हर घर में टीवी रिमोट का अपना ही स्वभाव होता है—पूरे दिन आपके साथ रहेगा, लेकिन जैसे ही किसी जरूरी चैनल पर जाना हो, तुरंत गायब हो जाएगा।
पर असली दर्द तब होता है जब आस्था चैनल चल रहा हो और रिमोट कहीं गुम हो जाए!
एक दिन यही हुआ। घर में टीवी तेज आवाज़ में आस्था चैनल चला रहा था और सब लोग एक-दूसरे की ओर ऐसे देख रहे थे जैसे कोई बड़ी आपदा आ पड़ी हो।
तभी किसी ने सवाल पूछा—
“सवाल: बेबस और लाचार होना किसे कहते हैं?”
और जवाब आया—
“जवाब: आस्था चैनल चल रहा हो और रिमोट खो जाए!”
बस, इतना सुनते ही पूरा इंटरनेट ठहाकों से भर गया।
क्योंकि यह स्थिति लगभग हर घर में कभी न कभी जरूर आती है—जब टीवी का रिमोट माना नहीं जाता, और चैनल बदलना किसी युद्ध से कम नहीं लगता।
घर के सदस्य रिमोट ढूंढने के लिए ऐसे निकल पड़ते हैं जैसे कोई खोया खजाना खोज रहे हों।
सोफे की दरारें, कुशन के नीचे, पर्दों के पीछे, पेंट्री तक—हर जगह सर्च ऑपरेशन चलता है।
उधर टीवी पर मंत्रोच्चारण चल रहा होता है और घर के लोग बेचैन होकर कहते हैं—
“कोई तो इस टीवी को म्यूट कर दो यार!”
सबसे मजेदार पल वह होता है जब रिमोट आखिर मिलता है… और वह हमेशा वहीं से मिलता है जहाँ सबसे पहले देखा था!
पर तब तक सबकी बेबसी अपने चरम पर पहुंच चुकी होती है।
यह जोक मजाकिया अंदाज़ में बताता है कि रिमोट खोना सिर्फ एक टेक्निकल समस्या नहीं, बल्कि एक भावनात्मक संकट भी है—खासकर जब चैनल आपकी मनपसंद सूची में सबसे नीचे हो।
Conclusion (निष्कर्ष)
यह वायरल जोक बताता है कि असली बेबसी वही है जब टीवी का रिमोट गुम हो जाए और स्क्रीन पर आस्था चैनल लगा रहे।
हंसी-मजाक के माध्यम से यह छोटी-सी स्थिति बड़े फनी अंदाज़ में हमारे रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाती है।
(साई फीचर्स)

आकाश कुमार ने नई दिल्ली में एक ख्यातिलब्ध मास कम्यूनिकेशन इंस्टीट्यूट से मास्टर्स की डिग्री लेने के बाद देश की आर्थिक राजधानी में हाथ आजमाने की सोची. लगभग 15 सालों से आकाश पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं और समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के मुंबई ब्यूरो के रूप में लगातार काम कर रहे हैं.
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