प्रेम,पीड़ा और पागलपन की एक सिनेमाई यात्रा
(दीपक अग्रवाल)
मुंबई (साई)। बॉलीवुड में रोमांस एक पुरानी परंपरा है, लेकिन समय–समय पर कुछ निर्देशक इस भावनात्मक शैली में नई ताजगी और गहराई भर देते हैं। आनंद एल राय उन्हीं निर्देशकों में गिने जाते हैं। “तेरे इश्क में” उनकी वही पहचान आगे बढ़ाती है जो उन्होंने “रांझणा” और “अतरंगी रे” जैसी फिल्मों के माध्यम से बनाई — जटिल, दर्द से भरे, और सामाजिक यथार्थ से टकराते प्रेम की कहानियाँ।
इस फिल्म में प्रेम, हिंसा, सामाजिक वर्ग, मनोवैज्ञानिक संघर्ष और मानव स्वभाव की विसंगतियाँ—ये सब मिलकर एक ऐसी कथा गढ़ते हैं जो दर्शक को भीतर तक हिला देती है। फिल्म सिर्फ प्रेम कहानी नहीं है, बल्कि प्रेम के भीतर छिपी हिंसा, नियंत्रण, खोखलापन और मुक्ति की तलाश का अध्याय भी है।
धनुष और कृति सेनन का यह अनूठा संगम फिल्म की आत्मा है। एक ओर है शंकर—एक उग्र, टूटा, हिंसक और भीतर से बिखरा हुआ युवक। दूसरी ओर है मुक्ति—एक पढ़ी–लिखी, मनोविज्ञान की छात्रा, जिसकी दुनिया विचारों, संवेदनाओं और सिद्धांतों से संचालित होती है। दोनों का प्रेम, दोनों की दूरी और दोनों का संघर्ष फिल्म का भावनात्मक ढांचा तैयार करता है।
फिल्म की कहानी (Storyline):प्रेम,हिंसा और वर्गभेद का तीखा टकराव
- शंकर: एक टूटे हुए परिवार की कड़वाहट से जन्मा उग्र प्रेम
शंकर (धनुष) एक साधारण मध्यवर्गीय परिवार से आता है। पिता नोटरी (प्रकाश राज), अनुशासनप्रिय और सामाजिक खानदानी व्यवस्था का प्रतिनिधि—जबकि माँ की पीड़ा, मृत्यु और उसके बाद की परिस्थितियाँ शंकर के भीतर गहरी हिंसा और असुरक्षा का बीज बोती हैं।
शंकर का व्यक्तित्व दो ध्रुवों पर चलता है—
- एक ओर वह एक जुनूनी प्रेमी है
- दूसरी ओर वह हिंसा को साधन बनाकर अपनी भावनाओं को स्थापित करता है
धनुष ने इस जटिलता को इतने सधे तरीके से निभाया है कि दर्शक उसकी हिंसा से नफरत करते हुए भी उसके दर्द के प्रति सहानुभूति महसूस करता है।
- मुक्ति: तर्क,शोध और वैचारिक दुनिया में जीने वाली युवती
मुक्ति (कृति सेनन) मनोविज्ञान की शोधार्थी है और सामाजिक हिंसा पर PhD कर रही है।
वह प्रेम को एक उपचार की तरह देखती है—
“प्यार गुस्से को कम कर सकता है…प्रेम हिंसा को पिघला सकता है।”
परन्तु वह यह नहीं समझ पाती कि किताबों से परे एक हिंसक व्यक्ति की भावनाओं को पढ़ना उतना आसान नहीं।
- दो दुनियाओं का संघर्ष
फिल्म के सबसे शक्तिशाली हिस्सों में से एक—दो बिल्कुल भिन्न वर्गों का प्रेम और टकराव।
- मुक्ति—उच्च, शिक्षित, सुरक्षित और आधुनिक मूल्य–व्यवस्था की प्रतिनिधि
- शंकर—निचले मध्यम वर्ग का, टूटा, हिंसा से घिरा, और समाज द्वारा निर्मित मनोवैज्ञानिक बंधनों में कैद
दोनों के मिलते ही कहानी एक रोमांटिक ड्रामा से आगे बढ़कर सामाजिक मनोविज्ञान का गहरा प्रतिरूप बन जाती है।
फिल्म की थीम (Themes):गहराई जिसमें प्रेम और हिंसा साथ चलते हैं
“तेरे इश्क में” की सबसे बड़ी सफलता उसकी multilayered थीम्स में है।
- प्रेम का पागलपन और विनाशकारी ताकत
आनंद एल राय प्रेम को सिर्फ आकर्षण या रोमांस की तरह नहीं देखते।
उनके सिनेमा में प्रेम—
- या तो इलाज है
- या फिर बीमारी
और अक्सर दोनों एक साथ।
यह फिल्म दर्शाती है कि प्रेम कैसे इंसान को बदल सकता है—
कभी ब्रह्मांड बना सकता है,
कभी उसे पूरी तरह तहस–नहस कर सकता है।
- सामाजिक वर्ग और मनोवैज्ञानिक दूरी
फिल्म का प्रमुख आधार है—
वर्गभेद।
जिसे निर्देशक बेहद स्वाभाविक तरीके से स्थापित करते हैं।
- शंकर का हिंसक बचपन
- मुक्ति का सुरक्षित और संतुलित पालन–पोषण
यह अंतर दोनों के विचारों में खाई पैदा करता है।
उनका प्रेम इन्हीं दो दुनियाओं के बीच एक पुल बनाने की कोशिश है।
- हिंसा की जड़ और सामाजिकconditioning
फिल्म हिंसा को महिमामंडित नहीं करती, बल्कि उसके स्रोत की ओर इशारा करती है।
हिंसा—
- गरीबी से आती है
- उपेक्षा से आती है
- अनसुनी पुकारों से जन्म लेती है
- सामाजिक असमानता हिंसा को जन्म देती है
शंकर की हिंसा उसकी आत्मकथा का हिस्सा है।
वह “विलेन” नहीं है, बल्कि समाज द्वारा बनाई गई एक त्रासदी है।
- मनोविज्ञान और प्रेम का द्वंद्व
मुक्ति के शोध का आधार है—
“प्रेम,हिंसा पर विजय प्राप्त कर सकता है।”
लेकिन फिल्म पूछती है—
क्या वाकई ऐसा होता है?
क्या प्रेम के सहारे हिंसक व्यक्तित्व बदला जा सकता है?
फिल्म इस सवाल का सीधा उत्तर देने से बचती है।
यह अस्पष्टता ही फिल्म को वास्तविक बनाती है।
किरदारों का विश्लेषण (Character Analysis)
⭐धनुष (शंकर)—दर्द,क्रोध और प्रेम का विस्फोट
धनुष ने पिछले कई वर्षों में खुद को एक बहु–आयामी अभिनेता साबित किया है, लेकिन “तेरे इश्क में” में उनका अभिनय शायद उनके करियर के सबसे भावनात्मक और नंगे रूप में है।
उनका अभिनय—
- कच्चा है
- तीखा है
- असुरक्षित है
- और बिल्कुल मानव है
धनुष ‘शंकर’ को एक हिंसक प्रेमी नहीं, बल्कि एक घायल आत्मा की तरह पेश करते हैं।
दर्शक उनकी गलतियों को समझते भले न हों, पर उनके दर्द को अवश्य महसूस करते हैं।
⭐कृति सेनन (मुक्ति)—आधुनिक सोच और भावनात्मक उथल–पुथल का सुंदर मिश्रण
कृति ने यहाँ सिर्फ एक “हेरोइन” का किरदार नहीं निभाया, बल्कि एक ऐसी researcher का चित्रण किया है जो प्रेम और हिंसा के बीच मनोवैज्ञानिक संतुलन खोजने की कोशिश करती है।
उनका अभिनय—
- गहराई भरा
- सशक्त
- और सहज है
उन्होंने मुक्ति की vulnerability और strength दोनों को खूब जिया है।
⭐प्रकाश राज और टोटा रॉय चौधरी—सामाजिक विभाजन का मौन चित्रण
दोनों अभिनेताओं ने प्रवाहमान अभिनय किया है।
उनकी मौजूदगी ही कहानी के सामाजिक ढांचे और वर्गभेद को रेखांकित करती है।
निर्देशन: आनंद एल राय की भावनात्मक भाषा
आनंद एल राय का निर्देशन फिल्म की रीढ़ है।
उनकी खासियत है—
- असंगत पात्रों को संगति देना
- भावनात्मक विस्फोट को चुप्पी से गढ़ना
- प्रेम और दर्द के बीच संतुलन बनाना
“तेरे इश्क में” में वे वही cinematic poetry दोहराते हैं जो “रांझणा” की आत्मा थी।
आनंद प्रेम को सजाते नहीं, उधेड़ते हैं।
वे प्रेम की सुंदरता नहीं, उसकी कीमत दिखाते हैं।
संगीत और पृष्ठभूमि—AR Rahmanकी सिग्नेचर गहराई
रहमान का संगीत इस फिल्म का भावनात्मक इंजन है।
शुरुआत में हल्का लगता है, लेकिन जैसे–जैसे कहानी गहराती है, संगीत भीतर तक उतरता है।
उनका “हम्म्म्म” वाला signature motif तनाव भरे दृश्यों में goosebumps पैदा करता है।
फिल्म की कमजोरियाँ (Weak Points)
हर फिल्म की तरह इसमें भी कुछ कमियाँ हैं—
- अंतिम हिस्सा थोड़ा लंबा और खींचा हुआ
इमोशनल क्लाइमेक्स में कुछ दृश्य दोहरावपूर्ण लगते हैं।
- कुछ तकनीकी हिस्सों में असंगति
खासकर एयरफोर्स वाला सेगमेंट कहानी में अचानक प्रवेश करता है।
- शंकर के‘उत्तरी भारतीय छात्र नेता’रूप में दक्षिण भारतीय छवि का मेल
कुछ दर्शकों के लिए यह विश्वास का बिंदु तोड़ सकता है।
फिल्म क्यों देखें? (Why You Should Watch It)
- अगर आपको “रांझणा” पसंद आई थी
- अगर आप intense romance पसंद करते हैं
- अगर आप जटिल मनोवैज्ञानिक प्रेम–कहानी देखना चाहते हैं
- अगर आप अभिनय–प्रधान फिल्में पसंद करते हैं
तो “तेरे इश्क में” आपके लिए है।
सिनेमा का सामाजिक संदेश
फिल्म एक बहुत महत्वपूर्ण बात कहती है—
“हिंसा पैदा नहीं होती,बनाई जाती है।”
और
“प्रेम इलाज भी है…लेकिन हर घाव प्रेम से नहीं भरता।”
यह द्वंद्व ही फिल्म को real और raw बनाता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
“तेरे इश्क में” आधुनिक बॉलीवुड की एक साहसी और भावनात्मक फिल्म है, जहाँ प्रेम को सिर्फ सपनों की दुनिया नहीं बल्कि जीवन की कठोर वास्तविकता से टकराते हुए दिखाया गया है। आनंद एल राय प्रेम की उस दुनिया को रचते हैं जहाँ जुनून और पीड़ा साथ–साथ चलते हैं। धनुष ने जिस गहराई से ‘शंकर’ को जिया है, वह लंबे समय तक दर्शक के मन में रहता है। कृति सेनन का संतुलित और भावनात्मक अभिनय कहानी को मजबूती देता है।
फिल्म पूरी तरह flawless नहीं है, लेकिन इसकी आत्मा, इसके किरदार, इसका संगीत और इसका प्रेम–दर्द का संघर्ष इसे देखने लायक बना देता है।
यह फिल्म प्रेम की सुंदरता नहीं, बल्कि प्रेम की कीमत दिखाती है—और यही इसे यादगार बनाता है।

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