(महुआ दत्ता)
कोलकता (साई)।फुटबॉल प्रेमियों के लिए लियोनेल मेसी का नाम किसी सपने से कम नहीं है। दुनिया के सबसे महान फुटबॉल खिलाड़ियों में शुमार मेसी की एक झलक पाने के लिए प्रशंसक हजारों किलोमीटर की यात्रा करने को तैयार रहते हैं। लेकिन कोलकाता में आयोजित मेसी कार्यक्रम वह ऐतिहासिक अवसर बनने के बजाय अव्यवस्था, गुस्से, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और प्रशासनिक विफलता का प्रतीक बन गया।
रविवार सुबह से ही सॉल्ट लेक स्टेडियम के बाहर हजारों की संख्या में जुटे दर्शकों को उम्मीद थी कि उन्हें अपने पसंदीदा खिलाड़ी को नजदीक से देखने का मौका मिलेगा। लेकिन जो हुआ, उसने कोलकाता की छवि को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कठघरे में खड़ा कर दिया।
लियोनेल मेसी भारत के तीन दिवसीय दौरे पर आए थे। इस दौरे का पहला पड़ाव कोलकाता था, जिसे लंबे समय से फुटबॉल की राजधानी कहा जाता रहा है। आयोजकों ने इस इवेंट को ऐतिहासिक बताते हुए भारी प्रचार किया।
- टिकट की कीमतें हजारों रुपये तक रखी गईं
- कई दर्शकों ने ₹10,000से₹14,000 तक खर्च किए
- दावा किया गया कि स्टेडियम में मेसी की परेड और दर्शकों से संवाद होगा
इसी भरोसे पर हजारों लोग सुबह से स्टेडियम पहुंच गए।
वर्तमान स्थिति /What Happened At Salt Lake Stadium
सुबह-सुबह मेसी कोलकाता पहुंचे और शहर में अपनी प्रतिमा का अनावरण किया। इसके बाद वे सॉल्ट लेक स्टेडियम पहुंचे, जहां पहले से ही भारी भीड़ मौजूद थी।
लेकिन जैसे ही मेसी स्टेडियम के भीतर आए, स्थिति बिगड़ने लगी।
- मेसी को वीआईपी घेरे में रखा गया
- राजनेताओं और गणमान्य लोगों से वे घिरे रहे
- आम दर्शकों को मेसी की स्पष्ट झलक नहीं मिल पाई
इससे नाराज दर्शकों ने नारेबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते गुस्सा हिंसक रूप लेने लगा।
हंगामा और तोड़फोड़ का दृश्य
भीड़ का आक्रोश स्टेडियम के अंदर साफ नजर आने लगा।
- कुर्सियां उछाली गईं
- पानी की बोतलें और अन्य सामान फेंका गया
- कुछ दर्शक मैदान में घुस गए
- स्टेडियम की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया
सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। पुलिस हालात संभालने में नाकाम दिखी और अंततः दंगा नियंत्रण बल को बुलाना पड़ा।
मेसी की एंट्री रही बेहद संक्षिप्त
स्थिति बिगड़ती देख आयोजकों ने मेसी की स्टेडियम परिक्रमा को बीच में ही रोक दिया। सुरक्षा कारणों से उन्हें तुरंत वहां से बाहर निकाल लिया गया।
- प्रशंसकों की उम्मीदें टूट गईं
- कई लोगों को लगा कि उनके साथ धोखा हुआ है
- गुस्से का रुख सीधे आयोजकों और प्रशासन की ओर हो गया
इसके बाद मेसी को सीधे एयरपोर्ट ले जाया गया, जहां से वे अपने अगले पड़ाव हैदराबाद के लिए रवाना हो गए।
आम जनता का गुस्सा और टिकट रिफंड की मांग
मेसी के जाने के बाद स्टेडियम में मौजूद लोग भड़क उठे।
- “पैसे वापस करो” के नारे लगे
- दर्शकों ने खराब व्यवस्था का आरोप लगाया
- कई परिवार और युवा खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे थे
लोगों का कहना था कि अगर मेसी को जनता के सामने लाने की व्यवस्था नहीं थी, तो इतने महंगे टिकट क्यों बेचे गए।
प्रशासनिक और राजनीतिक भूचाल
घटना के बाद राज्य सरकार और प्रशासन पर चौतरफा दबाव बढ़ गया।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से इस अव्यवस्था पर हैरानी जताई और माफी मांगी। उन्होंने कहा कि यह घटना कोलकाता की छवि के अनुरूप नहीं है।
- जांच के आदेश दिए गए
- सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच समिति बनाई गई
- जिम्मेदारी तय करने की बात कही गई
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
विपक्ष ने इस घटना को सरकार की नाकामी बताया।
- इसे “वैश्विक मंच पर शर्मिंदगी” करार दिया गया
- सरकार की आयोजन क्षमता पर सवाल उठे
- कहा गया कि यह पूरी तरह कुप्रबंधन का नतीजा है
“Kolkata Ashamed”बयान और सियासी हलचल
घटना के बीच सत्तारूढ़ दल के एक वरिष्ठ नेता का बयान सामने आया—
“कोलकाता शर्मसार है।”
इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। यह बयान न केवल प्रशासनिक विफलता को स्वीकार करता दिखा, बल्कि यह भी संकेत देता है कि सत्ताधारी दल खुद इस आयोजन से दूरी बना रहा है।
राज्यपाल की सख्त कार्रवाई
राज्यपाल ने इस पूरे मामले को “कोलकाता के खेलप्रेमियों के लिए काला दिन” बताया।
उन्होंने कई अहम निर्देश जारी किए, जिनमें शामिल थे:
- आयोजक के खिलाफ एफआईआर
- मुख्य आयोजक की गिरफ्तारी
- टिकट की पूरी राशि लौटाने का आदेश
- पुलिस और प्रशासन की भूमिका की जांच
इसके तुरंत बाद मुख्य आयोजक को गिरफ्तार कर लिया गया।
आंकड़े,तथ्य और विश्लेषण
- हजारों दर्शक स्टेडियम में मौजूद
- प्रति टिकट कीमत ₹5,000 से ₹14,000 तक
- भारी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद नियंत्रण फेल
- अंतरराष्ट्रीय स्तर की योजना का अभाव
विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल एक इवेंट की विफलता नहीं, बल्कि बड़े आयोजनों के लिए प्रशासनिक तैयारी की गंभीर कमी को उजागर करता है।
आम जनता पर असर
इस घटना का सबसे बड़ा असर आम दर्शकों पर पड़ा।
- आर्थिक नुकसान
- भावनात्मक निराशा
- शहर की प्रतिष्ठा पर आघात
कई प्रशंसकों ने कहा कि वे जिंदगी में पहली बार मेसी को देखने आए थे, लेकिन यह अनुभव उन्हें हमेशा नकारात्मक रूप में याद रहेगा।
भविष्य की संभावनाएं / आगे क्या?
अब सवाल यह है कि आगे क्या होगा?
- जांच रिपोर्ट में जिम्मेदारी तय होगी
- टिकट रिफंड की प्रक्रिया लागू होगी
- भविष्य के बड़े आयोजनों के लिए कड़े नियम बन सकते हैं
- सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन पर नए मानक तय हो सकते हैं
यह घटना आयोजकों और सरकार दोनों के लिए एक बड़ी सीख बन सकती है।
निष्कर्ष /Conclusion
कोलकाता में लियोनेल मेसी के कार्यक्रम ने जो होना था, वह उत्सव बन सकता था, लेकिन अव्यवस्था और कुप्रबंधन के कारण वह शर्मिंदगी में बदल गया। हजारों प्रशंसकों की उम्मीदें टूटीं, प्रशासन पर सवाल उठे और राजनीति गरमा गई।
यह मामला केवल एक इवेंट की विफलता नहीं, बल्कि यह बताता है कि वैश्विक स्तर के कार्यक्रमों के लिए केवल नाम बड़ा होना काफी नहीं, बल्कि तैयारी, पारदर्शिता और जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है। कोलकाता जैसे ऐतिहासिक और खेलप्रेमी शहर के लिए यह घटना चेतावनी है कि भविष्य में ऐसी चूक दोहराई नहीं जानी चाहिए।

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