देहरादून और शिमला के संयुक्त आयोजन में 100+ प्रतिभागियों ने शहरी हरियाली व पर्यावरण संरक्षण पर रखे विचार
(ब्यूरो कार्यालय)
देहरादून (साई)। देहरादून स्थित आईसीएफआरई-वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) और हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान,शिमला के संयुक्त तत्वावधान में “जलवायु प्रतिरोधी शहरों में शहरी वानिकी और सामुदायिक सहभागिता”विषय पर एक दिवसीय क्षेत्रीय अनुसंधान सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया और शहरी हरियाली,पर्यावरण संरक्षण,जलवायु अनुकूलन तथा जनभागीदारी की आवश्यकता पर गहन चर्चा हुई।
आईसीएफआरई-वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई),देहरादून और हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान,शिमला द्वारा संयुक्त रूप से “जलवायु प्रतिरोधी शहरों के निर्माण में शहरी वानिकी और सामुदायिक सहभागिता की भूमिका”विषय पर एक दिवसीय क्षेत्रीय अनुसंधान सम्मेलन का आयोजन किया गया।
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया,जिनमें प्रशासनिक अधिकारी,वरिष्ठ वन अधिकारी,वैज्ञानिक,तकनीकी विशेषज्ञ और विभिन्न हितधारक शामिल थे।
उद्घाटन सत्र एवं मुख्य वक्तव्य
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. डी.पी. खली,वैज्ञानिक ‘जी’एवं समूह समन्वयक (अनुसंधान) के स्वागत भाषण से हुई। इसके बाद वन अनुसंधान संस्थान की निदेशक डॉ. रेनू सिंह ने अपने संबोधन में शहरी वानिकी के महत्व और सामुदायिक सहभागिता की अनिवार्यता पर प्रकाश डाला। उन्होंने अमृत मिशन,स्मार्ट सिटी मिशन और जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना जैसी सरकारी योजनाओं का विशेष उल्लेख किया,जो शहरों को अधिक हरित और जलवायु प्रतिरोधी बनाने में सहायक हैं।
डॉ. मनीषा थपलियाल,निदेशक,हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान,शिमला ने शहरी हरियाली और “नगर वन”जैसी पहलों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। वहीं श्री जगदीश चंदर,पूर्व प्रमुख मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख,हरियाणा ने घटते हरित आवरण पर चिंता व्यक्त करते हुए परि-नगरीय क्षेत्रों में शहरी वनों की आवश्यकता बताई।
पर्यावरण संरक्षण पर महत्वपूर्ण सुझाव
डॉ. समीर सिन्हा,प्रमुख मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख,उत्तराखंड ने हाल के वर्षों में आई प्राकृतिक आपदाओं का हवाला देते हुए कहा कि “यदि हम अपनी जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करें,तो पर्यावरण संरक्षण में बड़ा योगदान दे सकते हैं।”
देहरादून की नगर आयुक्त श्रीमती नमामि बंसल ने शहर में अतिक्रमण,अपशिष्ट प्रबंधन और हरित आवरण में कमी जैसी चुनौतियों का उल्लेख किया। उन्होंने अपने विभाग द्वारा उठाए गए कदमों जैसे—सड़क किनारे पौधारोपण,सामुदायिक बागवानी और ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट—की जानकारी साझा की।
तकनीकी एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण
डॉ. क्षमा गुप्ता,वैज्ञानिक,आईआईआरएस ने शहरी हरित क्षेत्रों के विस्तार के लिए हरित छतों,शहरी पार्कों और सामुदायिक वनभूमि की अवधारणा प्रस्तुत की। उन्होंने सुदूर संवेदन और जीआईएस तकनीकों की भूमिका को भी रेखांकित किया।
डॉ. वनीत जिस्टु,वरिष्ठ वैज्ञानिक,हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों (SDGs)में शहरी वानिकी का महत्वपूर्ण स्थान है,जो जलवायु अनुकूलन में सीधा योगदान देता है।
सम्मेलन की प्रमुख चर्चाएं
सम्मेलन में प्रतिभागियों ने निम्न मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया:
शहरी हरित क्षेत्रों का विस्तार और संरक्षण
जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के उपाय
जनभागीदारी और सामुदायिक पहल का महत्व
स्मार्ट सिटी एवं अमृत मिशन के अंतर्गत हरित विकास
तकनीकी समाधानों जैसे GIS, Remote Sensingका उपयोग
समापन एवं धन्यवाद ज्ञापन
सम्मेलन का समापन डॉ. पारुल भट्ट कोटियाल,प्रमुख एवं वैज्ञानिक ‘एफ’,वन पारिस्थितिकी एवं जलवायु परिवर्तन प्रभाग,द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने सभी वक्ताओं,प्रतिभागियों और आयोजकों को कार्यक्रम की सफलता के लिए धन्यवाद दिया।
यह सम्मेलन न केवल शहरी वानिकी के महत्व को रेखांकित करता है,बल्कि यह भी दर्शाता है कि सामुदायिक सहभागिता,सरकारी नीतियां और वैज्ञानिक तकनीकें मिलकर जलवायु प्रतिरोधी शहरों का निर्माण कर सकती हैं।

हर्ष वर्धन वर्मा का नाम टीकमगढ़ जिले में जाना पहचाना है. पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबे समय तक सक्रिय रहने के बाद एक बार फिर पत्रकारिता में सक्रियता बना रहे हैं हर्ष वर्धन वर्मा . . .
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