लंबे समय तक समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो भी रहे हैं एलएन सिंह
(ब्यूरो कार्यालय)
प्रयागराज (साई)। गुरुवार देर शाम, प्रयागराज के सिविल लाइन्स इलाके में होटल हर्ष के पास पत्रकार लक्ष्मी नारायण सिंह उर्फ पप्पू (54) पर जानलेवा हमला हुआ। घटना के बाद उन्हें तुरंत स्वारूप रानी नेहरू अस्पताल (एसआरएन) में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
– पुलिस ने बताया कि हमला चाकू या धारदार हथियार से किया गया था।
– घटना के कुछ ही देर बाद, रात में पुलिस ने मुख्य आरोपी का एनकाउंटर कर उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के दोनों पैरों में गोली लगी थी।
– पुलिस दो अन्य संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
– प्रारंभिक जानकारी यह है कि मृतक तथा आरोपी के बीच कुछ दिन पहले विवाद हुआ था।
पत्रकार एवं पृष्ठभूमि
लक्ष्मी नारायण सिंह, जिन्हें मीडिया जगत में “पप्पू” नाम से जाना जाता था, प्रयागराज के धूमनगंज थाना क्षेत्र की शकुंतला कुंज कालोनी के रहने वाले थे। उन्होंने लंबे समय तक पत्रकारिता में योगदान दिया।
वे हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंह के भतीजे भी थे। पुलिस ने इस तथ्य को घटना की गंभीरता का एक पहलू माना है।
साई न्यूज के ब्यूरो भी रहे हैं
एलएन सिंह प्रयागराज में समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया एवं इसकी साई न्यूज के ब्यूरो के बतौर भी लंबे समय तक काम कर चुके हैं। इस साल संपन्न हुए महाकुंभ से पहले उन्हें समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से बिदाई दे दी गई थी।
स्थल और समय
– स्थान: प्रयागराज, सिविल लाइन्स इलाके, होटल हर्ष के पास।
– समय: गुरुवार देर शाम। हमला होने के बाद तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया।
आरोपी की गिरफ्तारी एवं एनकाउंटर
– पुलिस ने बताया कि मुख्य आरोपी का नाम विसाल (Vishal) है। उसने Machhli Bazaar, खुडलाबाद से चाकू खरीदा था, जिसे हमले में इस्तेमाल किया गया।
– रात के समय घटना स्थल के पास एनकाउंटर हुआ, जिसमें उसे दोनों पैरों में तीन गोली लगी।
– पुलिस की टीम अन्य आरोपियों की तलाश में सक्रिय है।
motive-यानी वजह एवं पूछताछ
– पुलिस ने बताया कि मृतक व आरोपी के बीच कुछ दिन पहले किसी विवाद की सूचना है, जिसके कारण यह घटना हो सकती है। लेकिन वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है।
– पुलिस ने घटना स्थल के साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज व गवाहों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
पत्रकार सुरक्षा का प्रश्न
यह घटना पत्रकारों की सुरक्षा, विशेष कर उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में, एक गंभीर प्रश्न के रूप में सामने ले आई है। क्योंकि व्यक्ति जो खबर साझा करता है, वह खुद खतरे में हो सकता है।
– मीडिया संगठनों ने इस घटना की निंदा की है और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
– राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर दबाव है कि वे ऐसे मामलों में जल्दी तीव्रता से कार्रवाई करें, ताकि आने वाले समय में पत्रकारों को भय ना रहे।
पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया
प्रयागराज पुलिस तथा अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर अजय पाल शर्मा ने बताया कि वरिष्ठ अधिकारी तत्काल घटना स्थल पर पहुंचे, साक्ष्य जुटाए हैं, और आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने का दावा किया है।
उनका कहना है कि मृतक परिवार को सरकार की ओर से हर संभव मदद दी जाएगी। साथ ही इस मामले में कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सामाजिक-राजनीतिक संदर्भ
– प्रयागराज में मीडिया व पत्रकारिता का रोल महत्वपूर्ण रहा है, ऐसे माहौल में इस तरह की घटना एक चिंताजनक संकेत है।
– पत्रकारों पर हमले, हत्या या धमकियाँ लोकतंत्र की आवाज़ को दबाने का प्रयास हो सकते हैं।
– इस घटना ने पत्रकारों के कार्य के दौरान सुरक्षा-चेतावनी और उनके जोखिम को फिर से उजागर किया है।
– प्रशासन तथा मीडिया हाउस दोनों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि खतरा महसूस करने वाले पत्रकारों को उचित संरक्षण मिले।
क्या आगे होगा?
- पुलिस इस मामले में जल्द ही चार्जशीट दाखिल कर सकती है।
- अन्य आरोपी और षड्यंत्रकर्ता-सहायकों की गिरफ्तारी की संभावना है।
- पत्रकार सुरक्षा के लिए राज्य और केंद्र स्तर पर नीतियों पर पुनर्विचार की संभावना बढ़ सकती है।
- मीडियाकर्मियों तथा उनके परिजनों को सुरक्षा-प्रोटोकॉल मुहैया कराने की दिशा में प्रयास होंगे।
निष्कर्ष
इस दुखद घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि पत्रकारिता न सिर्फ सूचना पहुँचाने का माध्यम है, बल्कि जोखिम-से भरा पेशा भी बन सकता है। प्रयागराज में लक्ष्मी नारायण सिंह की हत्या, और रात में पुलिस द्वारा मुख्य आरोपी का एनकाउंटर, यह बताता है कि घटना के तुरंत बाद कार्रवाई हुई है लेकिन मूल कारण, आरोपी-मौत के पिछे जो नेटवर्क हो सकता है, वह अभी सामने आना बाकी है। ऐसे समय में सुरक्षा, न्याय और निष्पक्ष जांच पर विशेष ध्यान देना अनिवार्य है।
जितना तेज़ हम कार्रवाई करते हैं, उतना ही समाज यह विश्वास करेगा कि पत्रकारों के साथ कोई अन्याय नहीं होगा। इस मामले में हमें उम्मीद है कि दोषियों को तुरंत और न्यायपूर्वक सजा मिलेगी और पत्रकारों को संरक्षण तथा आज़ादी मिलेगी।

मूलतः प्रयागराज निवासी, पिछले लगभग 25 वर्षों से अधिक समय से नई दिल्ली में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय विनीत खरे किसी पहचान को मोहताज नहीं हैं.
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