वरिष्ठ हास्य कलाकार असरानी का निधन: एक युग का अंत

वरिष्ठ अभिनेता गोवर्धन असरानी (असरानी) का सोमवार, 20 अक्टूबर 2025 को मुंबई में, लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। करीब 50 वर्षों से अधिक फिल्म-करियर में हास्य और चरित्र पारंगत रहे इस अभिनेता ने ‘शोले’ में जेलर के रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ी। उनके इस चल बसे होने से भारतीय सिनेमा में एक युग समाप्त हुआ।

 (दीपक अग्रवाल)

मुंबई (साई)। भारतीय फिल्म-सिनेमा की वह चमकदार हस्ती, जिन्होंने कई दशकों तक हास्य और चरित्र भूमिकाओं के माध्यम से दर्शकों के दिलों में जगह बनाई, अब हमारे बीच नहीं हैं। मंगलवार की सुबह यह खबर सामने आई कि वरिष्ठ अभिनेता गोवर्धन असरानी (उर्फ असरानी) का सोमवार, 20 अक्टूबर 2025 को मुंबई में निधन हो गया।

इस लेख में हम इस कलाकार-यात्रा को, उनके योगदान को, उनके अंतिम समय की स्थिति को और फिल्म-विश्व में उनके स्थान को विस्तार से समझेंगे।

  1. निधन की पुष्टि और समय-स्थिति

असरानी का निधन मुंबई के भारतीय आरोग्य निधि अस्पताल (जुहू) में हुआ, जहाँ उन्हें कई दिनों से सांस लेने में तकलीफ और अन्य उम्र-सम्बंधित समस्या के कारण भर्ती किया गया था। उनके मैनेजर ने इस बात को पुष्टि की है कि उनका निधन करीब 3 पिछले दिनों के अस्पताल-प्रवेश के बाद हुआ।

उनका अंतिम संस्कार उसी शाम मुम्बई के सान्ताक्रूज़ क्रिमेटोरियम में एक निजी समारोह में सम्पन्न हुआ, जिसमें केवल परिवार के सदस्य व निकट परिचित मौजूद थे। यह पहल उनके निजी इच्छानुसार की गई थी।

  1. जीवन-यात्रासंघर्ष से सफलता तक

असरानी का जन्म 1 जनवरी 1941 (कुछ स्रोतों में 1940) को जयपुर, राजस्थान में हुआ था। उनके पिता एक कारपेट व्यवसायी थे। बचपन से ही उन्होंने अभिनय की ओर रुख किया। उन्होंने आवाज-कलाकार के रूप में भी काम किया था।

फिल्मी सफर उन्होंने 1960s में शुरू किया और 1967 में हिंदी फिल्म ‘हैरे कांच की चूड़ियाँ’ से शुरुआत की। वर्ष-प्रतिभा के कारण उन्होंने 300 से अधिक फिल्मों में काम किया, स्वतंत्र निर्देशन भी किया।

  1. प्रमुख फिल्म-भूमिकाएं और हास्य में महारथ

असरानी ने अपनी विशिष्ट नाक व ट्विस्टेड कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को मुस्कुराने पर मजबूर किया। ‘शोले’ में जेलर के रूप में उनका किरदार आज भी चर्चित है।

उनके कुछ उल्लेखनीय कार्य हैं — ‘चुपके‑चुपके’, ‘अभिमान’, ‘भूल भुलैया’, ‘वेलकम’ आदि में उन्होंने अपने प्रकार की छाप छोड़ी।

  1. भाव-श्रद्धांजलि और फिल्म-विश्व का शोक

उनके निधन की खबर ने बॉलीवुड और जन-जन में शोक-लहर फैला दी। अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार सहित कई बड़े कलाकारों ने ट्विटर, इंस्टाग्राम पर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।

उनकी विदाई पर यह कहा गया कि “वे उन लोगों में से थे जिन्होंने बड़ी-छोटी भूमिकाओं से जीवन्तता दी और हमारी यादों में मुस्कान का कारवाँ छोड़ गए।”

  1. हास्य-शैली और अभिनय-सूत्र

असरानी की हास्य-शैली सरल लेकिन असरदार थी। उन्होंने कभी गम्भीर बनने से डर नहीं दिखाया, परंतु उनकी कॉमिक टाइमिंग में गहराई थी।

उनका मानना था कि हास्य सिर्फ मज़ाक नहीं, बल्कि “स्थिति को समझने-और उसे हल्के अंदाज में प्रस्तुत करने” की कला है। उन्होंने रंगमंच, टीवी, फिल्मों में यह सिद्ध किया।

  1. आखिरी दिन-घड़ी और निजी इच्छाएँ

असरानी कुछ दिन पहले अस्पताल में भर्ती थे, ‘फ्लूइड इन लंग्स’ (फेफड़ों में पानी) जैसी समस्या से जूझ रहे थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने खुद अपनी अंतिम संस्कार को निजी रखने की इच्छा जताई थी, ताकि साथी-कलाकारों व मीडिया की उपस्थिति से परिवार को शांति मिल सके।

  1. विरासत और आने वाली पीढ़ियों के लिए संदेश

असरानी का योगदान सिर्फ एक कलाकार तक सीमित नहीं था — उन्होंने इस बात को प्रमाणित किया कि चरित्र-अभिनेता भी स्टार बन सकते हैं। उनकी यात्रा प्रेरणा-स्त्रोत है:

  • छोटे-से-छोटे अवसर को पूर्णता से निभाना
  • हास्य में भी संवेदनशीलता और आत्म-सम्मान रखना
  • वर्षों तक टिके रहने का जुनून

उनका निधन इस तथ्य का याद दिलाता है कि हास्य कलाकारों के योगदान को भी बड़ी गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

  1. फिल्मों से परेइंसान,रिश्ते,संवाद

बहुत कम लोग जानते थे कि असरानी ने प्रारंभ में आवाज-कलाकार के रूप में काम किया, ताकि अपनी पढ़ाई-खर्च चल सके।

वे सह-कलाकारों के बीच विनम्र थे, अक्सर “मुझे याद रहेगा” की भावनाएं बाँटते थे। उनकी निजी-रिश्तों में सरलता और सम्मान देखा जाता था।

  1. सोशल मीडिया-ओ-र श्रद्धांजलियाँ

उनके जाने के बाद सोशल मीडिया पर #RIPAsrani, #AsraniLegend जैसे हैशटैग वायरल हुए। कलाकार-दर्शक-प्रशंसक अपनी-अपनी यादों को साझा कर रहे हैं।

  1. क्यों उनका जाना एक युग का अंत है?

हास्य के उस दौर का जब हास्य मासूम, सरल, निर्दोष और वक्त-सापेक्ष होता था, उस दौर का असरानी चित्र थे। उनका जाना इस कला-शैली का अंत नहीं, बल्कि उसकी विरासत का आरंभ है।

निष्कर्ष (निष्कर्ष)

वरिष्ठ हास्य कलाकार गोवर्धन असरानी का 20 अक्टूबर 2025 को निधन एक भावुक क्षण है, लेकिन उनके द्वारा छोड़ी गई स्मृतियाँ, किरदार और हास्य-तरीके सदैव जीवित रहेंगे। उन्होंने 300 से अधिक फिल्मों में कार्य किया, हजारों लोगों को हँसाया और सिनेमा को समृद्ध किया।

आज, जब हम उनकी याद में सिर झुकाते हैं, तो यह याद रखना चाहिए कि कलाकार का असली सम्मान तब मिलता है, जब उसकी कला-विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करे। असरानी-जी ने इसे बखूबी किया।

उनका कुल योगदान, सरलता, मेहनत और प्रतिभा हमें यह सिखाती है: चमकने के लिए पहँचान की जरूरत नहीं, बल्कि उस पहँचान को समय-काबिल बनाकर रखना महत्वपूर्ण है। उनकी विदाई दुःखद है, पर उनकी स्मृति उत्सव-सी है — जो सदा मुस्कान और प्रेम का प्रतीक बनी रहेगी।

— समर्पित श्रद्धांजलि के साथ —