(गायत्री बरूआ)
गुवहाटी (साई)। असम में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के बीच चुनाव आयोग (Election Commission) ने मंगलवार को एक बड़ा और अहम कदम उठाया है। आयोग ने असम की सभी 126 विधानसभा सीटों को कवर करते हुए ‘स्पेशल रिवीजन (SR) 2026’ के तहत राज्य की अंतिम मतदाता सूची (Final Voter List) प्रकाशित कर दी है। इस सूची के जारी होते ही राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि अंतिम प्रकाशन में मसौदा सूची (Draft List) के मुकाबले मतदाताओं की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अंतिम मतदाता सूची से 2.4 लाख से अधिक नाम हटा दिए गए हैं। यह प्रक्रिया एक व्यापक सत्यापन अभियान के बाद पूरी की गई है। राज्य में अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव संभावित हैं, ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में नामों का कटना चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर यह प्रक्रिया कैसे पूरी हुई और इसके क्या मायने हैं।
ड्राफ्ट लिस्ट के मुकाबले कम हुए 2.43 लाख वोटर्स
असम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों ने स्पष्ट किया है कि शुद्धिकरण की प्रक्रिया बेहद सख्ती से लागू की गई है। आंकड़ों पर नजर डालें तो अंतिम मतदाता सूची में राज्य के कुल मतदाताओं की संख्या 2,49,58,139 (दो करोड़ उनचास लाख अट्ठावन हजार एक सौ उनतालीस) दर्ज की गई है।
गौरतलब है कि इससे पहले जब एकीकृत मसौदा मतदाता सूची (Integrated Draft Voter List) जारी की गई थी, तब उसमें कुल मतदाताओं की संख्या 2,52,01,624 थी। अंतिम सूची के प्रकाशन के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि मसौदा सूची की तुलना में 2,43,485 मतदाताओं के नाम कम हुए हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, यह कमी पूरी तरह से वैधानिक प्रक्रिया, सत्यापन और दावों व आपत्तियों के निपटारे के बाद आई है।
लैंगिक समीकरण: पुरुष और महिला मतदाताओं में कांटे की टक्कर
असम की अंतिम मतदाता सूची में लैंगिक संतुलन (Gender Balance) की एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। राज्य में पुरुष और महिला मतदाताओं की संख्या में बहुत अधिक अंतर नहीं रह गया है, जो लोकतांत्रिक भागीदारी के लिहाज से एक सकारात्मक संकेत है।
- पुरुष मतदाता: 1,24,82,213
- महिला मतदाता: 1,24,75,583
- तृतीय लिंग (Third Gender): 343
आंकड़े बताते हैं कि महिला मतदाता पुरुष मतदाताओं से केवल कुछ हजार ही कम हैं। यह दर्शाता है कि राज्य में महिला जागरूकता और पंजीकरण की प्रक्रिया सुचारू रूप से चली है। आगामी चुनावों में महिला वोट बैंक किसी भी राजनीतिक दल की जीत-हार तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
कैसे हुई छंटनी? घर-घर जाकर हुआ सत्यापन
मतदाता सूची से 2.4 लाख नामों का कटना कोई सामान्य घटना नहीं है। इसके पीछे चुनाव आयोग का एक व्यवस्थित अभियान रहा है। इस ‘स्पेशल रिवीजन 2026’ (Special Revision 2026) की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की गई।
- मसौदा प्रकाशन: स्पेशल रिवीजन के लिए एकीकृत मसौदा मतदाता सूची 27 दिसंबर, 2025 को प्रकाशित की गई थी।
- घर-घर सत्यापन (House-to-House Verification): इससे पहले, 22 नवंबर से 20 दिसंबर, 2025 के बीच पूरे राज्य में बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) द्वारा घर-घर जाकर सत्यापन अभियान चलाया गया। इस दौरान मृत मतदाताओं, स्थान परिवर्तन कर चुके लोगों और दोहरे पंजीकरण वाले नामों की पहचान की गई।
- दावे और आपत्तियां: मसौदा सूची जारी होने के बाद, जनता के लिए दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय सीमा 27 दिसंबर, 2025 से 22 जनवरी, 2026 तक रखी गई थी।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि दावों और आपत्तियों के निस्तारण और सत्यापन प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही यह अंतिम सूची तैयार की गई है। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को त्रुटि रहित बनाना था ताकि आगामी चुनावों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
क्या है ‘स्पेशल रिवीजन’ और यह क्यों है खास?
चुनाव आयोग की शब्दावली में इस बार की गई कवायद को ‘स्पेशल रिवीजन’ (SR) का नाम दिया गया है। आयोग के अनुसार, यह प्रक्रिया ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) और ‘स्पेशल समरी रिवीजन’ (SSR) के बीच का मध्य मार्ग है।
सामान्यतः ‘स्पेशल समरी रिवीजन’ एक नियमित प्रक्रिया होती है, जबकि ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) बेहद गहन जांच प्रक्रिया होती है जो वर्तमान में देश के कई अन्य राज्यों में चल रही है। असम में किया गया यह विशेष संशोधन, हालांकि SIR से थोड़ा कम सघन है, लेकिन फिर भी इसमें मतदाता सूची की शुद्धता पर विशेष जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि चुनाव से पहले बोगस वोटर्स को हटाया जा सके और योग्य नागरिकों को जोड़ा जा सके।
राजनीतिक हलचल और चुनाव की आहट
असम में विधानसभा का कार्यकाल जल्द ही समाप्त होने वाला है। राजनीतिक विशेषज्ञों और स्वयं मुख्यमंत्री के बयानों से यह संकेत मिल रहे हैं कि राज्य में मार्च-अप्रैल 2026 में विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं। ऐसे में यह फाइनल वोटर लिस्ट ही वह आधार होगी जिस पर चुनाव लड़ा जाएगा।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि राज्य की 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव मार्च-अप्रैल में संभावित हैं। मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन इस बात का भी संकेत है कि चुनाव आयोग अब चुनाव की तारीखों के ऐलान की दिशा में आगे बढ़ रहा है। एक बार चुनाव की तारीखों की घोषणा होने के बाद आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी, जिसके बाद मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव करना मुश्किल होगा।
बिहार में चुनाव के बाद होगा ‘SIR’
असम के संदर्भ के साथ-साथ मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पड़ोसी राज्यों की प्रक्रियाओं पर भी टिप्पणी की। उन्होंने उल्लेख किया कि बिहार में ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) की प्रक्रिया वहां के विधानसभा चुनावों के बाद आयोजित की जाएगी। यह बयान दर्शाता है कि चुनाव आयोग अलग-अलग राज्यों की परिस्थितियों और चुनावी कैलेंडर के हिसाब से मतदाता सूची पुनरीक्षण की रणनीति तय कर रहा है।
मतदाताओं पर प्रभाव और आगे की राह
जिन 2.43 लाख लोगों के नाम सूची से हटाए गए हैं, उनके लिए यह चिंता का विषय हो सकता है। आमतौर पर नाम कटने के कारणों में मतदाता की मृत्यु, निवास स्थान में स्थायी परिवर्तन, या एक से अधिक जगहों पर नाम दर्ज होना शामिल होता है। हालांकि, कई बार तकनीकी त्रुटियों के कारण भी वैध मतदाताओं के नाम कटने की शिकायतें आती हैं।
चूंकि यह ‘अंतिम मतदाता सूची’ है, इसलिए अब नए नाम जोड़ने या कटे हुए नामों को वापस लाने की प्रक्रिया चुनाव आयोग के ‘निरंतर अपडेशन’ (Continuous Updation) प्रावधानों के तहत ही संभव होगी, बशर्ते चुनाव की अधिसूचना जारी न हुई हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में नामों का कटना चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकता है, खासकर उन विधानसभा क्षेत्रों में जहां जीत और हार का अंतर बहुत कम होता है। असम की जनसांख्यिकी और संवेदनशील राजनीतिक माहौल को देखते हुए, विपक्ष इस मुद्दे को लेकर आयोग और सरकार पर सवाल उठा सकता है कि किन आधारों पर इतनी बड़ी संख्या में नाम काटे गए।
पारदर्शिता और निष्पक्ष चुनाव की तैयारी
चुनाव आयोग का यह कदम स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की प्रतिबद्धता का हिस्सा है। एक शुद्ध मतदाता सूची निष्पक्ष लोकतंत्र की पहली सीढ़ी होती है। आयोग ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि सूची में केवल पात्र नागरिक ही शामिल हों। 2.49 करोड़ से अधिक मतदाताओं वाला यह डेटाबेस अब असम के लोकतांत्रिक भविष्य को तय करने के लिए तैयार है।
अब सबकी निगाहें चुनाव आयोग की अगली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं, जब असम विधानसभा चुनावों की तारीखों का औपचारिक ऐलान किया जाएगा। तब तक, राजनीतिक दलों के लिए यह नया डेटा अपनी चुनावी रणनीति को फिर से तैयार करने का आधार बनेगा।
8️⃣ CONCLUSION /निष्कर्ष
असम में अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन और उसमें से 2.4 लाख नामों का कटना एक बड़ी प्रशासनिक कवायद है जो सीधे तौर पर आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों से जुड़ी है। जहां एक ओर यह प्रक्रिया मतदाता सूची को त्रुटि मुक्त बनाने के लिए आवश्यक थी, वहीं दूसरी ओर इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं का कम होना राजनीतिक चर्चा को जन्म दे सकता है। पुरुष और महिला मतदाताओं की लगभग समान संख्या राज्य में स्वस्थ लोकतंत्र का संकेत देती है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मार्च-अप्रैल में संभावित चुनावों में यह संशोधित मतदाता सूची किस करवट बैठती है और राजनीतिक दल इसे किस तरह लेते हैं।

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