आगे के सभी विकास कार्य समाज के सभी वर्गों को विश्वास में लेकर किए जाएंगे।
गैस पीड़ितों के साथ खड़ी है सरकार— CMडॉ. यादव का बड़ा बयान
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि 2–3 दिसंबर 1984 की रात हुई मिथाइल आइसोसायनाइट (MIC) गैस दुर्घटना देश की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदियों में से एक थी। बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी जान गंवाई और हजारों अब भी इसके दुष्प्रभाव झेल रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा:
- “राज्य सरकार गैस पीड़ितों के साथ हर कदम पर खड़ी है।”
- “प्रभावितों के कल्याण में हम कोई कमी नहीं रखेंगे।”
- “न्यायालय के मार्गदर्शन में विकास व स्मारक निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जाएगा।”
यह बयान प्रभावित परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण है, क्योंकि पिछले चार दशकों में कचरा प्रबंधन और विकास से जुड़े निर्णय कई बार अटके रहे।
यूनियन कार्बाइड परिसर—इतिहास,संघर्ष और समाधान की ओर एक बड़ा कदम
भोपाल गैस त्रासदी के बाद लगातार आलोचना होती रही कि तत्कालीन सरकारों ने फैक्ट्री में पड़े जहरीले रसायनों को हटाने के लिए ठोस निर्णय नहीं लिए। इससे वातावरण और आसपास के जलस्रोतों पर भी दुष्प्रभाव पड़ता रहा।
मुख्यमंत्री ने पूर्व सरकारों की लापरवाही पर कहा:
- फैक्ट्री के मालिक वॉरेन एंडरसन को भागने में मदद की गई।
- फैक्ट्री को लावारिस छोड़ दिया गया।
- कचरे को हटाने पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
- यूपीए शासन काल में भी विकास कार्यों की उपेक्षा की गई।
अब पहली बार बड़े स्तर पर वैज्ञानिक तरीके से कचरे का निस्तारण किया गया, जिसे मुख्यमंत्री ने “राजधानी के माथे से कलंक मिटाने” की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।
परिसर में बनेगा‘भोपाल गैस त्रासदी स्मारक’ —भावनाओं से जुड़ी पहल
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने गैस राहत एवं पुनर्वास विभाग के अधिकारियों से स्मारक निर्माण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी ली।
स्मारक के निर्माण का उद्देश्य:
- दिवंगत लोगों की स्मृति को सम्मान देना
- देश-दुनिया को औद्योगिक सुरक्षा का संदेश देना
- त्रासदी के इतिहास को संरक्षित रखना
- पर्यावरण संरक्षण की आधुनिक तकनीक का परिचय कराना
सरकार चाहती है कि यह स्मारक शिक्षा, जागरूकता और संवेदनशीलता का केंद्र बने।
परिसर का निरीक्षण—अधिकारियों की मौजूदगी में विस्तृत मूल्यांकन
निरीक्षण के दौरान कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे:
- सचिव, मुख्यमंत्री कार्यालय – आलोक कुमार सिंह
- आयुक्त जनसम्पर्क – दीपक कुमार सक्सेना
- संचालक गैस राहत – स्वतंत्र कुमार सिंह
- नगर निगम आयुक्त – श्रीमती संस्कृति जैन
- गैस त्रासदी राहत विभाग के वरिष्ठ अधिकारी
फैक्ट्री परिसर की वायु पूर्णतः स्वच्छ होने की पुष्टि के बाद अधिकारियों ने आगे के विकास कार्यों की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की।
भोपाल मेट्रोपोलिटन एरिया और यूनियन कार्बाइड परिसर का समुचित विकास
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मध्यप्रदेश के शहरी विकास को नई दिशा देने जा रही है। भोपाल और इंदौर को मेट्रोपोलिटन सिटी के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा:
- “यूनियन कार्बाइड परिसर भी इस विकास मॉडल का हिस्सा बनेगा।”
- “आस-पास के 6 जिले भोपाल मेट्रोपोलिटन एरिया के दायरे में आएंगे।”
- “शहरी विकास, सुशासन और आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए सभी बाधाएँ दूर की जाएंगी।”
यह कदम न केवल भोपाल, बल्कि मध्यप्रदेश के बड़े क्षेत्र के विकास को गति देगा।
रासायनिक कचरे के निष्पादन की तकनीक—दुनिया के लिए मिसाल
इंस्पेक्शन रिपोर्ट के अनुसार, रासायनिक कचरे को आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों से निष्पादित किया गया। मुख्यमंत्री ने इसे एक वैश्विक संदेश बताते हुए कहा कि खतरनाक कचरे को भी नियंत्रित, सुरक्षित और पर्यावरण-सम्मत तरीके से नष्ट किया जा सकता है।
तकनीकी मुख्य बिंदु:
- उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप कार्य
- सुरक्षित वैज्ञानिक विधियों का उपयोग
- मानव हानि का शून्य जोखिम
- पर्यावरणीय संतुलन पूर्णतः सुरक्षित
- अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रबंधन
सामाजिक जुड़ाव—लौटते समय महिला के आग्रह पर रुकेCM
निरीक्षण से लौटते समय आरिफ नगर में एक महिला पूजा कर रही थी और उसने मुख्यमंत्री का काफिला रोक दिया। मुख्यमंत्री ने तुरंत गाड़ी रुकवाई।
भावनात्मक पल:
- महिला ने भगवान भोलेनाथ को 2 अगरबत्ती लगाने का आग्रह किया।
- मुख्यमंत्री ने आग्रह स्वीकार किया और खुद अगरबत्ती अर्पित की।
- आसपास की महिलाओं से आत्मीय बातचीत की।
- पूछा – “लाड़ली बहना के पैसे मिल रहे हैं?”
- महिलाओं का जवाब – “हाँ, हर महीने 1500 रुपए मिल रहे हैं।”
इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्कूली बच्चों से भी बात की और उनके साथ सेल्फी लेकर उन्हें खुश किया।
आर्थिक सहायता—दो महिलाओं को तुरंत अनुदान
आरिफ नगर में एक महिला, श्रीमती मंजु बाई ने मुख्यमंत्री को बताया कि उनके पति बीमार हैं और आर्थिक सहायता चाहिए। एक अन्य महिला श्रीमती प्रभा बाई कुशवाहा ने भी सहायता की मांग की।
मुख्यमंत्री ने तत्काल निर्णय लिया:
- दोनों महिलाओं को 50–50हजार रुपए स्वेच्छानुदान मद से मंजूर
- नगर निगम कमिश्नर को तुरंत बैंक खाते नोट कर सहायता देने के निर्देश
- उसी दिन दोनों को 10–10हजार रुपए उपलब्ध करवाए गए
- शेष राशि बैंक खातों में जमा करने की प्रक्रिया शुरू
यह कदम मुख्यमंत्री के संवेदनशील और जनसेवा केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाता है।
सार्वजनिक प्रतिक्रिया—लोगों में राहत और उम्मीद
गैस पीड़ित और स्थानीय लोग लंबे समय से परिसर के विकास और कचरे के निस्तारण की प्रतीक्षा कर रहे थे। कचरे के हटने और स्मारक निर्माण की घोषणा से जनमानस में उत्साह और राहत स्पष्ट दिखाई दे रही है।
लोगों की प्रमुख प्रतिक्रियाएं:
- “40 साल बाद सही दिशा में कदम।”
- “स्मारक आने वाली पीढ़ियों को सिखाएगा कि ऐसी त्रासदी न दोहराई जाए।”
- “कचरे का हटाया जाना सबसे बड़ा काम।”
आगे की संभावनाएँ—स्वच्छ परिसर से विकास का रास्ता खुलेगा
सरकार का लक्ष्य है कि स्वच्छ परिसर का उपयोग:
- सामाजिक व सांस्कृतिक गतिविधियों
- स्मारक निर्माण
- सार्वजनिक जागरूकता
- पर्यटन संभावनाओं
- शहरी विकास योजनाओं
के लिए किया जाए।
यह न सिर्फ भोपाल बल्कि पूरे प्रदेश के लिए आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक लाभदायक साबित हो सकता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर का रासायनिक कचरा हट जाना और क्षेत्र का पूरी तरह स्वच्छ घोषित होना भोपाल के इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निरीक्षण और घोषणाओं से स्पष्ट है कि सरकार गैस पीड़ितों के साथ खड़ी है और इस क्षेत्र का पुनरुद्धार अब तेज गति से आगे बढ़ेगा। स्मारक निर्माण, शहरी विकास और जनकल्याण से जुड़ी योजनाएँ प्रदेश में नई दिशा तय करेंगी। यह कदम न सिर्फ एक त्रासदी की पीड़ा को सम्मान देता है बल्कि विकास और संवेदनशील शासन का मार्ग भी प्रशस्त करता है।

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