🌸 देहरादून में सजी हस्तकला की रंगीन दुनिया
(ब्यूरो कार्यालय)
देहरादून (साई)। फिक्की (FICCI) के महिला प्रकोष्ठ फिक्की फ्लो द्वारा आयोजित फ्लो क्राफ्ट बाज़ार प्रदर्शनी ने उत्तराखंड की राजधानी को हस्तकला की सजीव ऊर्जा से भर दिया।
7 एवं 8 अक्टूबर को आयोजित इस दो दिवसीय प्रदर्शनी में देशभर से आए शिल्पकारों और कलाकारों ने अपनी परंपरागत कलाओं का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया।
प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण रहा मध्यप्रदेश के धार जिले के बाग गाँव से आए यूनेस्को अवॉर्डी शिल्पकार श्री मोहम्मद आरिफ खत्री, जिनकी बाग प्रिंट कला ने आगंतुकों का मन मोह लिया।
🏵️ बाग प्रिंट – भारत की शान, परंपरा और पहचान
बाग प्रिंट केवल एक छपाई तकनीक नहीं, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। यह कला मध्यप्रदेश के धार जिले के छोटे से गाँव ‘बाग’ में जन्मी, जहाँ खत्री परिवार सदियों से इस शिल्प को संरक्षित कर रहा है।
लकड़ी के हाथ से तराशे गए ब्लॉक्स, प्राकृतिक रंगों और वस्त्रों पर की गई सटीक छपाई इसकी विशेषता है। लाल, काला, जंगली हरा और नीला – ये रंग बाग प्रिंट की पहचान बन चुके हैं।
मोहम्मद आरिफ खत्री ने इस परंपरा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है। उन्होंने प्राकृतिक रंगों के प्रयोग, आधुनिक डिजाइन और पारंपरिक तकनीकों के समन्वय से बाग प्रिंट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध किया।
🌼 यूनेस्को अवॉर्डी कलाकार की कला ने सबका मन जीता
देहरादून प्रदर्शनी में श्री खत्री द्वारा प्रदर्शित वस्त्रों में साड़ियाँ,सूट,दुपट्टे,टेबल रनर,वॉल हैंगिंग्स और बांस से बने चिक ब्लाइंड्स शामिल थे।
हर वस्त्र पर की गई बाग प्रिंट की छपाई न केवल एक डिज़ाइन थी, बल्कि उसमें संस्कृति,परंपरा और सादगी का मेल दिखाई दिया।
प्रदर्शनी का सबसे मनमोहक क्षण तब आया जब मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की धर्मपत्नी श्रीमती गीता धामी ने स्वयं श्री खत्री के स्टॉल पर जाकर उनके कार्य की सराहना की।
उन्होंने बाग प्रिंट की प्राकृतिक रंगाई प्रक्रिया,ब्लॉक प्रिंटिंग तकनीक और कपड़ों पर उसकी टिकाऊ सुंदरता के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की।
👏 गीता धामी ने की बाग प्रिंट कला की सराहना
श्रीमती धामी ने इस अवसर पर कहा —
“बाग प्रिंट भारतीय परंपरा का वह स्वरूप है जो प्रकृति, संस्कृति और सौंदर्य का संगम प्रस्तुत करता है। ऐसी कला को प्रोत्साहन देना हर भारतीय का कर्तव्य है।”
उन्होंने श्री खत्री से एक सुंदर बाग प्रिंट सिल्क साड़ी भी क्रय की, जो इस पारंपरिक कला के प्रति उनके सम्मान को दर्शाती है।
🌿 बाग प्रिंट में छिपा पर्यावरणीय संदेश
बाग प्रिंट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी भी प्रकार के रासायनिक रंगों का उपयोग नहीं किया जाता।
सारे रंग प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त किए जाते हैं — जैसे कि अनार के छिलके, लौह की धूल, हरड़, नीम और चाय की पत्तियाँ।
इसलिए यह कला न केवल पर्यावरण के अनुकूल (Eco-friendly) है, बल्कि त्वचा के लिए भी सुरक्षित है।
मोहम्मद आरिफ खत्री का कहना है —
“हमारे पूर्वजों ने हमें सिखाया कि प्रकृति से जो लो, उसे सम्मान दो। यही बाग प्रिंट का दर्शन है।”
🧵 परंपरा से नवाचार की ओर
श्री खत्री ने बाग प्रिंट में कई नवोन्मेषी प्रयोग किए हैं —
- पारंपरिक डिज़ाइनों में आधुनिक मोटिफ़ जोड़ना
- विदेशी ग्राहकों के लिए समकालीन रंग संयोजन
- फैशन उद्योग के साथ सहयोग कर नई पीढ़ी में रुचि जगाना
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य है —
“इस कला को केवल संग्रहालयों तक सीमित न रखकर, युवाओं के पहनावे और जीवनशैली का हिस्सा बनाना।”
🕌 धार का बाग गाँव – विश्व पटल पर
आज बाग गाँव का नाम दुनिया के कई देशों में जाना जाता है।
फ्रांस, जापान, अमेरिका, और ऑस्ट्रेलिया तक बाग प्रिंट के उत्पाद निर्यात किए जा रहे हैं।
यूनेस्को ने श्री खत्री को हैंडलूम और क्राफ्ट प्रिज़र्वेशन अवॉर्ड देकर सम्मानित किया था।
यह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे गाँव और भारत की सांस्कृतिक धरोहर का सम्मान है।
🪔 देहरादून प्रदर्शनी – कलाकारों और शिल्पकारों का संगम
फिक्की फ्लो क्राफ्ट बाज़ार में देशभर से आए 100 से अधिक शिल्पकारों ने अपने उत्पाद प्रदर्शित किए।
राजस्थान के ब्लू पॉटरी, गुजरात के पटोला, उत्तराखंड की वूल क्राफ्ट, कर्नाटक की सैंडलवुड नक्काशी और मध्यप्रदेश की बाग प्रिंट ने मिलकर भारत की विविधता और एकता का सुंदर चित्र प्रस्तुत किया।
प्रदर्शनी का उद्देश्य था —
- भारतीय पारंपरिक कला को प्रोत्साहन देना
- शिल्पकारों को सीधा उपभोक्ताओं से जोड़ना
- महिला उद्यमिता और हस्तशिल्प को सशक्त बनाना
🎨 दर्शकों में उत्साह और गर्व
प्रदर्शनी देखने आए आगंतुकों ने बताया कि यह आयोजन भारत की मिट्टी की महक से भरा हुआ था।
हर स्टॉल पर परंपरा और रचनात्मकता की झलक थी।
खासकर बाग प्रिंट स्टॉल पर तो आगंतुकों की भीड़ लगी रही।
कई कला-प्रेमियों ने बाग प्रिंट वस्त्रों की खरीदारी करते हुए कहा कि –
“यह कला केवल वस्त्र नहीं, बल्कि संस्कृति को पहनने जैसा अनुभव देती है।”
🌻 बाग प्रिंट – ग्रामीण रोजगार का आधार
धार जिले के बाग गाँव में आज सैकड़ों परिवार इस कला से जुड़े हुए हैं।
महिलाएँ रंगाई, धुलाई और ब्लॉक तैयार करने के काम में लगी हैं।
इससे न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भरता का अवसर भी मिला है।
सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाएँ भी अब इस कला को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने के लिए पहल कर रही हैं।
🌺 मोहम्मद आरिफ खत्री का संदेश
प्रदर्शनी के समापन अवसर पर श्री खत्री ने कहा —
“देहरादून के लोगों का सम्मान और स्नेह मेरे लिए किसी पुरस्कार से कम नहीं। जब समाज पारंपरिक कला को समझता और सम्मान देता है, तो यह हमारे लिए सबसे बड़ा प्रोत्साहन होता है।”
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने देश की कला और संस्कृति को पहचानें और उसे आगे बढ़ाएं।
🔚 निष्कर्ष (Conclusion)
फिक्की फ्लो क्राफ्ट बाज़ार देहरादून ने यह सिद्ध कर दिया कि भारत की पारंपरिक कलाएँ आज भी जनमानस के हृदय में जीवित हैं।
बाग प्रिंट कला ने न केवल अपनी सुंदरता से दर्शकों को मोहित किया, बल्कि यह भी दिखाया कि जब परंपरा,पर्यावरण और नवाचार का संगम होता है, तो कला अमर बन जाती है।
मोहम्मद आरिफ खत्री जैसे कलाकार हमारे देश के गौरव हैं, जो अपनी जड़ों से जुड़े रहकर भारत की पहचान को वैश्विक मंच पर चमका रहे हैं।

आशीष कौशल का नाम महाराष्ट्र के विदर्भ में जाना पहचाना है. पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 30 वर्षों से ज्यादा समय से सक्रिय आशीष कौशल वर्तमान में समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के नागपुर ब्यूरो के रूप में कार्यरत हैं .
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