नई जीएसटी दरों का भारी उद्योगों पर प्रभाव: ऑटोमोबाइल, ट्रैक्टर, बस और वाणिज्यिक वाहनों में बढ़ेगी मांग

भारत सरकार द्वारा नई जीएसटी दरों और स्लैब में किए गए संशोधनों का भारी उद्योगों, विशेषकर ऑटोमोबाइल, ट्रैक्टर, बस, वाणिज्यिक माल वाहनों और ऑटो कंपोनेंट उद्योग पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा। दरों में कटौती से न केवल उत्पादन और मांग में वृद्धि होगी, बल्कि एमएसएमई, सहायक उद्योग, रोजगार और निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में वाहन खरीद अधिक सुलभ होगी और सार्वजनिक परिवहन के आधुनिकीकरण में तेजी आएगी।

(ब्रजेश कुमार)

लखनऊ (साई)। भारत सरकार द्वारा घोषित नई जीएसटी दरों और स्लैब में संशोधनों का भारी उद्योगों पर दूरगामी असर होगा। ऑटोमोबाइल,ट्रैक्टर,बस,वाणिज्यिक माल वाहन और ऑटो कंपोनेंट उद्योग में दरों में कटौती से न केवल कीमतें घटेंगी, बल्कि उत्पादन, मांग और रोजगार सृजन में भी बढ़ोतरी होगी।

भारत सरकार द्वारा नई जीएसटी दरों और स्लैब में किए गए संशोधनों का भारी उद्योगों, विशेषकर ऑटोमोबाइल, ट्रैक्टर, बस, वाणिज्यिक माल वाहनों और ऑटो कंपोनेंट उद्योग पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा। दरों में कटौती से न केवल उत्पादन और मांग में वृद्धि होगी, बल्कि एमएसएमई, सहायक उद्योग, रोजगार और निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में वाहन खरीद अधिक सुलभ होगी और सार्वजनिक परिवहन के आधुनिकीकरण में तेजी आएगी।

नई जीएसटी दरों से ऑटोमोबाइल, ट्रैक्टर, बस और वाणिज्यिक वाहनों की कीमतों में कमी आएगी। इससे भारी उद्योगों, एमएसएमई और रोजगार में वृद्धि होगी। ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों में परिवहन सुविधाएं बेहतर होंगी और मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिलेगा।

🚗 ऑटोमोबाइल सेक्टर में बड़ा बदलाव

  • मोटरसाइकिल (350सीसी तक) पर जीएसटी 28% से घटाकर 18% कर दिया गया है। इससे कीमतों में कमी आएगी और ग्रामीण-शहरी उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
  • छोटी कारें (1200 सीसी से कम पेट्रोल और 1500 सीसी से कम डीजल इंजन) पर जीएसटी 28% से घटाकर 18% किया गया।
  • बड़ी कारें – उपकर हटाकर जीएसटी को 40% किया गया, जिससे कर संरचना सरल हुई और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ पूर्ण रूप से मिलेगा।

प्रभाव:

  • ऑटो पार्ट्स, टायर, बैटरी, कांच, स्टील, प्लास्टिक और इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने वाले उद्योगों को नए ऑर्डर मिलेंगे।
  • डीलरशिप, फाइनेंस कंपनियां और एमएसएमई को फायदा होगा।
  • पुराने वाहनों के बदले नए ईंधन-कुशल वाहन अपनाने की प्रवृत्ति बढ़ेगी, जिससे प्रदूषण में कमी आएगी।

🚜 ट्रैक्टर और कृषि उपकरण

  • ट्रैक्टर (<1800सीसी) पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% कर दी गई।
  • ट्रैक्टर पुर्जों की दर भी 5% कर दी गई।
  • सेमी-ट्रेलरों के लिए सड़क ट्रैक्टर (>1800सीसी) पर जीएसटी 28% से घटाकर 18% किया गया।

प्रभाव:

  • भारत के सबसे बड़े ट्रैक्टर बाजार में घरेलू और निर्यात दोनों क्षेत्रों में मांग बढ़ेगी।
  • कृषि मशीनीकरण में तेजी आएगी, जिससे फसल उत्पादकता बढ़ेगी।
  • सहायक एमएसएमई इकाइयों (इंजन, टायर, गियर, हाइड्रोलिक पंप) को लाभ मिलेगा।

🚌 बस और सार्वजनिक परिवहन

  • 10+सीटर बसें और मिनी बसें – जीएसटी 28% से घटाकर 18% किया गया।

प्रभाव:

  • राज्य परिवहन उपक्रमों, स्कूलों, टूर ऑपरेटरों और निजी बेड़े संचालकों के लिए लागत में कमी।
  • सस्ते टिकट किराए से यात्रियों को लाभ, खासकर अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में।
  • सार्वजनिक परिवहन के उपयोग में वृद्धि, भीड़भाड़ और प्रदूषण में कमी।

🚛 वाणिज्यिक माल वाहन

  • ट्रक और डिलीवरी वैन पर जीएसटी 28% से घटाकर 18% किया गया।
  • तृतीय पक्ष बीमा पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% किया गया (ITC सहित)।

प्रभाव:

  • लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी, जिससे कृषि उत्पाद, एफएमसीजी, ई-कॉमर्स और औद्योगिक सामान की ढुलाई सस्ती होगी।
  • एमएसएमई ट्रक मालिकों को सीधा लाभ मिलेगा।
  • निर्यात प्रतिस्पर्धा में सुधार और मुद्रास्फीति पर नियंत्रण।

🔩 ऑटो कंपोनेंट

  • अधिकांश ऑटो कंपोनेंट्स पर जीएसटी घटाकर 18% कर दी गई।

प्रभाव:

  • सप्लाई चेन मजबूत होगी।
  • एमएसएमई विनिर्माताओं को ऑर्डर में बढ़ोतरी।
  • उत्पादन और रोजगार दोनों में वृद्धि।

🌏 व्यापक आर्थिक प्रभाव

  1. मांग में वृद्धि – कीमतों में कमी से वाहनों की बिक्री में तेजी आएगी।
  2. रोजगार सृजन – प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों नई नौकरियां।
  3. ग्रामीण-शहरी कनेक्टिविटी – सस्ते वाहन और ट्रांसपोर्ट सुविधाएं।
  4. मेक इन इंडिया को बढ़ावा – विनिर्माण क्षेत्र में निवेश और उत्पादन में तेजी।
  5. स्वच्छ गतिशीलता – नए, ईंधन-कुशल वाहनों को अपनाने से प्रदूषण में कमी।

📊 निष्कर्ष

नई जीएसटी दरों में कटौती से भारी उद्योगों,एमएसएमई,कृषि और परिवहन क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव आएंगे। इससे न केवल आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा बल्कि आम उपभोक्ता, उद्योगपति और निर्यातक सभी को लाभ होगा। यह कदम प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के लक्ष्यों के अनुरूप है, जो भारत को वैश्विक विनिर्माण और परिवहन केंद्र के रूप में स्थापित करने में सहायक होगा।