जब यमराज भी रह गए हैरान: नरक में इंडियन बहुओं का ‘ससुराल जैसा माहौल’!

इस मजेदार कहानी में यमराज नरक का दौरा करते हैं और वहाँ भारतीय बहुएँ हँसी–मज़ाक में खोई दिखाई देती हैं। यमदूत बताते हैं कि वे जहाँ भी जाती हैं, माहौल एडजस्ट कर ही लेती हैं। कथा मजेदार व्यंग और भारतीय सामाजिक तड़के से भरपूर है।

भारतीय बहुओं के एडजस्टमेंट की शक्ति पर दुनिया जितना भी रिसर्च कर ले, कम है! और इसका ताज़ा व सबसे मजेदार सबूत तब मिला जब खुद यमराज नरक का निरीक्षण करने निकल पड़े।

कहानी शुरू होती है एक सामान्य दिन से, जब यमराज अपनी रूटीन चेकिंग पर निकले। जगह–जगह सज़ाएँ, दूतों की हड़बड़ाहट, और पापियों की चीख–पुकार—सब कुछ वैसा ही था जैसा हर बार होता है।

लेकिन आज एक कोने से कुछ अलग आवाज़ आ रही थी…
ठहाके! खिलखिलाहट! गपशप की बारिश!
यमराज चौंक गए। नरक में जो लोग रोते हैं, वे हँसी की वजह से परेशान हो रहे थे।

उन्होंने तुरंत दूतों को बुलाया और पूछा:
ये कौन आत्माएँ हैं जो नरक में भी पार्टी कर रही हैं?”

यमदूत ने सिर खुजाते हुए जवाब दिया—
“सरकार… ये इंडियन बहुएँ हैं। कमबख्त… जहाँ भी जाती हैं, माहौल एडजस्ट कर लेती हैं।”

यमराज हैरान—“कैसे?”

दूत बोला—
“कहती हैं— अरे,बिल्कुल ससुराल जैसा माहौल है…कोई बात ही नहीं!
बस झाड़ू वर्कशॉप लगा दो, चाय दे दो, फिर देखना… दो मिनट में इनका ग्रुप बन जाता है!”

सच में, भारतीय बहुओं की एक खासियत है—
दर्द हो या तंगी, गुस्सा हो या गर्मी…
अगर 3 बहुएँ मिल जाएँ, तो हर जगह ससुराल जैसा एडजस्टेबल माहौल तैयार हो जाता है!

यमराज बोले—
“तो फिर नरक में शिकायत क्यों आई?”

यमदूत बोला—
“सर, पापियों ने शिकायत की है कि बहुएँ हँस–हँसकर उनका ‘नरक वाला मूड’ खराब कर रही हैं!”

और इस तरह नरक के इतिहास में पहली बार
हँसते–खिलखिलाते बहुओं के कारण दंडित पापियों ने यमराज से शिकायत दर्ज की।

निष्कर्ष (Conclusion)

इस मजेदार कहानी से एक बात साफ है—भारतीय बहुएँ जहाँ जाती हैं,अपना माहौल खुद बना लेती हैं।
नरक भी उनके सामने ससुराल जैसा महसूस होने लगे तो समझ लीजिए कि उनकी अडजस्टमेंट स्किल्स आसमान छू रही हैं!

(साई फीचर्स)