भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का इंतज़ार अब अंतिम दौर में! 15 दिसंबर तक हो सकता है ऐलान, प्रहलाद जोशी और ओबीसी चेहरे पर जोर

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को लेकर लंबे समय से चल रही खोज अब निर्णायक मोड़ पर दिखाई दे रही है। सूत्रों के अनुसार 15 दिसंबर तक नाम की घोषणा संभव है, जबकि सहमति न बनने पर प्रक्रिया एक माह टल भी सकती है। ओबीसी चेहरे पर विचार तेज है, पर सहमति न बनी तो प्रहलाद जोशी मजबूत दावेदार के रूप में उभर रहे हैं। “समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया” के अनुसार दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व की बैठक के बाद हलचल और तेज हो गई है।

दो सालों से कार्यवाहक बने हैं,नड्डा, 15 तक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम की हो सकती है घोषणा . . .

अगर सहमति नहीं बनी तो एक महीने का और करना पड़ सकता है भाजपा के नए अध्यक्ष के नाम के लिए इंतजार . . .

(लिमटी खरे)

भारतीय जनता पार्टी, जिसे विश्व की सबसे बड़ी सक्रिय कार्यकर्ताओं वाली राजनीतिक पार्टी माना जाता है, इस समय अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन को लेकर निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। वर्तमान अध्यक्ष जे.पी. नड्डा का कार्यकाल 20 जनवरी 2024 को समाप्त हो गया था, जिसके बाद वे लगभग दो वर्षों से कार्यवाहक अध्यक्ष की भूमिका निभा रहे हैं। पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और भविष्य की राजनीतिक रणनीतियों को देखते हुए नेतृत्व बदलाव को अब आवश्यक माना जा रहा है।

समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि बुधवार को दिल्ली स्थित संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, वर्तमान अध्यक्ष जे.पी. नड्डा और संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। करीब एक घंटे चली इस मीटिंग में राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव पर गहन मंथन हुआ। इस बैठक के बाद संकेत मिलने लगे कि पार्टी अब नाम का ऐलान करने की स्थिति में है और प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है।

ओबीसी नेता की चर्चा चरम पर,पर बैकअप के रूप में प्रहलाद जोशी सबसे आगे

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों से छनकर बाहर आ रही खबरों के अनुसार भाजपा संगठन एक मजबूत ओबीसी चेहरे को आगे लाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

इसके पीछे दो प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं—

  • 2026और2027के बड़े चुनाव, जिनमें ओबीसी वोट बैंक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
  • भाजपा का सामाजिक समीकरण, जिसे पार्टी लगातार मजबूत करती चली आई है।

हालाँकि, ओबीसी नामों पर अंतिम सहमति न बन पाने की स्थिति में कर्नाटक के दिग्गज नेता और केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी को पार्टी की पहली पसंद माना जा रहा है।

कौन हैं प्रहलाद जोशी?

  • उम्र: मात्र 63 वर्ष
  • जन्म: 27 नवंबर 1962
  • वर्ग: ब्राह्मण
  • राजनीतिक अनुभव: लंबे समय से संगठन और संसदीय प्रक्रियाओं में सक्रिय
  • केंद्रीय नेतृत्व के विश्वसनीय चेहरों में शामिल
  • साफ-सुथरी छवि, विवादों से दूर

सूत्र बताते हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS)की ओर से भी उनके नाम को अनौपचारिक हरी झंडी मिलती दिखाई दे रही है

“साई फीचर्स” को मिले इनपुट के अनुसार जोशी को एक संतुलित, परिपक्व और हर वर्ग के लिए स्वीकार्य नेता माना जाता है। यही कारण है कि यदि ओबीसी विकल्प पर सहमति नहीं बनती, तो प्रहलाद जोशी लगभग निश्चित दावेदार माने जा रहे हैं।

खर माह बनने जा रहा है निर्णायक कारक

अध्यक्ष घोषित करने में देरी का एक रोचक कारण भी सामने आया है—
हिंदू पंचांग के अनुसार16दिसंबर से शुरू हो रहा खर माह (धनु संक्रांति से मकर संक्रांति तक)।

परंपरा के अनुसार:

  • इस अवधि में शुभ कार्य नहीं किए जाते
  • नए नेतृत्व की घोषणा को शुभारंभ माना जाता है, इसलिए पार्टी इस अवधि से बचना चाहती है।

इसीलिए “समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया” को सूत्रों ने बताया कि पार्टी15दिसंबर तक नाम घोषित कर सकती है
अगर सहमति नहीं बनी, तो फैसला खरमास के बाद एक महीने आगे खिसक सकता है।

2026चुनावी सालनए अध्यक्ष की बड़ी भूमिका

वर्ष 2026 में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पांडिचेरी जैसे राज्यों में चुनाव होने वाले हैं।

इन राज्यों में—

  • विविध सामाजिक समीकरण
  • क्षेत्रीय पार्टियों का प्रभाव
  • स्थानीय स्तर पर मजबूत नेतृत्व की जरूरत

इन सभी पहलुओं को देखते हुए पार्टी चाहती है कि नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को पर्याप्त समय मिले ताकि वे आगामी राज्यों में संगठन को पुनर्गठित कर सकें और चुनावी रणनीतियों को समय रहते अमल में ला सकें।

गृह मंत्री अमित शाह का हालिया बयान भी इस बात की ओर इशारा करता है कि भाजपा नेतृत्व परिवर्तन को लेकर गंभीर है, पर अभी आधिकारिक घोषणा से बच रही है।

संभावित नामों की लंबी सूचीकौन कितना आगे?

भाजपा के अंदर जिन नामों पर गहन चर्चा है, उनमें शामिल हैं—

  • धर्मेंद्र प्रधान
  • शिवराज सिंह चौहान
  • भूपेंद्र यादव
  • विनोद तावड़े
  • अर्जुन मेघवाल
  • देवेंद्र फडणवीस
  • मनोहर लाल खट्टर
  • निर्मला सीतारमण
  • डी. परंदेश्वरी
  • वनित श्रीनिवासन

हालाँकि, राजनीतिक समीकरण और संगठनात्मक संकेतों को देखते हुए वर्तमान में सबसे वज़नदार नाम—
ओबीसी चेहरा (अगर सहमति बने)
या
प्रहलाद जोशी (अगर सहमति न बने)
बताए जा रहे हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे के प्रभाव की काट?

“समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया” को वरिष्ठ सूत्रों ने बताया कि भाजपा नेतृत्व कर्नाटक से आने वाले किसी सशक्त चेहरे को राष्ट्रीय स्तर पर लाने का मन बना सकता है।

इसके पीछे तर्क यह है—

  • कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे कर्नाटक के प्रभावशाली नेता हैं।
  • उनकी काट के रूप में भाजपा प्रहलाद जोशी जैसे चेहरे पर दांव लगा सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह कदम भाजपा को दक्षिण भारत में एक नई मजबूती प्रदान कर सकता है।

भाजपा मुख्यालय में अचानक की गई सफाई से बढ़ी चर्चा

बीते शनिवार को भाजपा मुख्यालय में एक दिलचस्प घटना घटी।

भाजपा के चुनाव अधिकारी के. लक्ष्मण के कक्ष को खोलकर पूरे कमरे की गहन सफाई कराई गई।

यह कक्ष कई महीनों से बंद था और धूल खा रहा था।
अचानक की गई यह सफाई पूरे मुख्यालय में चर्चा का विषय बन गई—

  • क्या चुनाव अधिकारी को जल्द सक्रिय होना है?
  • क्या प्रक्रिया अंतिम चरण में है?
  • क्या नेतृत्व परिवर्तन की घोषणा बस आने ही वाली है?

संगठन से जुड़े लोग इसे “बड़ा संकेत” मान रहे हैं।

नड्डा को बार-बार दिए गए सेवा विस्तार का अंत?

वर्तमान अध्यक्ष जे.पी. नड्डा को पार्टी ने कई बार सेवा विस्तार दिया।
कारण स्पष्ट था—

  • लोकसभा चुनाव
  • राजनीतिक स्थिरता
  • नरेंद्र मोदी नेतृत्व के साथ संतुलन

लेकिन अब पार्टी नई ऊर्जा और नए चेहरे को जिम्मेदारी देने के मूड में दिख रही है।
संगठन में व्यापक बदलाव और नए नेतृत्व की जरूरत पर लगभग सहमति बन चुकी है।

पार्टी की नई दिशायुवाओं और संगठन विस्तार पर फोकस

भाजपा आने वाले वर्षों में—

  • बूथ स्तर पर नए कार्यकर्ताओं का विस्तार
  • डिजिटल रणनीति
  • सामाजिक अभियानों की नई रूपरेखा
  • दक्षिण और पूर्वोत्तर में आधार विस्तार

जैसे मुद्दों पर ज़ोर देने जा रही है।
ऐसे में एक सक्रिय, स्वीकार्य और संतुलित अध्यक्ष की आवश्यकता और अधिक बढ़ गई है।

भारतीय जनता पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चा अब अपने निर्णायक बिंदु पर है।
15 दिसंबर से पहले नाम आने की संभावनाएँ ज्यादा हैं, क्योंकि खर माह के चलते पार्टी शुभ समय का ध्यान रखना चाहती है।

यदि ओबीसी नाम पर सर्वसम्मति बनती है, तो भाजपा सामाजिक समीकरण के बड़े संदेश के रूप में इसे पेश कर सकती है।
लेकिन यदि सहमति न बने, तो प्रहलाद जोशी जैसे अनुभवी और सशक्त नेता का नाम लगभग तय माना जा रहा है।

“साई फीचर्स” और “समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया” के विश्लेषण के अनुसार भाजपा इस बार ऐसा चेहरा लाना चाहती है जो 2026 के चुनावों से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर संगठन को नई गति दे सके।

अब देश की निगाहें भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर टिकी हैं, और हर राजनीतिक हलचल पर गहरी नजर रखी जा रही है।

 

विश्व की सबसे ज्यादा कार्यकर्ताओं की पार्टी का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए खोज अभी समाप्त होती नहीं दिख रही है। वर्तमान अध्यक्ष जे.पी. नड्डा का कार्यकाल 20 जनवरी 2024 को पूरा होने के बाद लगभग दो सालों से उनके विकल्प की खोज जारी है।

भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि बीते बुधवार को देश की राजनैतिक राजधानी दिल्ली के संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और संगठन महामंत्री बीएल संतोष के बीच एक अहम बैठक हुई। करीब एक घंटे तक चली इस बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष के चुनाव को लेकर गहन चर्चा हुई। इस बैठक के बाद ही यह संकेत मिलने लगे कि पार्टी अब जल्द नाम का ऐलान कर सकती है।

भाजपा के अंदरखाने से छन छन कर बाहर आ रही खबरों पर अगर यकीन किया जाए तो पार्टी के अंदर भाजपा के नए राष्ट्रीय की कुर्सी पर किसी ओबीसी नेता के बैठने की चर्चा जोरों पर हैं, लेकिन अगर पार्टी में ओबीसी नेता के नाम पर सहमति नहीं बनती है तो उन परिस्थितियों में में कर्नाटक से आने वाले केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी पहली पसंद हो सकते हैं। प्रहलाद जोशी के साथ अनेक सकारात्मक पहलू जुड़े हुए हैं। उनकी आयु अभी 63 साल है। 27 नवंबर, 1962 के जन्में प्रहलादजोशी मूलतः ब्राह्मण हैं। उनके नाम पर संघ मुख्यालय की हरी झंडी भी संभावित दिख रही है।

आने वाला 2026 रहेगा चुनावी साल!

सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को आगे बताया कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर यह अटकलें भी चल रही हैं कि पार्टी खर माह में अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम की घोषणा नहीं करने वाली। इस साल धनु संक्रांति मंगलवार 16 दिसंबर को पड़ रही है और उसी दिन से खर माह का आगाज होगा जो मकर संक्रांति पर समाप्त होगा। खरमास में शुभकार्य नहीं किए जाते हैं, इसलिए संभावनाएं यही हैं कि अध्यक्ष के नाम की घोषणा 15 दिसंबर के पहले ही कर दी जाएगी।

वर्ष 2026 में अनेक राज्यों में चुनावी रणभेरी बजने वाली है। इनमें पश्चिम बंगाल, पाण्डिचेरी, असम, केरल तमिलनाडु शामिल हैं। तमाम चर्चाएं सूत्रों के हवाले से हो रही हैं। गृह मंत्री अमित शाह के बयान के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर कोई स्पष्ट वा आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

वैसे अब तक बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर जिन नामों की चर्चाएं या कयास लगाए जा रहे हैं, उनमें केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, शिवराज सिंह चौहान, भूपेंद्र यादव, विनोद तावड़े, अर्जुन मेघवाल, देवेंद्र फड़नवीस, मनोहर लाल खट्टर, के अलावा निर्मला सीतारमण और डी परंदेश्वरी के साथ वनित श्रीनिवासन आदि का नाम आगे दिख रहा है।

उधर, भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान यह भी कहा कि चूंकि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे कर्नाटक मूल के हैं, इसलिए उनकी काट के बतौर कर्नाटक से आने वाले प्रहलाद जोशी पर दांव लगाया जा सकता है। वैसे भी जोशी की छवि साफ सुथरी एवं केंद्रीय नेतृत्व की नजरों में सुझली और अच्छी है।

सूत्रों ने यह भी बताया कि बीते शनिवार को भाजपा के केंद्रीय कार्यालय में के. लक्ष्मण के कक्ष को खोलकर जिस तरह साफ सुथरा किया गया, उसने सभी को चौंका दिया। दरअसल के. लक्ष्मण भाजपा के चुनाव अधिकारी हैं, और महीनों से बंद पड़े धूल खा रहे उनके कक्ष को जिस तरह चाक चौबंद किया गया उसने सभी को हरकत में ला दिया है।

यहां यह भी उल्लेखनीय होगा कि वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल लोकसभा चुनाव 2024 से पहले ही पूरा हो गया था। इसके बावजूद पार्टी ने उन्हें अनेक बार सेवा विस्तार दिया। अब माना जा रहा है कि पार्टी संगठन में नई ऊर्जा और नए चेहरों को मौका देने की तैयारी में है। यही वजह है कि नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया को अब अंतिम चरण में ले जाने का प्रयास किया जा रहा है। अब हर किसी की नजरें भाजपा के आला नेताओं के कदम तालों पर साफ दिखाई दे रही है . . .

(साई फीचर्स)