दो शहरों की कहानी: क्यों भारी बारिश के बाद गुरुग्राम थम जाता है, लेकिन नोएडा नहीं

सोमवार को केवल 100 मिमी बारिश के बाद ही गुरुग्राम, जिसे “मिलेनियम सिटी” कहा जाता है, शाम के पीक आवर में कई किलोमीटर लंबे जाम में फंस गया। मुख्य मार्गों पर जगह-जगह जलभराव हो गया, जिससे यात्री घंटों तक फंसे रहे। यह नजारा एक बार फिर गुरुग्राम की शहरी योजना और विकास मॉडल पर सवाल खड़े करता है। साल दर साल, यहां के निवासी शिकायत करते हैं कि मध्यम बारिश के बाद भी ट्रैफिक ठप हो जाता है।

(विनीत खरे)

नई दिल्ली (साई)। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के दो पड़ोसी शहरनोएडा और गुरुग्रामहर बार भारी बारिश के बाद एकदम अलग कहानी बयां करते हैं।

सोमवार को केवल 100 मिमी बारिश के बाद ही गुरुग्राम,जिसेमिलेनियम सिटीकहा जाता है,शाम के पीक आवर में कई किलोमीटर लंबे जाम में फंस गया। मुख्य मार्गों पर जगह-जगह जलभराव हो गया,जिससे यात्री घंटों तक फंसे रहे। यह नजारा एक बार फिर गुरुग्राम की शहरी योजना और विकास मॉडल पर सवाल खड़े करता है। साल दर साल,यहां के निवासी शिकायत करते हैं कि मध्यम बारिश के बाद भी ट्रैफिक ठप हो जाता है।

इसके विपरीत,नोएडाजो एनसीआर का ही दूसरा प्रमुख उपग्रह शहर हैमें ऐसी स्थिति अपेक्षाकृत कम देखने को मिलती है। यहां जलभराव और लंबे ट्रैफिक जाम की घटनाएं बहुत कम होती हैं।

नोएडा का नियोजित विकास मॉडल

नोएडा की स्थापना 1975 में आपातकाल के दौरान हुई,जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी ने राष्ट्रीय राजधानी से उद्योगों को बाहर ले जाने का निर्णय लिया। इसके बाद न्यू ओखला इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (NOIDA)के अधीन इसे उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम,1976 के तहत औद्योगिक नगर के रूप में विकसित किया गया।

विशेषज्ञ बताते हैं कि नोएडा एक “ग्रीनफील्ड” शहर थायानी इसे पूरी तरह नई,अविकसित भूमि पर शून्य से विकसित किया गया। भूमि का अधिग्रहण एक साथ करके सड़कें,नालियां,सीवर पाइपलाइन,फुटपाथ और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी संरचना पहले ही तैयार कर दी गई। इसके बाद निजी डेवलपर्स ने इसी साझा बुनियादी ढांचे से जुड़कर कॉलोनियों और कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया।

करीब आधी सदी पहले अधिग्रहीत भूमि में 50 गांव शामिल थे,जिसका कुल क्षेत्रफल 14,915 हेक्टेयर (लगभग 36,841 एकड़) था। आज यह 81 गांवों और लगभग 20,316 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है।

शहरी शोधकर्ता मुक्ता नाइक कहती हैं— “नोएडा में सही योजना के तहत विकास हुआ,इसी कारण यहां की ड्रेनेज और सड़क नेटवर्क शहर के निर्मित ढांचे के अनुपात में तैयार किया गया।”

गुरुग्राम का असंगठित विस्तार

दूसरी ओर,गुरुग्राम का विकास पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP)मॉडल पर हुआ। यहां अलग-अलग आकार और स्थानों पर बिखरी भूमि के टुकड़ों का अधिग्रहण कर निजी डेवलपर्स,विशेषकरDLF,ने बस्तियां और टाउनशिप विकसित कीं।

बाहरी बुनियादी ढांचा राज्य सरकार ने तैयार किया,लेकिन आंतरिक इंफ्रास्ट्रक्चर को उससे सही ढंग से जोड़ा नहीं गया। 1970 के दशक से हरियाणा सरकार ने ऐसे कानून बनाए,जिनसे निजी कंपनियों को बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण की अनुमति मिली,लेकिन यह प्रक्रिया समान रूप से नहीं हुई। नतीजतन,कई अनियमित भूखंड और ऐसी सड़कें बनीं जो किसी उचित नेटवर्क से जुड़ती ही नहीं।

भूगोल और जलनिकासी की अनदेखी

गुरुग्राम का भौगोलिक ढांचा भी समस्या को बढ़ाता है। शहर के दक्षिणी छोर पर अरावली की पहाड़ियां इसकी प्राकृतिक ऊंचाई हैं,जबकि उत्तर की ओर भूमि नीची है। यहां बारिश का पानी स्वाभाविक रूप से दक्षिण से उत्तर की ओर बहकर नजफगढ़ झील (पश्चिम दिल्ली) में जाता था। लेकिन अनियोजित शहरी विस्तार के कारण प्राकृतिक नाले और जलनिकासी मार्ग खत्म हो गए।

विशेषज्ञ मानते हैं कि गुरुग्राम की सड़क योजना का अस्पष्ट ग्रिड और जलनिकासी चैनलों की कमी जाम की समस्या को और गंभीर बना देती है। जब भी पानी भरता है,ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो जाता है।