(विनीत खरे)
नई दिल्ली (साई)। भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापार तनाव के दौर में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है, जिसमें उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थिति में “राजनीति,अर्थव्यवस्था पर हावी हो रही है।”
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने हाल ही में भारतीय आयातों पर 50प्रतिशत तक के भारी टैरिफ लगाए हैं और दोनों देशों के बीच सक्रिया व्यापार वार्ताओं के बावजूद कई मुद्दों पर मतभेद कायम हैं।
कोलकाता केIIM-Cमें मिलाHonorary Doctorate,दिया महत्वपूर्ण संदेश
शनिवार को कोलकाता में आयोजित कार्यक्रम में IIM-Calcutta ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को Honorary Doctorate से सम्मानित किया।
सम्मान ग्रहण करने के बाद अपने संबोधन में उन्होंने न सिर्फ देश के आर्थिक-कूटनीतिक भविष्य पर रोशनी डाली, बल्कि दुनिया की बदलती भू-राजनीतिक संरचना का विश्लेषण भी किया।
उन्होंने कहा—
“यह वह दौर है जब राजनीति खुलकर अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही है। इस अनिश्चित दुनिया में भारत को अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सप्लाई स्रोतों में विविधता लानी ही होगी।”
अमेरिका पर सीधी नहीं,पर स्पष्ट‘इशारा’
जयशंकर के बयान को विशेषज्ञ अमेरिका पर एक‘सॉफ्ट लेकिन स्पष्ट’संकेत मान रहे हैं।
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारतीय निर्यातों पर भारी टैरिफ लगाने की घोषणा की, जिसके बाद भारत की कई उद्योग शाखाओं पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई थी।
जयशंकर ने अमेरिकी नीति को “एक नई एप्रोच” करार दिया और कहा—
“अमेरिका, जो लंबे समय तक वैश्विक व्यापार व्यवस्था का आधार रहा, अब देशों से एक-एक करके अलग-अलग शर्तों पर बातचीत कर रहा है। यह दुनिया के लिए एक नया परिदृश्य है।”
India-USव्यापार वार्ताएँ—दो पटरियों पर आगे बढ़ती बातचीत
भारत और अमेरिका अभी दो अलग-अलग स्तरों पर व्यापार संवाद कर रहे हैं—
1.टैरिफ विवाद समाधान
जहाँ भारत अमेरिका के 50% शुल्क से राहत चाहता है, वहीं अमेरिका भारतीय बाजार में कृषि, हाई-टेक और फार्मा सेक्टर में अधिक प्रवेश चाहता है।
2.व्यापक व्यापार समझौता (Comprehensive Trade Agreement)
दोनों देश 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को500अरब डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य रखते हैं।
वर्तमान व्यापार लगभग 191अरब डॉलर का है।
भारत की प्राथमिकताएँ
- भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए वीजा और गतिशीलता के नियम सरल हों
- डिजिटल ट्रेड और डेटा के नियम स्पष्ट हों
- अमेरिकी बाजार में भारत के टेक्नोलॉजी व मैन्युफैक्चरिंग की बेहतर पहुँच
अमेरिका की प्राथमिकताएँ
- भारतीय कृषि बाजार तक अधिक प्रवेश
- हाई-टेक सेक्टर में बड़े अवसर
- डेटा, क्लाउड और डिजिटल अर्थव्यवस्था में अधिक नियम-निर्धारण अधिकार
“भारत ने50%अमेरिकी टैरिफ का सबसे बुरा प्रभाव टाल दिया”
सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत ने हालांकि कुछ हद तक नुकसान झेला, लेकिन:
- निर्यात अनुमानित रूप से उतना नहीं गिरा
- कई व्यापार सेक्टरों ने वैकल्पिक बाजारों में प्रवेश किया
- भारत “अमेरिका के साथ धैर्य से” आगे की वार्ता को देख रहा है
यह रणनीति दर्शाती है कि भारत किसी भी उतावलेपन में नहीं है और व्यापार हितों को धीरे-धीरे लेकिन मजबूती से आगे बढ़ा रहा है।
चीन पर भी कटाक्ष—“लंबे समय से अपने नियमों पर खेल रहा”
एस. जयशंकर ने अपने भाषण में चीन का नाम लिए बिना उसकी रणनीति पर भी चोट की।
उन्होंने कहा—
“कुछ देश लंबे समय से अपने नियमों पर काम कर रहे हैं, और अभी भी ऐसा ही कर रहे हैं, जिससे दुनिया का परिदृश्य और अधिक बिखरा हुआ हो रहा है।”
विश्लेषकों के अनुसार यह टिप्पणी वैश्विक सप्लाई चेन में चीन की एकाधिकारवादी पकड़ को लेकर है, जहाँ दुनिया का लगभग एक-तिहाई उत्पादन चीन में केंद्रित है।
सप्लाई चेन रेज़िलिएंस—भारत की प्रमुख रणनीति
जयशंकर ने बताया कि सप्लाई चेन रुकावटें अब सिर्फ—
- भू-राजनीति
- युद्ध
- व्यापार प्रतिबंध
- जलवायु परिवर्तन
के कारण ही नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति-संरचनाओं के बदलते स्वरूप के कारण भी आती हैं।
इसलिए भारत इन दिशाओं में आगे बढ़ रहा है:
1.इन्फ्रास्ट्रक्चर का तीव्र विकास
- हाईवे, एक्सप्रेसवे
- मल्टी-मोडल फ्रेट कॉरिडोर
- बिजली उत्पादन क्षमता में वृद्धि
- बंदरगाह और एयरपोर्ट विस्तार
2.विनिर्माण का विस्तार (Manufacturing Expansion)
- सेमीकंडक्टर्स
- इलेक्ट्रिक वाहन
- ड्रोन तकनीक
- बायोसाइंस
जयशंकर के शब्दों में—
“एक बड़े राष्ट्र के पास विशाल औद्योगिक आधार होना अनिवार्य है।”
भारत की आत्मनिर्भरता यात्रा—‘एक्टिव डिप्लोमेसी’का दौर
उन्होंने कहा कि भारत अब पहले जैसा नहीं रहा—
“भारत अब passive diplomacy नहीं करता। भारत अब active diplomacy के दौर में है—जहाँ हम दुनिया को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।”
भारत की आत्मनिर्भरता नीति में यह शामिल है:
- Make in India
- PLI योजनाएँ
- निर्यात प्रोत्साहन
- नई तकनीक आधारित उद्योग
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत—‘Hedging Strategy’
जयशंकर ने कहा कि दुनिया भर के देश अब—
- रणनीतिक अनिश्चितता
- वैश्विक शक्ति संघर्ष
- आपूर्ति सुरक्षा जोखिम
के बीच Hedging Strategy अपना रहे हैं।
भारत भी इस बदलते परिदृश्य में—
- अमेरिका
- यूरोप
- एशिया
- मध्य-पूर्व
सभी के साथ संतुलित संबंधों की रणनीति पर चल रहा है।
निष्कर्ष (Conclusion)
एस. जयशंकर के बयान ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था का समीकरण तेजी से बदल रहा है।
भारत इस परिवर्तन के केंद्र में है और—
- सप्लाई चेन विविधता
- आत्मनिर्भरता
- मजबूत कूटनीति
- औद्योगिक विस्तार
- व्यापार हितों की रक्षा
को अपनी प्राथमिकता बना रहा है।
अमेरिका के 50% टैरिफ से लेकर चीन की रणनीतियों और वैश्विक प्रतिस्पर्धा तक, भारत अब अधिक परिपक्व और आत्मविश्वासी तरीके से आगे बढ़ रहा है।
जयशंकर का यह बयान न सिर्फ मौजूदा व्यापार तनाव पर टिप्पणी है, बल्कि आने वाले वर्षों में भारत की वैश्विक आर्थिक-कूटनीतिक दिशा का रोडमैप भी प्रस्तुत करता है।

मूलतः प्रयागराज निवासी, पिछले लगभग 25 वर्षों से अधिक समय से नई दिल्ली में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय विनीत खरे किसी पहचान को मोहताज नहीं हैं.
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