केरल की राजनीति में ऐतिहासिक मोड़: तिरुवनंतपुरम नगर निगम में बीजेपी-एनडीए की जीत, चार दशक बाद एलडीएफ सत्ता से बाहर

केरल के तिरुवनंतपुरम नगर निगम चुनाव में ऐतिहासिक उलटफेर देखने को मिला है। चार दशकों से अधिक समय से सत्ता में रही एलडीएफ को हराकर बीजेपी-एनडीए ने निगम पर कब्जा कर लिया। 101 वार्डों में से 50 पर जीत दर्ज कर एनडीए ने केरल की शहरी राजनीति में बड़ा संदेश दिया है। यह परिणाम आगामी विधानसभा चुनावों से पहले प्रदेश की राजनीति की दिशा बदलने वाला माना जा रहा है।

(सुधीर नायर)

तिरूवनंतपुरम (साई)।केरल की राजनीति में शनिवार, 13 दिसंबर 2025 का दिन एक ऐतिहासिक मोड़ के रूप में दर्ज हो गया। स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों ने प्रदेश की सबसे अहम शहरी इकाई माने जाने वाले तिरुवनंतपुरम नगर निगम में सत्ता परिवर्तन की घोषणा कर दी। चार दशकों से अधिक समय तक लगातार निगम पर शासन करने वाली वामपंथी गठबंधन एलडीएफ को करारी शिकस्त देते हुए भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (बीजेपी-एनडीए) ने निगम की सत्ता अपने हाथ में ले ली।

यह जीत केवल एक नगर निगम की सत्ता तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे केरल की शहरी राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

तिरुवनंतपुरम नगर निगम लंबे समय से एलडीएफ का गढ़ माना जाता रहा है। बीते चार दशकों में वाम दलों की मजबूत संगठनात्मक पकड़ और शहरी मतदाताओं का भरोसा एलडीएफ के साथ बना रहा। वहीं बीजेपी की स्थिति एक दशक पहले तक बेहद सीमित थी।

  • लगभग दस वर्ष पहले बीजेपी केवल 6 वार्डों में सिमटी हुई थी।
  • 2015 में पार्टी ने पहली बार उल्लेखनीय बढ़त बनाई।
  • 2020 के चुनाव में यह बढ़त स्थिर रही और पार्टी आगे नहीं बढ़ सकी।

इसके बाद हुए उपचुनावों में भी बीजेपी को झटके लगे, जिससे यह माना जा रहा था कि पार्टी की शहरी पकड़ कमजोर पड़ रही है।

वर्तमान स्थिति /Latest Developments

2025 के स्थानीय निकाय चुनाव परिणामों ने सभी अनुमानों को झुठला दिया। 101 वार्डों वाले तिरुवनंतपुरम नगर निगम में बीजेपी-एनडीए ने 50 वार्डों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया।

  • बीजेपी-एनडीए: 50 वार्ड
  • एलडीएफ: 29 वार्ड
  • यूडीएफ: 19 वार्ड

परिणामों की शुरुआती गिनती के दौरान मुकाबला कड़ा नजर आया और कुछ समय के लिए त्रिशंकु स्थिति की संभावना भी दिखी, लेकिन जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ी, एनडीए ने बढ़त बनानी शुरू की और अंत तक इसे कायम रखा।

बीजेपी के लिए बड़ा टर्नअराउंड

यह जीत बीजेपी के लिए असाधारण मानी जा रही है। एक दशक पहले जहां पार्टी का अस्तित्व नगण्य था, वहीं अब उसने केरल के सबसे महत्वपूर्ण नगर निगम पर कब्जा कर लिया है।

  • पार्टी ने उन वार्डों में भी जीत दर्ज की जहां पहले कभी जीत नहीं मिली थी।
  • जिन वार्डों में बीजेपी पहले से मजबूत थी, वहां जीत का अंतर और बढ़ा।
  • पिछले चुनावों में मिली स्थिरता इस बार निर्णायक बढ़त में बदली।

यह संकेत देता है कि शहरी मतदाताओं के बीच बीजेपी की स्वीकार्यता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया और राष्ट्रीय महत्व

इस जीत का महत्व केवल राज्य स्तर तक सीमित नहीं रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसे केरल की राजनीति में “वाटरशेड मोमेंट” बताया।
उनकी प्रतिक्रिया ने यह स्पष्ट कर दिया कि पार्टी इस परिणाम को राष्ट्रीय राजनीति के संदर्भ में भी अहम मान रही है। यह जीत बीजेपी के “विकसित केरल” के नैरेटिव को मजबूती देने वाली मानी जा रही है।

यूडीएफ की वापसी,लेकिन कीमत एलडीएफ ने चुकाई

कांग्रेस के नेतृत्व वाला संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) भी इस चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करता नजर आया।

  • 2015 में यूडीएफ की सीटें 40 से घटकर 21 रह गई थीं।
  • 2020 में यह आंकड़ा और गिरकर 10 तक पहुंच गया।
  • 2025 में यूडीएफ ने 19 सीटें जीतकर वापसी की।

हालांकि, इस बढ़त का सबसे बड़ा नुकसान एलडीएफ को उठाना पड़ा, क्योंकि यूडीएफ द्वारा जीती गई 19 में से 12 सीटें पहले एलडीएफ के पास थीं।

एलडीएफ के लिए चौंकाने वाली हार

एलडीएफ खेमे में चुनाव से पहले आत्मविश्वास नजर आ रहा था। पिछली बार 51 सीटें जीतने के बाद इस बार और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई जा रही थी। लेकिन नतीजे इसके बिल्कुल विपरीत रहे।

  • कई ऐसे वार्ड हार गए जहां एलडीएफ कभी नहीं हारी थी।
  • शहरी क्षेत्रों में पार्टी की पकड़ कमजोर पड़ती दिखी।
  • निगम से सत्ता का जाना वाम दलों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

विशेष रूप से मुठाडा वार्ड का परिणाम चर्चा में रहा, जहां लंबे समय से एलडीएफ का दबदबा रहा था।

प्रमुख उम्मीदवारों का प्रदर्शन

चुनाव परिणामों में कई प्रमुख चेहरे सुर्खियों में रहे।

  • बीजेपी की आर. श्रीलेखा ने सस्थामंगलम वार्ड से 600 से अधिक मतों से जीत दर्ज की।
  • पूर्व कांग्रेस विधायक के.एस. साबरीनाधन ने कौडियार वार्ड से बेहद करीबी मुकाबले में जीत हासिल की।
  • एलडीएफ के कई वरिष्ठ नेता अपने-अपने वार्डों से जीत दर्ज करने में सफल रहे, लेकिन पार्टी को समग्र रूप से नुकसान हुआ।

कुछ मामलों में चुनाव आचार संहिता उल्लंघन और विवाद भी चर्चा का विषय बने, हालांकि इसका परिणामों पर कोई बड़ा असर नहीं दिखा।

प्रशासनिक और राजनीतिक प्रभाव

तिरुवनंतपुरम नगर निगम पर सत्ता परिवर्तन के दूरगामी प्रभाव माने जा रहे हैं।

  • शहरी प्रशासन की दिशा बदलने की संभावना
  • विकास प्राथमिकताओं में बदलाव
  • नगर निगम की नीतियों में नया दृष्टिकोण

राजनीतिक दृष्टि से यह परिणाम आगामी विधानसभा चुनावों से पहले एलडीएफ के लिए चेतावनी और बीजेपी के लिए मनोबल बढ़ाने वाला है।

आंकड़े,तथ्य और विश्लेषण

यदि आंकड़ों के आधार पर विश्लेषण किया जाए तो यह स्पष्ट होता है कि:

  • शहरी मतदाताओं में सत्ता विरोधी रुझान मजबूत हुआ।
  • बीजेपी ने संगठनात्मक मजबूती का लाभ उठाया।
  • एलडीएफ को शहरी इलाकों में रणनीति पर पुनर्विचार करना होगा।

यह चुनाव परिणाम केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक संकेत देता है।

आम जनता पर असर

नगर निगम की सत्ता बदलने से आम नागरिकों की उम्मीदें भी बदली हैं।

  • शहरी विकास योजनाओं में नए प्रयोग की उम्मीद
  • बुनियादी सुविधाओं पर फोकस
  • पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग

जनता अब यह देखना चाहती है कि नई सत्ता अपने वादों को किस हद तक जमीन पर उतार पाती है।

भविष्य की संभावनाएं / आगे क्या?

आगामी समय में यह जीत केरल की राजनीति को नई दिशा दे सकती है।

  • विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।
  • एलडीएफ अपनी रणनीति में बदलाव कर सकती है।
  • बीजेपी शहरी के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी विस्तार की कोशिश करेगी।

यह स्पष्ट है कि 2025 के स्थानीय निकाय चुनावों ने 2026 की राजनीतिक तस्वीर की झलक दिखा दी है।

Conclusion /निष्कर्ष

तिरुवनंतपुरम नगर निगम में बीजेपी-एनडीए की जीत केरल की राजनीति में एक ऐतिहासिक घटना के रूप में सामने आई है। चार दशकों तक सत्ता में रही एलडीएफ की हार और बीजेपी की निर्णायक बढ़त ने शहरी मतदाताओं के बदलते रुझान को उजागर किया है। यह परिणाम न केवल स्थानीय प्रशासन में बदलाव का संकेत है, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों के लिए एक मजबूत संदेश भी है। आने वाले समय में यह जीत केरल की राजनीति की दिशा और दशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।