रेडबर्ड विमान हादसों के पीछे जर्जर सुखतरा हवाई पट्टी? कलेक्टर के कड़े पत्र से DGCA और विमानन विभाग पर बढ़ा दबाव

सिवनी जिले की सुखतरा हवाई पट्टी एक बार फिर सवालों के घेरे में है, जहां रेडबर्ड कंपनी के विमानों से जुड़े लगातार हादसों ने सुरक्षा मानकों पर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। जिला कलेक्टर द्वारा डीजीसीए और विमानन विभाग को लिखा गया कड़ा पत्र इस ओर इशारा करता है कि जर्जर हवाई पट्टी हादसों की बड़ी वजह हो सकती है। अब जांच के दायरे में न केवल कंपनी बल्कि प्रशासनिक लापरवाही भी आ गई है।

रेडबर्ड कंपनी के विमान हादसों की वजह कहीं जर्जर हो चुकी सिवनी जिले की सुखतरा हवाई पट्टी तो नहीं!
हवाई पट्टी को लेकर आखिर जिला कलेक्टर ने डीजीसीए व विमानन विभाग को क्यों लिखा कड़ा पत्र!


मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में स्थित सुखतरा हवाई पट्टी इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है। रेडबर्ड कंपनी के प्रशिक्षण विमानों से जुड़े बार-बार हो रहे हादसों ने न केवल विमानन सुरक्षा पर चिंता बढ़ा दी है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की भी पोल खोल दी है। एक के बाद एक दुर्घटनाओं ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर इन हादसों की असली वजह क्या है—क्या यह केवल तकनीकी खराबी और मानवीय भूल है, या फिर इसके पीछे जर्जर हो चुकी सुखतरा हवाई पट्टी की भूमिका है?

इसी आशंका को लेकर जिला कलेक्टर द्वारा नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और विमानन विभाग को लिखा गया कड़ा पत्र अब चर्चा का केंद्र बन गया है।

सुखतरा हवाई पट्टी पिछले कुछ वर्षों से पायलट प्रशिक्षण गतिविधियों के लिए उपयोग में लाई जा रही है। रेडबर्ड कंपनी द्वारा यहां प्रशिक्षु पायलटों को उड़ान अभ्यास कराया जाता है।

हालांकि, स्थानीय स्तर पर लंबे समय से यह शिकायत उठती रही है कि:

  • हवाई पट्टी का रनवे जर्जर हालत में है
  • आवश्यक लाइटिंग और नाईट लैंडिंग की व्यवस्था नहीं है
  • सुरक्षा मानकों का नियमित ऑडिट नहीं हो रहा
  • मौसम के अनुसार रनवे रखरखाव बेहद कमजोर है

इन शिकायतों के बावजूद प्रशिक्षण उड़ानों का सिलसिला लगातार जारी रहा।

लगातार हादसों ने बढ़ाई चिंता

बीते समय में रेडबर्ड कंपनी के प्रशिक्षण विमानों से जुड़े कई हादसे सामने आ चुके हैं। इनमें अधिकांश मामलों में प्रशिक्षु पायलट शामिल रहे, जो प्रशिक्षण उड़ान के दौरान दुर्घटना का शिकार हुए।

हालांकि, हर बार शुरुआती तौर पर इसे तकनीकी खराबी या पायलट की त्रुटि बताकर मामला शांत करने की कोशिश की गई, लेकिन बार-बार एक ही क्षेत्र में हादसों का होना गंभीर सवाल खड़े करता है।

वर्तमान स्थिति /Latest Developments

हालिया घटनाओं के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया। सिवनी जिला कलेक्टर ने डीजीसीए और विमानन विभाग को पत्र लिखकर सुखतरा हवाई पट्टी की स्थिति पर गहरी चिंता जताई।

पत्र में प्रमुख रूप से निम्न बिंदुओं का उल्लेख बताया जा रहा है:

  • हवाई पट्टी की भौतिक स्थिति जर्जर होना
  • रनवे पर दरारें और असमान सतह
  • सुरक्षा उपकरणों और संकेतकों की कमी
  • प्रशिक्षण विमानों के लिए अनुकूल बुनियादी ढांचे का अभाव

इस पत्र के बाद मामला अब केवल स्थानीय प्रशासन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राष्ट्रीय विमानन नियामक संस्थाओं के दायरे में आ गया है।

सुखतरा हवाई पट्टी की जमीनी हकीकत

स्थानीय जानकारों और क्षेत्रवासियों के अनुसार सुखतरा हवाई पट्टी लंबे समय से उपेक्षा का शिकार रही है।

  • रनवे की मरम्मत वर्षों से लंबित
  • बारिश के मौसम में जलभराव
  • आपातकालीन सेवाओं की सीमित उपलब्धता
  • सुरक्षा मानकों के अनुरूप घेराबंदी का अभाव

इन परिस्थितियों में नियमित प्रशिक्षण उड़ानों का संचालन अपने आप में जोखिम भरा माना जा रहा है।

प्रशासनिक और नियामक जिम्मेदारी पर सवाल

जिला कलेक्टर के पत्र ने डीजीसीए और विमानन विभाग की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुख्य सवाल यह है कि:

  • क्या हवाई पट्टी को उड़ान के लिए फिट घोषित करने से पहले पर्याप्त निरीक्षण हुआ?
  • क्या प्रशिक्षण उड़ानों के लिए अलग से सुरक्षा मानक तय किए गए थे?
  • क्या हादसों के बाद आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए गए?

अगर इन सवालों के जवाब संतोषजनक नहीं मिले, तो यह मामला बड़ी प्रशासनिक चूक के रूप में सामने आ सकता है।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

हवाई हादसों और कलेक्टर के पत्र के बाद स्थानीय स्तर पर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है।

  • जनप्रतिनिधियों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की
  • नागरिक संगठनों ने प्रशिक्षण उड़ानों पर अस्थायी रोक की बात कही
  • अभिभावकों में प्रशिक्षु पायलटों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी

सामाजिक स्तर पर यह मुद्दा अब केवल तकनीकी नहीं, बल्कि मानव जीवन से जुड़ा विषय बन गया है।

आंकड़े,तथ्य और विश्लेषण

यदि पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो:

  • एक ही क्षेत्र में कई प्रशिक्षण विमान हादसे
  • अधिकांश घटनाएं टेकऑफ या लैंडिंग के समय
  • मौसम और रनवे स्थिति की भूमिका संदिग्ध

विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रशिक्षण उड़ानों में जोखिम पहले से अधिक होता है, लेकिन कमजोर बुनियादी ढांचा इस जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है।

आम जनता और क्षेत्र पर असर

इन घटनाओं का असर केवल विमानन क्षेत्र तक सीमित नहीं है।

  • सिवनी जिले की छवि प्रभावित
  • स्थानीय लोगों में भय का माहौल
  • प्रशासन पर भरोसे में कमी
  • भविष्य में निवेश और विकास परियोजनाओं पर असर

लोगों का कहना है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।

भविष्य की संभावनाएं / आगे क्या?

अब सबकी निगाहें डीजीसीए और विमानन विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं।

संभावित कदम हो सकते हैं:

  • सुखतरा हवाई पट्टी का तकनीकी ऑडिट
  • प्रशिक्षण उड़ानों पर अस्थायी रोक
  • रनवे और बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण
  • जिम्मेदार अधिकारियों और संस्थाओं की जवाबदेही तय करना

यदि यह कदम सख्ती से उठाए जाते हैं, तो भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सकता है।

निष्कर्ष /Conclusion

रेडबर्ड कंपनी के विमानों से जुड़े हादसों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सिवनी जिले की सुखतरा हवाई पट्टी अब अनदेखी की स्थिति में नहीं है। जिला कलेक्टर द्वारा डीजीसीए और विमानन विभाग को लिखा गया कड़ा पत्र इस बात का संकेत है कि प्रशासन भी अब जमीनी सच्चाई को नजरअंदाज नहीं कर सकता।

यह मामला केवल एक कंपनी या एक हवाई पट्टी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे विमानन सुरक्षा तंत्र की परीक्षा है। यदि समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए गए, तो न केवल भविष्य के हादसों को रोका जा सकता है, बल्कि सिवनी जैसे जिलों में सुरक्षित और जिम्मेदार विमानन गतिविधियों का रास्ता भी प्रशस्त हो सकता है।