🌊 मॉन्था तूफान का तांडव: काकीनाडा तट से शुरू हुआ लैंडफॉल
(दीपक अग्रवाल)
मुंबई (साई)। आंध्र प्रदेश के काकीनाडा तट पर मंगलवार देर शाम चक्रवात मॉन्था (Cyclone Montha) ने दस्तक दे दी।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न यह गंभीर चक्रवाती तूफान (Severe Cyclonic Storm) अब आंध्र प्रदेश तट को पार कर रहा है।
इसकी अधिकतम हवा की गति 90से 100किलोमीटर प्रति घंटा तक दर्ज की गई है, जबकि झोंकों की रफ्तार 110 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुँच सकती है।
IMD ने बताया कि यह तूफान अगले 3–4 घंटों में मछलीपट्टनम (Machilipatnam) और कालींगपट्टनम (Kalingapatnam) के बीच उत्तर–उत्तर पश्चिम दिशा में आगे बढ़ेगा।
⚠️ प्रभावित क्षेत्र और सरकारी सतर्कता
चक्रवात मॉन्था का प्रभाव मुख्य रूप से निम्न जिलों में गंभीर रहने की संभावना जताई गई है—
- काकीनाडा (Kakinada)
- कृष्णा (Krishna)
- एलुरु (Eluru)
- पूर्व गोदावरी (East Godavari)
- पश्चिम गोदावरी (West Godavari)
- डॉ. बी.आर. अम्बेडकर कोनसीमा ( BR Ambedkar Konaseema)
- अल्लूरी सीताराम राजू जिला (Alluri Sitarama Raju)
इन सभी जिलों में राज्य सरकार ने वाहनों की आवाजाही मंगलवार रात 8:30बजे से बुधवार सुबह 6:00बजे तक रोकने के आदेश जारी किए हैं।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, चक्रवात का असर 22जिलों के 403मंडलों तक पहुँच सकता है।
🌧️ तेज़ बारिश और जनजीवन पर असर
IMD ने चेतावनी दी है कि चक्रवात के कारण भारी से अत्यधिक भारी वर्षा (Heavy to Very Heavy Rainfall) की संभावना है।
मुख्य रूप से कोस्टल आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, दक्षिण छत्तीसगढ़, और ओडिशा के कई हिस्सों में अगले 48 घंटों तक मौसम बिगड़ा रहेगा।
मंगलवार दोपहर तक दर्ज वर्षा के अनुसार—
- नेल्लोर (Nellore) जिले के उलवपाडु में 6 सेमी वर्षा,
- कवाली (Kavali) में 2 सेमी,
- डगदर्थी (Dagadarthi) में 12 सेमी,
- सिंगरायकोंडा (Singarayakonda) में 5 सेमी,
- बी. कोडुर ( Kodur) में 6 सेमी,
- जबकि विशाखापट्टनम (Visakhapatnam) और तुनी (Tuni) में 2 सेमी वर्षा दर्ज की गई।
🌪️ क्या है “मॉन्था” नाम का अर्थ?
दिलचस्प बात यह है कि “Montha” नाम थाईलैंड द्वारा सुझाया गया है।
थाई भाषा में इसका अर्थ होता है — “एक सुगंधित फूल” (A Fragrant Flower)।
लेकिन इस समय यह नाम भारत के दक्षिण–पूर्वी तटों पर प्राकृतिक संकट का प्रतीक बन गया है।
🚨 बचाव और राहत तैयारियाँ
राज्य सरकार और प्रशासन ने आपात स्थिति से निपटने के लिए कई स्तरों पर तैयारियाँ की हैं।
- 1,447अर्थ मूवर्स (earthmovers) तैयार रखे गए हैं।
- 321ड्रोन निगरानी के लिए तैनात किए गए हैं।
- 1,040चेनसॉ (chainsaws) पेड़ गिरने पर रास्ता साफ़ करने के लिए तैयार हैं।
- 81वायरलेस टावर और 21हाई लाइट लैम्प स्थापित किए गए हैं ताकि संचार व्यवस्था बाधित न हो।
राज्यभर में लगभग 3.6करोड़ लोगों को अलर्ट मैसेज (SMS Alerts) भेजे गए हैं।
प्रशासन ने समुद्र तटों के पास बसे ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित (Evacuate) करने के निर्देश दिए हैं।
🌾 किसानों के लिए खतरे की घंटी
IMD ने चेताया है कि यह चक्रवात धान और सब्ज़ियों की खड़ी फसलों को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है।
विशेष रूप से निचले इलाकों में जलभराव के कारण खेतों में अत्यधिक नमी से फसलें सड़ सकती हैं।
कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि
“जहाँ भी संभव हो, खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था करें।”
🌀 बंगाल की खाड़ी में चक्रवातों का इतिहास
बंगाल की खाड़ी भारत के सबसे सक्रिय चक्रवातीय क्षेत्र (Cyclone Zone) में से एक है।
हर साल मई और अक्टूबर–नवंबर के महीनों में यहाँ 2से 3बड़े चक्रवात उत्पन्न होते हैं।
पिछले कुछ वर्षों में—
- 2019का फानी तूफान (Cyclone Fani),
- 2020का अम्फान (Amphan),
- 2021का यास (Yaas),
- और अब 2025का मॉन्था (Montha)
ने बंगाल की खाड़ी के तटीय राज्यों को गहरे स्तर पर प्रभावित किया है।
📡 मौसम विभाग की सलाह और अलर्ट स्तर
भारतीय मौसम विभाग ने तटीय जिलों में रेड अलर्ट (Red Alert) जारी किया है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले 24 घंटों में मॉन्था की तीव्रता धीरे-धीरे कम होगी,
परंतु भारी वर्षा और तेज़ हवाएँ बुधवार दोपहर तक बनी रहेंगी।
लोगों को घरों के अंदर रहने, बिजली उपकरणों से दूरी बनाए रखने और
स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
🏘️ राहत शिविर और पुनर्वास कार्य
राज्य सरकार ने प्रभावित जिलों में अस्थायी राहत शिविर (Relief Camps) बनाए हैं।
यहाँ लोगों के लिए भोजन,पीने का पानी,दवाइयाँ और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था की गई है।
स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला अस्पतालों को 24×7इमरजेंसी मोड पर रखा है।
📞 हेल्पलाइन नंबर जारी
सरकार ने नागरिकों की सहायता के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं —
- राज्य आपदा नियंत्रण कक्ष: 1070
- जिला आपदा नियंत्रण: 1077
- फायर एंड रेस्क्यू सर्विस: 101
- एम्बुलेंस सेवा: 108
🌍 अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की निगरानी
जापान मौसम एजेंसी (JMA) और अमेरिकी NOAAसैटेलाइट सिस्टम भी
मॉन्था की दिशा और गति पर नज़र रख रहे हैं।
दोनों एजेंसियों ने इसे “Severe Category” में वर्गीकृत किया है।
🔚 निष्कर्ष (Conclusion)
चक्रवात मॉन्था ने आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में अपनी तीव्रता दिखाना शुरू कर दी है।
सरकार और प्रशासन ने राहत एवं बचाव की पूरी तैयारियाँ कर रखी हैं,
परंतु यह आवश्यक है कि नागरिक सतर्क रहें,अफवाहों पर ध्यान न दें,
और केवल आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें।
प्राकृतिक आपदाओं का सामना केवल सरकारी योजनाओं से नहीं,
बल्कि जनसहयोग और अनुशासन से भी संभव है।
अगले 24 घंटे आंध्र प्रदेश और पड़ोसी राज्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।

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