Silver Price Crash: रिकॉर्ड के बाद भूचाल, एक घंटे में चांदी 21,500 रुपये सस्ती — जानिए कारण

सोमवार को MCX पर चांदी ने रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद अचानक भारी गिरावट दर्ज की। एक घंटे के भीतर ही कीमत करीब 21,500 रुपये प्रति किलो लुढ़क गई। इस उतार-चढ़ाव से निवेशकों में हलचल मच गई और बाजार में अस्थिरता बढ़ गई।

(दीपक अग्रवाल)

मुंबई (साई)।सराफा बाजार में सोमवार का दिन निवेशकों के लिए बेहद चौंकाने वाला रहा। सुबह MCX पर चांदी ने इतिहास रचते हुए 2.54 लाख रुपये प्रति किलो का स्तर छू लिया, लेकिन कुछ ही देर बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई। बाजार में अचानक ऐसा भूचाल आया कि चांदी की कीमत एक झटके में करीब 21,500 रुपये प्रति किलो टूट गई। इस अप्रत्याशित गिरावट से निवेशक और कारोबारी दोनों सकते में आ गए।

यह घटनाक्रम यह दर्शाता है कि कमोडिटी बाजार कितना संवेदनशील और भावनाओं पर आधारित होता है। चांदी की यह तेजी और फिर अचानक गिरावट, दोनों ने बाजार में अस्थिरता को उजागर किया है।

पिछले एक वर्ष से चांदी की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखी जा रही थी। वैश्विक अनिश्चितताओं, महंगाई, ब्याज दरों में बदलाव और भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशक सुरक्षित संपत्तियों की ओर बढ़े, जिससे चांदी और सोने जैसी कीमती धातुओं की मांग बढ़ी।

इसके अलावा औद्योगिक उपयोग, विशेषकर सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहन और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में चांदी की बढ़ती जरूरत ने इसकी कीमत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया।

सोमवार को चांदी ने दिन की शुरुआत रिकॉर्ड तेजी के साथ की। जैसे ही कीमत ऐतिहासिक स्तर पर पहुंची, कई निवेशकों ने मुनाफा सुरक्षित करने के लिए बिकवाली शुरू कर दी। यह बिकवाली इतनी तेज थी कि भाव ने कुछ ही मिनटों में उल्टी दिशा पकड़ ली।

इससे यह साफ हो गया कि बाजार में तेजी के बाद करेक्शन होना लगभग तय था।

बाजार में अचानक गिरावट के कारण

चांदी की कीमत में आई तेज गिरावट के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं:

  • रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचते ही प्रॉफिट बुकिंग
  • वैश्विक बाजार में कीमतों में नरमी
  • सुरक्षित निवेश की मांग में अस्थायी कमी
  • बड़े ट्रेडरों द्वारा भारी बिकवाली

इन सभी कारणों ने मिलकर गिरावट को तेज कर दिया।

वैश्विक संकेत और घरेलू असर

अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी पहले ऊंचे स्तर पर पहुंची, लेकिन वहां से भी गिरावट देखने को मिली। जैसे ही वैश्विक कीमतों में नरमी आई, घरेलू बाजार पर उसका असर तुरंत दिखा।

यह दर्शाता है कि भारतीय सराफा बाजार वैश्विक रुझानों से गहराई से जुड़ा हुआ है।

आंकड़े, तथ्य और विश्लेषण

पिछले एक साल में चांदी ने 150 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न दिया है। यह अपने आप में असाधारण है। हालांकि इतनी तेज तेजी के बाद बाजार में करेक्शन आना स्वाभाविक माना जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी तेज गिरावट तकनीकी कारणों और बाजार भावनाओं का संयुक्त परिणाम है।

आम निवेशकों पर असर

इस उतार-चढ़ाव का सबसे बड़ा असर खुदरा निवेशकों पर पड़ा है। जिन लोगों ने ऊंचे स्तर पर खरीदारी की, वे अचानक घाटे में आ गए। वहीं जिन्होंने पहले निवेश किया था, उन्होंने मुनाफा सुरक्षित कर लिया।

इससे यह सीख मिलती है कि कमोडिटी बाजार में निवेश सोच-समझकर और जोखिम को ध्यान में रखकर करना चाहिए।

क्या यह गिरावट आगे भी जारी रहेगी?

विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में चांदी की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। बाजार अभी अस्थिर है और वैश्विक संकेतों पर निर्भर रहेगा।

हालांकि दीर्घकालिक दृष्टि से चांदी की मांग मजबूत बनी हुई है, खासकर औद्योगिक क्षेत्र से।

भविष्य की संभावनाएं / आगे क्या?

आने वाले दिनों में बाजार की दिशा निम्न बातों पर निर्भर करेगी:

  • वैश्विक आर्थिक संकेत
  • महंगाई और ब्याज दरों का रुझान
  • औद्योगिक मांग
  • निवेशकों की धारणा

यदि वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है तो चांदी फिर से मजबूती पकड़ सकती है।

चांदी की कीमतों में आई यह ऐतिहासिक तेजी और उसके बाद की तेज गिरावट यह दिखाती है कि कमोडिटी बाजार कितना गतिशील और जोखिमपूर्ण हो सकता है। निवेशकों के लिए यह एक चेतावनी भी है कि केवल तेजी देखकर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। संतुलित रणनीति और सतर्कता ही इस बाजार में स्थिर सफलता की कुंजी है।