व्हाट्सएप आज सिर्फ चैटिंग ऐप नहीं, बल्कि ओपन यूनिवर्सिटी बन चुका है।
यहाँ बिना एडमिशन, बिना फीस और बिना परीक्षा के लोग “प्रोफेसर” बन जाते हैं।
डिग्री का सोर्स? — कॉपी + पेस्ट + फॉरवर्ड 😄
अब ज़रा कल्पना कीजिए…
मार्क जुकरबर्ग एक सुबह उठें और फैसला करें—
“व्हाट्सएप से कॉपी-पेस्ट ऑप्शन बंद!”
बस फिर क्या, ज्ञान का इंटरनेट स्लो हो जाएगा और 90% व्हाट्सएप प्रोफेसर्स नई नौकरी ढूंढते नज़र आएँगे।
घर से ही असर दिखने लगेगा—
पति-पत्नी जोक:
पति: आज ग्रुप में कुछ आया ही नहीं।
पत्नी: अच्छा हुआ, दिमाग को भी छुट्टी मिल गई!
दोस्तों की हालत और भी पतली—
दोस्त-दोस्त जोक:
दोस्त1: भाई, आज ज्ञान क्यों नहीं बाँट रहा?
दोस्त2: टाइप करने में आलस आ रहा है।
स्कूल-कॉलेज की यादें भी ताज़ा—
टीचर-स्टूडेंट जोक:
टीचर: यह उत्तर कहाँ से लिखा?
स्टूडेंट: सर, व्हाट्सएप से… लेकिन आज साइलेंस है!
ऑफिस में भी संकट—
बॉस-कर्मचारी जोक:
बॉस: मोटिवेशनल कोट क्यों नहीं भेजा?
कर्मचारी: सर, कॉपी-पेस्ट रिटायर हो गया है।
अगर सच में ऐसा हो गया, तो व्हाट्सएप का हाल कुछ यूँ होगा:
- सुबह के “गुड मॉर्निंग” मैसेज गायब
- बिना पढ़े फॉरवर्ड करने वालों की छुट्टी
- हर मैसेज से पहले सोचने की मजबूरी
- ग्रुप में सन्नाटा और मोबाइल की बैटरी खुश
असल में, कॉपी-पेस्ट ने लोगों को लेखक बना दिया और फॉरवर्ड ने विद्वान।
लेकिन जब यह सुविधा हटेगी, तब पता चलेगा—
ज्ञान लिखने में मेहनत लगती है!
- Conclusion (निष्कर्ष)
निष्कर्ष यही है कि व्हाट्सएप की असली ताकत कॉपी-पेस्ट है।
अगर यह बंद हुआ, तो
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर्स को सच में पढ़ाई करनी पड़ेगी!😂
और शायद… मोबाइल कम, दिमाग ज़्यादा इस्तेमाल होने लगेगा!
मार्क जुकरबर्ग अगर व्हाट्सएप पर कापी पेस्ट का आप्शन बंद कर दे तो . . .
व्हाट्सऐप के90 फीसदी ज्ञान देने वाले प्रोफेसर्स को नई नौकरी ढ़ूंढ़ने पर मजबूर होना पड़ेगा . . .
(साई फीचर्स)

आशीष कौशल का नाम महाराष्ट्र के विदर्भ में जाना पहचाना है. पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 30 वर्षों से ज्यादा समय से सक्रिय आशीष कौशल वर्तमान में समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के नागपुर ब्यूरो के रूप में कार्यरत हैं .
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