(जाकिया जरीन)
कोलकता (साई)। असम के मनकाचर सेक्टर में भारत‑बांग्लादेश सीमा पर फिर से तनाव की लहर उठी है, जहाँ नौ बांग्लादेशी नागरिक नो‑मैन्स लैंड में फँस कर बेताब हो रहे हैं। बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) ने इन नागरिकों को वापस लेने से स्पष्ट इनकार कर दिया, जबकि भारतीय बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) ने उन्हें सुरक्षित रूप से निकालने की कोशिश की। इस स्थिति ने दोनों देशों के बीच कई फ्लैग मीटिंग को जन्म दिया, परन्तु अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। स्थानीय मीडिया में वायरल वीडियो में फँसे नागरिकों की भावनात्मक अपील और उनके दस्तावेज़ों की वैधता पर चर्चा तेज़ी से फैल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मुद्दा केवल सीमा सुरक्षा ही नहीं, बल्कि मानवीय अधिकारों और कूटनीतिक समझौतों की जटिल परतों को भी उजागर करता है।
नो‑मैन्स लैंड में फँसे बांग्लादेशी नागरिकों की तत्काल स्थिति
घटना का प्रत्यक्ष विवरण
मनकाचर सेक्टर के नो‑मैन्स लैंड में रविवार को नौ बांग्लादेशी नागरिकों को फँसे हुए पाया गया, जहाँ उन्होंने भारत‑बांग्लादेश सीमा के निकट काम करने के लिए प्रवेश किया था। बीएसएफ के अधिकारियों ने तुरंत स्थिति का आकलन किया और नागरिकों को सुरक्षित क्षेत्र में ले जाने की कोशिश की, परन्तु बांग्लादेशी बॉर्डर गार्ड (BGB) ने उन्हें वापस लेने से स्पष्ट इनकार कर दिया। इस दौरान एक वायरल वीडियो में एक व्यक्ति ने दृढ़ता से कहा, “हम बांग्लादेशी नागरिक हैं, हमारे पास दस्तावेज हैं, हम भारत नहीं जाएंगे।”
BGB की असहयोगी प्रतिक्रिया
BGB ने अपनी आधिकारिक बयान में कहा कि वे इन नौ व्यक्तियों को भारत में रहने की अनुमति नहीं दे सकते और उन्हें बांग्लादेश में ही लौटाना आवश्यक है, जबकि बीएसएफ ने कहा कि नागरिकों के पास वैध कार्य वीज़ा है और उन्हें मानवाधिकारों के तहत सुरक्षित रूप से वापस ले जाना चाहिए। दोनों पक्षों के बीच कई फ्लैग मीटिंग हो चुकी हैं, परन्तु अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला, जिससे सीमा पर तनाव का माहौल और अधिक बिगड़ रहा है।

आकाश कुमार ने नई दिल्ली में एक ख्यातिलब्ध मास कम्यूनिकेशन इंस्टीट्यूट से मास्टर्स की डिग्री लेने के बाद देश की आर्थिक राजधानी में हाथ आजमाने की सोची. लगभग 15 सालों से आकाश पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं और समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के मुंबई ब्यूरो के रूप में लगातार काम कर रहे हैं.
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