गाँव के स्कूल में आज फिर हँसी का माहौल था। टीचर ने बच्चों से पूछा, “अगर कोई स्कूल के सामने बम रख दे तो क्या करोगे?”
संवाद1 (टीचर-विद्यार्थी):
- विद्यार्थी: “एक या दो घंटे देखेंगे। कोई ले जाता है तो ठीक है, वरना स्टाफ रूम में रख देंगे।”
सभी छात्र हँसी रोक नहीं पाए।
हास्य के पलों में:
- दोस्त-दोस्त संवाद:
- दोस्त 1: “भाई, बम को स्टाफ रूम में रख देना मतलब?”
- दोस्त 2: “मतलब हँसी का धमाका! कोई फटकारेगा नहीं।”
- बच्चा: “टीचर, बम क्यों रखा गया?”
- टीचर: “बच्चा, हँसी का टेस्ट लेने के लिए!”
मज़ेदार तथ्य:
- विद्यार्थी की चालाकी = हँसी का कारण।
- टीचर का प्रश्न = मजेदार शुरुआत।
- स्टाफ रूम = हँसी का ठिकाना।
संवाद2 (पति-पत्नी शैली):
- पत्नी: “अगर बच्चों ने स्कूल में बम रखा तो क्या करोगे?”
- पति: “मैं भी कहूँगा – देखो एक या दो घंटे, कोई उठाता है तो ठीक, नहीं तो स्टाफ रूम में रख देंगे!”
हास्य जोड़ने के लिए बुलेट पॉइंट्स:
- स्कूल = हँसी का मैदान।
- टीचर = प्रश्नों का राजा।
- विद्यार्थी = जवाबों का जादूगर।
- स्टाफ रूम = मजेदार सुरक्षित ठिकाना।
संवाद3 (टीचर-स्टूडेंट शैली):
- टीचर: “अच्छा बच्चो, बम रखने वाले को कौन पकड़ सकता है?”
- छात्र: “टीचर, वही जो हँसी रोक न पाए!”
Conclusion /निष्कर्ष:
टीचर और विद्यार्थी की यह बातचीत साबित करती है कि स्कूल के जोक्स भी हँसी का धमाका कर सकते हैं।
- पंचलाइन 1: “बम चाहे रखा हो या न रखा, हँसी तो फट गई!”
- पंचलाइन 2: “स्टाफ रूम में रखा बम = हँसी का बॉक्स!”
साई फीचर्स के इस फनी जोक ने दिखाया कि विद्यार्थी की शरारत और टीचर का प्रश्न मिलकर हँसी का तूफान बना सकते हैं।
टीचर : अगर कोई स्कूल के सामने बम रख देता है तो क्या करोगे?
विद्यार्थी : एक या 2 घंटे देखेंगे। कोई ले जाता है तो ठीक है,वरना स्टाफ रूम में रख देंगे।
(साई फीचर्स)

हर्ष वर्धन वर्मा का नाम टीकमगढ़ जिले में जाना पहचाना है. पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबे समय तक सक्रिय रहने के बाद एक बार फिर पत्रकारिता में सक्रियता बना रहे हैं हर्ष वर्धन वर्मा . . .
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